राजस्थान फतह के लिए पीएम मोदी अमित शाह और जेपी नड्डा लगा रहे जोर

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बीरेंद्र कुमार झा

राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी के टॉप ब्रास पीएम मोदी, अमित शाह और जे पी नड्डा लगातार राजस्थान का दौरा कर रहे हैं। बीजेपी हर हाल में राजस्थान का चुनावी किला फतह करना चाहती है।सियासी जानकारों का कहना है कि कर्नाटक चुनाव में बीजेपी का हिंदुत्व का मुद्दा नहीं चला। ऐसे में पार्टी आलाकमान राजस्थान को लेकर बेहद सतर्क है। राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर एबीपी न्यूज़ कराए गए सर्वे से भी बीजेपी के नेता गदगद हैं। प्रदेश में चुनाव इस साल के आखिर में होने हैं।, जिसके परिणाम का असर आगामी लोकसभा पर भी पड़ता राय है।बीजेपी के लिए राजस्थान कितना अहम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमित शाह और जेपी नड्डा लगातार यहां का दौरा कर रहे हैं। पीएम मोदी 9 महीने में 8 बार राजस्थान जा दौरा कर चुके हैं और सीकर के बाद पीएम मोदी का नागौर दौरा भी जल्दी ही बन रहा है जबकि जे पी नड्डा 13 दिन में 2 बार जयपुर आ चुके हैं।

अन्य राज्यों की तुलना में जीत की संभावना अधिक

जेपी नड्डा ने पार्टी के नेताओं को न सिर्फ एकजुट होकर काम करने की नसीहत दी, बल्कि गुटबाजी करने वालों को चेताया भी। गौर से देखा जाय तो जिन 5 राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़,तेलंगाना,राजस्थान और मिजोरम में चुनाव विधान सभा का चुनाव होना है,उसमें राजस्थान को छोड़ दिया जाए तो अन्य राज्यों में बीजेपी की सत्ता की राह थोड़ी कठिन है। ऐसे में बीजेपी का मुख्य फोकस राजस्थान है। इसकी दो वजह है।एक तो यहां कांग्रेस के विधायकों में असंतोष है,जिसे बीजेपी को भुना सकती है, और दूसरी वजह यह है कि इस राज्य में हर बार 5 साल बाद सत्ता बदलने का ट्रेंड भी रहा है।इसके अलावा राजस्थान बीजेपी के लिए इसलिए भी महत्व रखता है क्योंकि अशोक गहलोत कांग्रेस के बड़े नेता है और राजस्थान की जीत से बीजेपी आगामी लोक सभा चुनाव में भी एक बड़ा संदेश दे सकती है।

जयपुर में जेपी नड्डा ने दी पार्टी नेताओं को नसीहत

राजस्थान में शनिवार को आते ही जेपी नड्डा की नई टीम का ऐलान कर दिया गया।कयास लगाया जा रहा है कि वसुंधरा राजे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहेगी।हालांकि जे पी नड्डा की टीम में वसुंधरा राजे सिंधिया पहले भी उपाध्यक्ष पद पर थी।उनके पद को बरकरार रखा गया है।विधानसभा चुनाव से पहले नई टीम में वसुंधरा राजे को रखकर बी जे पी ने एक सियाशी संदेश दिया है वसुंधरा राजे को राजस्थान की राजनीति से दूर रखने का।दरअसल वसुंधरा राजे का धुर विरोधी धड़ा लंबे समय से राजे का विरोध करता रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि इस वजह से ही पार्टी आलाकमान ने वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है।पार्टी का पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने और सामुहिकता पर ज्यादा जोर दिया है।

राजस्थान में हर 5 साल बाद सत्ता बदलने का है ट्रेंड

राजस्थान में 1993 के बाद से ही हर 5 साल बाद सत्ता बदलने का ट्रेन रहा है हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करना है कि इस बार हम रिवाज बदलेंगे। सीएम का दावा है सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के सहारे सत्ता में वापसी होगी।पुरानी पेंशन स्कीम, फ्री में इलाज, पेंशन में बढ़ोतरी और फ्री मोबाइल से जनता का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। ऐसे में सरकार को रिपीट होने से कोई रोक नहीं सकता है।वहीं बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का कहना है की गहलोत सरकार इस बार रिपीट नहीं बल्कि डिलीट होगी।लोग गहलोत सरकार की कुशासन से परेशान हैं। राज्य में करप्शन है और कानून व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।

 

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