न्यूज़ डेस्क:मोदी सरकार में गृह राज्य मंत्री निशीथ प्रामाणिक ने 2009 के एक कथित चोरी के आरोप मामले में पश्चिम बंगाल के अलीपुर द्वार जिला अदालत में सरेंडर कर दिया। प्रामाणिक पर पिछले साल नवम्बर में अलीपुर द्वार जिला अदालत द्वारा दो आभूषण की दुकानों में चोरी के आरोप के ममले में गिरफ्तारी वारंट जारी किये गए थे। प्रामाणिक इस बीच में कोलकत्ता हाई कोर्ट भी गए जहाँ उच्च न्यायलय ने उन्हें जिला अदालत में 12 जनवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था।
जिला अदालत में समर्पण के बाद प्रामाणिक करीब 45 मिनट तक कोर्ट में रहे। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई से उन्हें अदालत में खुद उपस्थित होने की जरुरत नहीं होगी, इसके बजाय उनके वकील द्वारा प्रतिनिधित्व किया जा सकता है। प्रामाणिक बंगाल के कूच बिहार से संसद हैं और मोदी सरकार में गृह राज्य मंत्री।
कोर्ट से बाहर आते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा राज्य सरकार द्वारा राज्य में विपक्षी नेताओं को लगातार झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मुझे फंसाने की राजनीतिक साजिश है। शुरूआत में इस मामले की सुनवाई उत्तर 24 परगना जिले के बारासात की एक अदालत ने की थी। हालांकि, बाद में मामला अलीपुरद्वार न्यायिक तृतीय न्यायालय के समक्ष आया। 2019 में फिर से प्रमाणिक के सांसद बनने के बाद मामले को बारासात में एमपी/एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, बाद में फिर से कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर मामले को अलीपुरद्वार न्यायिक तृतीय न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
प्रमाणिक ने 2021 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भी लड़ा था और कूचबिहार जिले के दिनहाटा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। हालांकि, चुनाव में बीजेपी की हार के बाद प्रमाणिक ने अपनी लोकसभा सीट बरकरार रखने का विकल्प चुना और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत तृणमूल कांग्रेस से की थी। हालांकि, त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली के लिए 2018 के चुनावों से पहले उन्होंने खुद को तृणमूल से अलग कर लिया और 2018 में अपने समर्थकों को निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में खड़ा किया, जिनमें से कई निर्वाचित हुए। इसके बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए और कूचबिहार से 2019 का लोकसभा चुनाव जीता।
इससे पहले भी, प्रमाणिक 2021 में उस समय विवादों में घिर गए थे, जब कांग्रेस के तत्कालीन राज्यसभा सदस्य रिपुन बोरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि प्रमाणिक एक बांग्लादेशी हैं और उनकी राष्ट्रीयता की जांच की जानी चाहिए। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

