मध्यप्रदेश में बीजेपी ने उतारे पांच सीएम उम्मीदवार ! सब जीत गए तो क्या होगा ?

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न्यूज़ डेस्क

मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग की तरफ से अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं है लेकिन बीजेपी की तरफ से लगातार उम्मीदवारों की सूचि जारी होती जा रही है। पहले भी एक सूचि जारी हुई थी अब दूसरी सूचि जारी हुई है। इस सूचि में बीजेपी ने प्रदेश के पांच बड़े नेताओं को मैदान में उतार दिया है। ये पाँचों अभी सांसद हैं और इनमे से तीन तो केंद्रीय मंत्री भी है।
बीजेपी की यह सूची बहुत कुछ कह रही है। कई लोग तो यह कह रहे हैं कि जिन सांसदों को मैदान में उतारा गया है वे सभी मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ी हैसियत रखते हैं। वे सभी खुद को सीएम का उम्मीदवार भी मानते रहे हैं। कई बार इनके नामो की चर्चा होती भी रहती है। इनमे से तीन सांसद तो शिवराज चौहान खेमे के विरोधी भी हैं। अब बीजेपी ने इन सभी नामो को मैदान में एक साथ उतारने का फैसला लिया है। कहा जा रहा है कि इससे बीजेपी दो निशाना को साधना चाह रही है।
पहली बात तो यह है कि बीजेपी परिवारवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। ऐसे में अब बाप को टिकट देकर बेटे के टिकट को काटने का खेल हुआ है। दूसरे इन नेताओं की औकात को भी नापने की कोशिश की गई है। विधान सभा चुनाव में अगर ये सभी जीत जाते हैं तो प्रदेश की राजनीति तक इंक समेत दिया जाएगा और हार जायेंगे तो इनकी आगे की राजनीति को ख़त्म कर दिया जाएगा। कह सकते हैं इन्हे निपटाने की भी योजना है ताकि आगे से बीजेपी के भीतर कोई गुटबंदी न हो सके। इस बार निपटाने की कोशिश तो शिवराज सिंह की भी हो रही है। क्योंकि उन्होंने अभी तक जो किया है उसे ही आगे करके चुनावी मैदान में बीजेपी जा रही है।
मध्य प्रदेश भाजपा का गढ़ है और गुजरात के बाद दूसरा राज्य है, जहां बहुसंख्यक मतदाता सहज भाव से भाजपा को अपना मानते हैं। वहां राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने भी बहुत काम किया है। तभी वहां के विधानसभा चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को चुनाव में उतारना बड़ी बात है। इतना ही नहीं तीन केंद्रीय मंत्री भी चुनाव लड़ रहे हैं और कहा जा सकता है कि पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक को छोड़ कर बाकी सभी को मैदान में उतार दिया है।
भाजपा ने इतनी बड़ी संख्या में सीएम दावेदार चुनाव मैदान में उतारे हैं कि अगर जीत गई तो म्यूजिकल चेयर कराना होगा। मुख्यमंत्री पद के पहले दावेदार खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। आखिर पार्टी उनके काम पर चुनाव लड़ रही है। नाम भले नहीं लिया जा रहा है लेकिन काम तो उन्हीं का है। आखिर वे 17 साल मुख्यमंत्री रहे हैं। लंबे समय तक मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे कैलाश विजयवर्गीय काफी समय से सीएम पद के दावेदार हैं। वे इस बार चुनाव लड़ेंगे। पिछली बार उनके बेटे आकाश को इंदौर-एक सीट से टिकट मिली थी और वे जीते थे। इस बार इंदौर-तीन से कैलाश विजयवर्गीय को टिकट मिली है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनके पारंपरिक सीट से उनके बेटे ही लड़ेंगे या कोई और लड़ेगा।
पिछले कुछ दिनों से शिवराज सिंह चौहान को बदले जाने की चर्चा जोर-शोर से चल रही थी। उस दौरान दो नामों की चर्चा थी। कहा जा रहा था कि अगर चौहान को हटाया जाता है तो केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल या राज्य सरकार के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र मुख्यमंत्री बन सकते हैं। भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल का नाम भी शामिल किया है। वे नरसिंह पुर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। नरोत्तम मिश्रा तो खैर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे ही। सो, दो दावेदार ये हो गए।
इन तीन के अलावा चुनाव मैदान में उतारे गए चौथे दावेदार केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर हैं। वे मुरैना की दिमनी सीट से चुनाव लड़ेंगे। ध्यान रहे तोमर प्रदेश भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से हैं और केंद्र में कृषि जैसा बड़ा मंत्रालय संभाल रहे हैं। उनको मध्य प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक भी बनाया गया है। भाजपा ने उनको भी विधानसभा का चुनाव लड़ने को कहा है। सोचें, वे एक साथ तीन जिम्मेदारी निभाएंगे। केंद्र में मंत्री पद संभालते हुए पार्टी के लिए प्रदेश में चुनाव प्रबंधन का काम देखेंगे और फिर अपना चुनाव भी संभालेंगे। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये सभी नेता चुनाव जीत गए तब क्या होगा ?

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