छह वर्षों में राज्य में 677 जीविका दीदी की पौधशाला तो 310 दीदी की नर्सरी का हुआ विकास
करीब एक करोड़ जीविका दीदियों के हाथों चार करोड़ से भी अधिक हुआ पौधरोपण
जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण के साथ-साथ रोजगार सृजन के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल
पटना, 2 मई।
समाज को निरंतर जागरूक करने वाली जीविका दीदियां अब पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिक निभा रही हैं। यह दीदियां हरित जीविका, हरित बिहार कार्यक्रम चला रही हैं, जिसके तहत पिछले छह वर्षों में एक करोड़ दीदियों के हाथों चार करोड़ से भी अधिक पौधरोपण राज्य भर में किया जा चुका है। ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार सक्रिय जीविका दीदियां पर्यावरण से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण अभियान का एक हिस्सा बन चुकी हैं।
हरित क्षेत्र बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में जीविका दीदियों ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत वर्ष 2019 से 2024-25 तक राज्यभर में इन दीदियों के हाथों 987 नर्सरी विकसित किए जा चुके हैं। इनमें 677 दीदी के पौधशाला भी शामिल हैं।
विभागीय अधिकारियों की माने, तो जीविका के हाथों लगाए गए पौधों में 1.04 करोड़ से भी अधिक पौधे चार फीट से लंबे हैं। दीदी की नर्सरी एक अनूठा उद्यम मॉडल बनकर उभरा है, जो कम लागत में पौधरोपण को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। साथ ही नर्सरी संचालक महिलाओं के लिए स्थिर और सतत आय का स्रोत तैयार हुआ है। जीविका दीदियों के हाथों संचालित नर्सरियां सामुदायिक उद्यम के रूप में कार्य रही हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आर्थिक विकास की नई राह बनी है।
नर्सरी के लिए दीदियों का चयन संकुल स्तरीय संघ के माध्यम से होता है। इसमें उन्हीं दीदियों का चयन किया जाता है जो स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हों और उनके द्वारा समूह के नियमों का ठीक ढंग से पालन करने के साथ-साथ ऋण वापसी के मामले में उनकी साख अच्छी है। इन दीदियों को टिम्बर पौधों यानी इमारती लकड़ियों के लिए तैयार होने वाले पौधे तैयार करने के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग के तहत सेंटर फॉर एक्सीलेंस, देसारी, वैशाली में फलदार वृक्ष के संरक्षण एवं देखभाल के बारे में 15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण मुहैया कराया जा रहा है।

