ईरान युद्ध में पाक भूमिका की समीक्षा करे अमेरिका:ट्रंप के करीबी नेता की मांग,शहबाज-मुनीर टेंशन में

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मांग की है कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने इजरायल के खिलाफ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के बयानों का भी हवाला दिया। लिंडसे ग्राहम का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें बताया गया है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी-इजरायली हमलों के दौरान ईरान के लड़ाकू विमानों को अपने एयरबेसों पर शरण दी थी। लिंडसे ग्राहम की इस मांग से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की टेंशन बढ़ सकती है।

लिंडसे ग्राहम ने सीबीएस न्यूज के व्हाइड हाउस रिपोर्टर जेनिफर जैकब के एक्स पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, अगर यह रिपोर्ट सही है, तो ईरान, अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान जो भूमिका निभा रहा है, उसकी पूरी तरह से समीक्षा करनी होगी। इजरायल के प्रति पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के कुछ पिछले बयानों को देखते हुए, अगर यह बात सच निकलती है, तो मुझे ज़रा भी हैरानी नहीं होगी।

जेनिफर जैकब ने अपने एक्स पोस्ट में ईरानी लड़ाकू विमानों को पाकिस्तान में छिपाने की सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट को शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, “सूत्रों ने @JimLaPorta और मुझे बताया कि जब पाकिस्तान ने खुद को तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक कूटनीतिक माध्यम के तौर पर स्थापित किया, तो उसने चुपके से ईरानी सैन्य विमानों को अपने देश में पार्क करने की अनुमति दे दी। ऐसा करके संभवतः उसने उन विमानों को अमेरिकी हवाई हमलों से बचाया। अप्रैल की शुरुआत में जब ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की, उसके कुछ ही दिनों बाद तेहरान ने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयर फोर्स बेस पर भेजे।

उन्होंने आगे लिखा कि इन सैन्य साजो-सामान में ईरानी वायु सेना का एक RC-130 विमान भी शामिल था। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट विमान का ही एक ऐसा प्रकार है, जिसका इस्तेमाल टोही और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है।इस बीच अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान अक्सर ईरान की स्थिति की जो तस्वीर पेश करता है, वह असलियत से कहीं ज्यादा सकारात्मक होती है। इसी वजह से ट्रंप के सहयोगी पाकिस्तानी मध्यस्थों से आग्रह कर रहे हैं कि वे तेहरान के साथ अपनी बातचीत में ज्यादा स्पष्ट और खरी बात करें।

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