लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बांड पर रोक लगा दिए जाने और पूर्व में इसके जरिए जुटाए गए पैसों में से जो भंजाए नहीं गए हैं,उन पैसों को वापस लौटाने की बात कह कर राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है कि आगामी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए वे पैसे का जुगाड़ कैसे करेंगे ? देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने चुनावी बांड पर सुप्रीम कोर्ट की आज के फैसले का स्वागत करते हुए उस तरीके का भी जिक्र किया जिस पर चलकर राजनीतिक दल आने वाले दिनों में आसानी से चुनाव खर्च के लिए पैसे का जुगाड़ कर सकते हैं।
चुनावी बॉन्ड द्वारा राजनीतिक दलों का चुनावी चंदा का जुगाड़ सही नहीं
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बांड को असंवैधानिक करार कर दिए जाने के आज के फैसले को लेकर कहा कि मैं इस फैसले से पूरी तरह से सहमत हूं,क्योंकि मैंने पहले भी सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि चुनावी बांड चुनाव में पैसा जुटाने का सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावी बांड योजना ने कारपोरेट और राजनीतिक दलों के बीच सांठ- गांठ को बढ़ावा दिया है, जिसके परिणाम स्वरुप नीति निर्माण की प्रक्रिया भी बाधित और प्रभावित हुई है।
चुनावी बॉन्ड नहीं होने की स्थिति में राजनीतिक दलों के पास चुनावी चंदा का विकल्प
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने बताया कि चुनावी बांड की जगह राजनीतिक दल अन्य किस तरीके से फंड जुटा सकते हैं। इसके लिए उन्होंने सुझाव भी दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के लिए फंड जुटाने का एकमात्र तरीका राष्ट्रीय चुनाव कोष है। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय चुनाव कोष में जो कोई भी व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट दान करे, उसे एक सौ फीसदी कि टैक्स छूट का लाभ दिया जाए।बकौल कृष्णमूर्ति इसी फंड से सभी राजनीतिक दलों को चुनाव के दौरान राशि आवंटित की जानी चाहिए।
कांग्रेस भी कर चुकी है राष्ट्रीय चुनाव कोष की मांग
गौरतलब है कि कांग्रेस ने पिछले साल एक राष्ट्रीय चुनाव कोष बनाने की मांग की थी।कांग्रेस पार्टी ने यह आरोप लगाया था कि मौजूदा चुनावी बांड की प्रक्रिया गलत और पूरी तरह से भ्रष्ट है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पर एक पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए लिखा कि यह नोट पर वोट की शक्ति को मजबूत करता है।
चुनावी बांड का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को हो रहा था
बीजेपी सरकार द्वारा लाए गए इस चुनावी बांड का सबसे ज्यादा फायदा भी भारतीय जनता पार्टी को ही मिल रहा था। 2022-23 में बीजेपी को चुनावी बांड से प्राप्त कुल राशि का 61% चंदा, 1300 करोड रुपए मिला। भारतीय जनता पार्टी को मिली यह राशि इसी अवधि में कांग्रेस को चुनावी बांड से मिले दान से लगभग 7 गुना ज्यादा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आज चुनावी बांड को असंवैधानिक करार दिया
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने आज चुनावी बांड योजना को और असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करते हुए कहा कि यह संविधान प्रदत सूचना के अधिकार और बोलने का व्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में भारतीय स्टेट बैंक को 6 वर्ष पुरानी योजना में दान देने वालों के नाम की जानकारी चुनाव आयोग को देने का निर्देश दिया है।कोर्ट ने शीर्ष न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि बैंक द्वारा दी गई जानकारी में यह भी शामिल होना चाहिए कि किस तारीख को यह बॉन्ड बनाया गया था और उसकी राशि कितनी थी। शीर्ष न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को एसबीआई द्वारा साझा की गई जानकारी 13 मार्च तक अपने आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने की बात कही।

