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कर्नाटक के बेलगामी जिले की 18 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस की लड़ाई को पलीता लगाती एमईएस की राजनीति !

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अखिलेश अखिल
इस चुनाव में बेलगामी में क्या होगा यही सब जानने को उत्सुक है। बेलगामी कर्नाटक का वह जिला है जहां विधान सभा की 18 सीटें है और यहाँ लिंगायत समाज की तूती बोलती है। यही बेलगामी बीजेपी का गढ़ है और सबसे ज्यादा विधायक बीजेपी को इसी जिले से मिल जाते हैं। इसी बेलगामी पर बीजेपी को फक्र भी है और इसी बेलगामी के सहारे बीजेपी कांग्रेस और जेडीएस को मात भी देती रही है। लेकिन इस बार क्या बेलगामी में सबकुछ बीजेपी के लिए वैसा ही है जैसा पहले हुआ करता था ?

बेलगामी की राजनीति इस बार कितना बदलेगी और बीजेपी के इस किले को कांग्रेस कितना भेद पाएगी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन बेलगामी को लेकर कांग्रेस की भी पूरी तैयारी है। कांग्रेस के तमाम लिंगायत नेता बेलगामी में डेरा डाले बैठे हैं और जब से जगदीश शेट्टार और सावदी कांग्रेस के साथ खड़े हुए हैं तब से बेलगामी के परिणाम को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई है। बीजेपी की मुश्किलें बढ़ी हुई है।

लेकिन बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति में पलीता एक और संगठन भी लगा लगा रहा है। यह संगठन है महाराष्ट्र एकीकरण समिति जिसे एमईएस भी कहा जा रहा है। यह संगठन शिवसेना कर एनसीपी का संयुक्त संगठन है और चुकी बेलगामी का इलाका महाराष्ट्र से मिलता है इसलिए इस संगठन का दबदबा यहाँ कुछ ज्यादा ही है। यही वह इलाका है जहाँ दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद चलता है और पिछले महीने इस इलाके को लेकर दोनों राज्यों में कई तरह की राजनीति देखने को मिली थी। अब इस इलाके से इस संगठन ने पांच उम्मीदवारों को मैदान में उतार है जिससे बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति में पलीता लगने की आशंका है।

याद रहे सीमावर्ती बेलगावी जिले में 18 विधानसभा क्षेत्र हैं। यह जिला लिंगायत समुदाय का मजबूत गढ़ है और पिछले दो दशक से भाजपा का गढ़ रहा है। पिछले तीन चुनावों की तरह ही अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। केवल पांच सीट पर शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी समर्थित एमईएस उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। इन सीट पर एमईएस ने स्थानीय उम्मीदवारों को खड़ा किया है।

बता दें कि एमईएस बेलगावी और अन्य मराठी भाषी इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल किए जाने की मुखर समर्थक है। दिग्गज नेता बी एस येदियुरप्पा को दरकिनार करने के बाद लिंगायत समुदाय में पैदा हुई नेतृत्व की कमी, सुरेश अंगड़ी एवं उमेश कट्टी जैसे कुछ प्रमुख स्थानीय लिंगायत भाजपा नेताओं के निधन और अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध रखने वाले एवं राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जारकीहोली परिवार के बढ़ते दबदबे का असर मतदान पर भी पड़ने की संभावना है।

जानकार मानते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं दिए जाने से नाराज तीन बार के विधायक और पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी सहित कई असंतुष्ट भाजपा नेताओं के पार्टी छोड़ देने से यहां भाजपा को कुछ नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर, एमईएस बेलगावी में सीमा संबंधी मुद्दों को जीवित रखने की भरसक कोशिश कर रही है। बेलगावी में मराठी भाषी जनसंख्या करीब 40 प्रतिशत है। उन पांच निर्वाचन क्षेत्रों में त्रिकोणीय मुकाबले से राष्ट्रीय दलों को नुकसान हो सकता है, जहां मराठी भाषी लोग बहुसंख्यक हैं। इस जिले के पांच निर्वाचन क्षेत्रों में मराठों का वर्चस्व है, जबकि शेष 13 निर्वाचन क्षेत्रों में से अधिकतर में लिंगायत बहुसंख्यक हैं। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति/ जनजाति (एससी/एसटी) की भी अच्छी खासी आबादी है और जिले में इन समूहों के लिए दो सीट आरक्षित हैं।

बता दें कि इस जिले में कई निर्वाचित प्रतिनिधि चीनी के व्यापारी हैं और तीन शक्तिशाली राजनीतिक परिवार – जारकीहोली, जोले और खट्टी- का अच्छा खासा प्रभाव है। जारकीहोली परिवार से रमेश जारकीहोली और बालचंद्र जारकीहोली क्रमशः गोकक और अराभवी विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। परिवार के एक अन्य सदस्य सतीश जारकीहोली यमकनमर्दी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। एक अन्य प्रमुख परिवार जोले है, जिसका प्रतिनिधित्व वर्तमान मुजराई (धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती) मंत्री शशिकला जोले करती हैं। वह निप्पनी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। उनके पति अन्ना साहब जोले बेलगावी जिले के चिकोडी से भाजपा के लोकसभा सदस्य हैं।

खट्टी परिवार से, रमेश खट्टी चिकोड़ी -सदलगा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि उनके भतीजे निखिल खट्टी अपने पिता उमेश खट्टी के असामयिक निधन के बाद हुक्केरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। उमेश खट्टी आठ बार विधायक और छह बार मंत्री रहे थे।

बता दें कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बेलगावी जिले के 18 विधानसभा क्षेत्रों में 39.01 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 19,68,928 पुरुष मतदाता, 19,32,576 महिला मतदाता और 141 अन्य के रूप में पंजीकृत हैं। इससे पहले, 2018 के चुनावों में भाजपा ने 10 और कांग्रेस ने आठ सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन कांग्रेस के तीन विजयी नेता बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।

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