ब्लड क्लॉट बनने से पहले शरीर कौन-कौन से वॉर्निंग संकेत देता है?

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ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का बनना हमारे शरीर का एक नॉर्मल प्रोसेस है।इसी प्रोसेस की वजह से जब हमें चोट लगती है, तो ये ज्यादा खून बहने से रोकता है। लेकिन जब यह थक्का नसों या धमनियों के अंदर बनने लगे, तो ये गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकता है।यशोदा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. कमलेश ए का कहना है कि कई मामल में ब्लड क्लॉट हार्ट अटैक, स्ट्रोक और पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थितियों का कारण बन सकता है।अच्छी बात यह है कि शरीर अक्सर इसके बनने से पहले कुछ चेतावनी सकेत देता है।इन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

ब्लड क्लॉट अक्सर पैरों की गहरी नसों में बनता है, जिसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहा जाता हैं।अगर एक पैर में अचानक सूजन आ जाए, चलने पर दर्द महसूस हो या पैर भारी लगने लगे, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर कमलेश बताते हैं कि शरीर के जिस हिस्से में क्लॉट बन रहा होता है, वहां की स्किन लाल, नीली या सामान्य से ज्यादा गर्म महसूस हो सकती है।कई लोगों को यह किसी मामूली चोट या संक्रमण जैसा लगता है, लेकिन यह ब्लड क्लॉट का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

उनका कहना है कि अगर ब्लड क्लॉट फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो ये पल्मोनरी एम्बोलिज्म का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में बिना किसी मेहनत के भी सांस फूलना, तेज-तेज सांस आना या सीने में दर्द महसूस हो सकता है।यह एक मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है।

डॉक्टर कमलेश बताते हैं कि कुछ मामलों में ब्लड क्लॉट हृदय तक पहुंचकर रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण सीने में दबाव, दर्द या जकड़न महसूस हो सकती है।अगर यह परेशानी अचानक शुरू हो और बढ़ती जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

ब्लड फ्लो प्रभावित होने पर शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।इसके कारण अचानक चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या बेहोशी जैसा लगना भी ब्लड क्लॉट से जुड़ा संकेत हो सकता है।

लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोग, मोटापे से जूझ रहे लोग, धूम्रपान करने वाले, गर्भवती महिलाएं, हाल ही में सर्जरी करा चुके मरीज और हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड क्लॉट का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है।

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