अखिलेश अखिल
यह बात और है कि इंडिया की अगली बैठक अगस्त के अंतिम सप्ताह में मुंबई में होनी है जहाँ सीट शेयरिंग से लेकर गठबंधन के अध्यक्ष ,संयोजक को लेकर निर्णय लिया जायेगा और फिर साझा कार्यक्रम भी तैयार होगा लेकिन कुछ राज्यों में सीट की मांग को लेकर सपा ,कांग्रेस और टीएमसी के बीच बातचीत चल रही है। हालांकि इन बातों को लेकर कोई अंतिम रूपरेखा तैयार नहीं हुआ है लेकिन सपा और टीएमसी के बीच जो बातें हुई है उसके मुताबिक टीएमसी भी अपना एक या दो उम्मीदवार यूपी में उतारने को तैयार है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक टीएमसी का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा इसी साल के अप्रैल में समाप्त हो गया है। ऐसे में टीएमसी कुछ राज्यों में अपना आधार बनाने को तैयार है ताकि फिर उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सके। इसी सोंच के तहत टीएमसी अगले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से अपने एक या दो उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाह रही है। खबर के मुताबिक इसके लिए टीएमसी अखिलेश यादव से बात भी कर रही है। सपा भी
जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक सपा प्रमुख अखिलेश यादव टीएमसी को यूपी में एक सीट देने को तैयार भी है। बदले में सपा भी चाहती है कि पश्छिम बंगाल में भी टीएमसी एक सीट दे। सपा अपने नेता किरणमय नंदा को बंगाल से चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही है। किरणमय नंदा सपा के उपाध्यक्ष हैं और वे बंगाल से ही आते हैं। नंदा बंगाल के बड़े नेताओं में शुमार रहे हैं। वे वाम सरकार में कई बार मंत्री भी रह चुके हैं ,उनकी अपनी राजनीतिक जमीं भी है और नंदा भी चाहते हैं कि वे इस बार बंगाल से चुनाव लड़ सकते हैं। जानकारी के मुताबिक टीएमसी भी इस बात से सहमत हो गई है कि किरणमय नंदा के लिए एक सीट दिया जा सकता है।
सपा सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस यूपी में एक सीट पर अपने सिंबल पर प्रत्याशी उतारना चाहती है। इसके लिए कांग्रेस छोड़कर तृणमूल का दामन थामने वाले पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी काफी समय से प्रयासरत भी बताए जाते हैं। बताते हैं कि इस मुद्दे को लेकर सपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच काफी हद तक सहमति बन चुकी है, लेकिन सपा ने भी किरणमय नंदा के लिए पश्चिम बंगाल में एक सीट मांगी है। दोनों पक्षों के लिए एक-दूसरे के राज्य में कौन सी सीट मुफीद रहेगी, इस पर विचार चल रहा है। यूपी में तृणमूल को पूर्वांचल में एक सीट मिलने की उम्मीद है।
जानकारी के मुताबिक सपा , कांग्रेस के लिए यूपी में गठबंधन के तहत कुछ सीटें छोड़ने को तैयार है तो बदले में सपा भी राजस्थान और हरियाणा में दो-दो सीटों पर अपना दावा प्रस्तुत करेगी। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है तो हरियाणा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस है।सपा नेताओं का तर्क है कि राजस्थान के अलवर, जयपुर देहात, सीकर और भरतपुर लोकसभा क्षेत्रों में यादव मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। इसलिए इनमें से दो सीटों पर सपा के सिंबल पर उम्मीदवार उतारे जाने चाहिए। इसी तरह से हरियाणा में यादव बहुल गुड़गांव और रोहतक सीटों पर सपा दावा करेगी।
लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर अब इस बात पर चर्चा चल रही है कि उत्तरप्रदेश से नीतीश कुमार और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को भी मैदान में उतारा जाए। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक इंडिया गठबंधन के तहत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यूपी से चुनाव लड़ाया जा सकता है। इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। नीतीश कुमार कुर्मी बहुल मिर्जापुर या प्रयागराज की फूलपुर लोकसभा सीट से लड़ सकते हैं। इसी तरह खड़गे के लिए सीट की तलाश की जा रही है। अगर कांग्रेस की सहमति बनती है और सपा के साथ ही जयंत चौधरी तैयार होते हैं तो खड़गे यूपी से चुनाव लड़ सकते हैं।
सपा सूत्रों का मानना है कि नीतीश कुमार के यूपी से लड़ने पर उनके सजातीय कुर्मी वोट पूरे प्रदेश में इंडिया गठबंधन के साथ आ सकता है। हालांकि, नीतीश के यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ने पर सपा बिहार में एक सीट पर अपने प्रत्याशी को लड़ाना चाहेगी।

