क्या है लैग्रेंज पॉइंट, जहां रुककर सूरज का अध्ययन करेगा आदित्य एल – 1

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बीरेंद्र कुमार झा
चांद पर इतिहास रचने के बाद अब इसरो की निगाहें सूरज पर टिकी हुई है ।जल्दी ही इसरो एक यान सूरज की ओर भेजने वाला है। इसरो ने इसका नाम आदित्य एल 1 मिशन रखा है। इस अंतरिक्ष यान के जरिए इसरो सौर कोरोना यानी सूरज की सबसे बाहरी परतों के दूरस्थ अवलोकन और एल 1 सूरज- पृथ्वी लैंग्वेज पॉइंट पर सौर वायु की स्थिति का पता लगाएगा ।इसरो के अध्यक्ष सोमनाथ ने कहा है कि सूर्य का अध्ययन करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन आदित्य एल 1 श्रीहरिकोटा पहुंच गया है और सितंबर के पहले सप्ताह में लांच होने के लिए पूरी तरह से तैयार है।इस अंतरिक्ष यान को सूर्य- पृथ्वी प्रणाली के लैंग्रेज पॉइंट 1 (L1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की योजना है। गौरतलब है कि यह धरती से लगभग 1.5 मिलियन  किलोमीटर दूर है।आदित्य एल 1 को लैंग्रेज बिंदु1 के चारों ओर स्थापित करने से उपग्रह बिना किसी रूकावट या ग्रहण के लगातार सूर्य का
अध्ययन कर सकता है।

क्या है लैंग्रेज पॉइंट ?

अंतरिक्ष में लैंग्रेज पॉइंट दो विशाल परिक्रमा करने वाले पिंडों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के तहत छोटे द्रव्यमान वाली वस्तुओं के लिए संतुलन पॉइंट होता है। आमतौर पर इस पॉइंट पर दो विशाल पिंड एक बिंदु पर असंतुलित गुरुत्वाकर्षण बल लगाते हैं जिससे उस बिंदु पर जो कुछ भी होता है, उसकी कक्षा बदल जाती है। लैंग्रेज पॉइंट 1 को एल 1 भी कहा जाता है। धरती और सूरज के संबंध में यह वह बिंदु है,जहां धरती और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल एक दूसरे को प्रभावित करता है। ऐसे में आदित्य एल 1 मिशन का उद्देश्य एल 1 के चारों ओर की कक्षा से सूर्य का अध्ययन करना है,विभिन्न तरंग बैंडों में प्रकाश मंडल ,क्रोमोस्फीयर, और सूरज की सबसे बाहरी परत कोरोना का निरीक्षण करना है। आदित्य L1 अध्ययन के लिए अपने साथ-7 पे लोड भी ले जा रहा है।

एल – 1 पॉइंट पर स्थिर रहेगी कोई वस्तु

धरती और सूर्य प्रणाली का लैंग्रेज पॉइंट 1( L – 1) की दिशा में पृथ्वी से करीब 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर स्थित है। यह बिंदु दो पिंडों को जोड़ने वाली रेखा पर है और सूरज के चारों ओर पृथ्वी के कक्षीय पक्ष में स्थित है। वैज्ञानिकों के लिए दिलचस्प बात यह है की एल 1 पॉइंट पर रखी कोई भी वस्तु पृथ्वी – सूर्य प्रणाली के ‚संबंध में अपेक्षाकृत स्थिर रहेगी। वस्तु की यह स्थिरता गुरुत्वाकर्षण बलों के संपर्क के कारण होता है। इस कारण हमेशा से इस¹स्थिति का अवलोकन करने की वैज्ञानिकों में जिज्ञासा रही है।

महत्वपूर्ण बातें

* सूर्य का अध्ययन करने के लिए 2 सितंबर को इसरो लॉन्च कर सकता है आदित्य एल 1 अंतरिक्ष यान

*आदित्य L – 1 सूरज की सबसे बाहरी परतों सूर्य कोरोना और पृथ्वी के लैंग्रेज पॉइंट की स्टडी करेगा।

* आदित्य एल – 1अंतरिक्ष यान को सौर कोरोना के दूरस्थ अवलोकन और एल – 1 पर सौर हवा के यथास्थिति अवलोकन के लिए बनाया गया है ।

* आदित्य एल – 1 पृथ्वी से करीब एक 15 लाख किलोमीटर दूर है ।

* आदित्य एल – 1 मिशन का लक्ष्य एल – 1 के चारों ओर की कक्षा से सूरज का अध्ययन करना है।

* यह अंतरिक्ष यान 7 पे लोड लेकर जाएगा, जो अलग-अलग वेव बैंड में फोटोस्फेयर क्रोमोस्फीयर और कोरोना का इंडक्शन करने में मदद करेंगे।

क्या अध्ययन करेगा आदित्य एल -1

इसरो आगामी 2 सितंबर को आदित्य एल – 1 सौर मिशन भेजने की पूरी तैयारी कर चुका है। पूरी उम्मीद की जा रही है कि आदित्य एल – 1 सौर मिशन को 2 सितंबर को इसरो रवाना कर देगा। यह सौर कोरोना के दूरस्थ अवलोकन और लैंग्रेज पॉइंट पर सौर वायु का अवलोकन करेगा।गौरतलब है कि एल – 1 पृथिवी से करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है। यह एल – 1 के चारों ओर की कक्षा से सूर्य का अध्ययन करेगा। यह अंतरिक्ष यान अपने साथ 7 पेलोड ले जा रहा है जो अलग-अलग वेव बैंड में फोटोस्फीयर ,क्रोमोस्फीयर और सूरज की सबसे बाहरी परत (कोरोना) का अध्ययन करेगा।इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि यह पूरी तरह से स्वदेशी प्रयास है, जिसमें राष्ट्रीय संस्थानों की भागीदारी है। आदित्य एल – 1 अल्ट्रावायलेट पेलोड का उपयोग करके सूर्य की सबसे बाहरी परत (कोरोना) और एक्स रे पेलोड का उपयोग कर सौर क्रोमोस्फीयर का अवलोकन कर सकता है।।

गगनयान की तैयारी जारी

अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) अहमदाबाद के निदेशक निलेश एम देसाई ने बीते दिनों कहा था कि सूरज का अध्ययन करने के लिए आदित्य एल ए1 मिशन तैयार है। संभावना है कि इसे 2 सितंबर को लांच किया जाएगा। इसी कड़ी में इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने भी कहा था कि सूरज के लिए आदित्य मिशन सितंबर महीने में लॉन्च करने के लिए तैयार हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि गगनयान पर अभी भी काम चल रहा है। सोमनाथ ने कहा था कि क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए संभवत सितंबर या अक्टूबर के अंत तक एक मिशन करेंगे, जिसका पालन किया जाएगा। कई परीक्षण मिशनों द्वारा जब तक कि हम संभवत 2025 तक पहला मानव युक्त मिशन पूरा नहीं कर लेते हमारा काम चलता रहेगा।

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