न्यूज डेस्क
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी की किताब ‘प्रणब माई फादर ए डॉटर रिमेम्बर्स’ सोमवार को लॉन्च हो गई । शर्मिष्ठिा बुक लॉन्च के पहले कई पन्नों के सार्वजनिक होने से विवादों में घिर गई थीं। बुक लॉन्च नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इस किताब विमोचन के दौरान इमरजेंसी, वीर सावरकर, कांग्रेस पार्टी के उनकी किताब के विरोध, राहुल गांधी के बारे में प्रणब मुखर्जी की बात, उनके पिता को राष्ट्रपति बनाए जाने पर विस्तार से बात कही। इस कार्यक्रम में भाजपा, कांग्रेस के कई नेता भी मौजूद रहे।
बुक लॉन्च के बाद शर्मिष्ठा कहती हैं कि एक तरफ बीजेपी का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं है तो दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि वीर सावरकर कायर थे। इसलिए, मेरे पिता प्रणब मुखर्जी और मुझे नहीं लगता कि ऐसी कहानियां देश के लिए स्वस्थ हैं।
सावरकर पर भी रखी अपनी राय
शर्मिष्ठा ने कहा, प्रणब मुखर्जी सोचते थे कि जो व्यक्ति इतने साल तक जेल में रहा। उनपर टॉर्चर हुआ, देश के प्रति उनकी भावना थी। इंदिरा गांधी भी इस बात को स्वीकार करती थीं। उनके नाम पर स्टाम्प निकाला गया, तो जिस तरह से नैरिटिव चल रहा है कि, एक तरफ बीजेपी कह रही है कि नेहरू का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं है तो दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि वीर सावरकर कायर थे। इसलिए, मेरे पिता प्रणब मुखर्जी और मुझे नहीं लगता कि ऐसी कहानियां देश के लिए स्वस्थ हैं।
किताब में शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि 2018 में प्रणब राष्ट्रीय स्वयं संघ के दफ्तर क्यों गए थे?
शर्मिष्ठा ने अपने पिता के आरएसएस कार्यक्रम में हिस्सा लेने और विरोध करने के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, मैंने बाबा (पिता) से उनके फैसले पर तीन -चार दिनों तक लड़ाई की. एक दिन उन्होंने कहा, स्वीकार्यता मैं नहीं, बल्कि देश दे रहा है. बाबा को लगा कि लोकतंत्र संवाद पर आधारित है. यह विपक्ष के साथ बातचीत करने के बारे में है. बताते चलें कि प्रणब मुखर्जी 6 जून 2018 को RSS के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए नागपुर गए थे. इस बात पर शर्मिष्ठा ने ऐतराज जताया था।
राहुल गांधी के अध्यादेश की प्रतियां फाड़ने से बहुत गुस्से में थे प्रणव
शर्मिष्ठा की इस किताब में प्रणब की डायरियों से संदर्भ लिए गए हैं। किताब में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बारे में भी जिक्र किया गया है। शर्मिष्ठा ने कहा, मेरे पिता भी उस प्रस्तावित अध्यादेश (दागी नेताओं को बचाने वाला) के विरोध में थे, जिसकी एक प्रति राहुल गांधी ने सितंबर 2013 में एक संवाददाता सम्मेलन में फाड़ दी थी, लेकिन उन्हें लगा कि इस पर संसद में चर्चा की जानी चाहिए। बाद में प्रस्तावित किया गया कि ऐसे दागी नेता हाई कोर्ट में अपील लंबित होने तक सदस्य के रूप में बने रह सकते हैं। शर्मिष्ठा ने कहा, मैं ही उन्हें (अध्यादेश फाड़ने की) खबर सुनाने वाली थी, वो बहुत गुस्से में थे।
शर्मिष्ठा ने आपातकाल का किया गया बचाव
शर्मिष्ठा ने देश में लगी इमरजेंसी पर किए सवाल पर वो बचावमुद्रा में नजर आईं। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में हालात खराब थे। असम बिहार में लूटपाट हिंसा हो रही थीं। इसलिए 25 जून को इमरजेंसी लगानी पड़ी थी। किताब में इस बात का भी खुलासा करते हुए दावा किया कि जेपी ने सेना से सरकार की बात नहीं मानने के लिए कहा था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इमरजेंसी लगाए जाने को लेकर अपनी गलती का अहसास भी था। उनको लगता था कि आने वाले चुनावों में उनका सफाया हो जाएगा।
बता दें कि किताब प्रणब मुखर्जी की जयंती पर लॉन्च की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की और कहा, उनके राजनीतिक कौशल तथा बौद्धिक गहराई ने देश की दिशा को आकार दिया। वर्ष 1935 में जन्मे प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी का 31 अगस्त 2020 को निधन हो गया था।
