बाबा रामदेव की कंपनी पर महाराष्ट्र में एफडीए का एक बड़ा एक्शन

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महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भ्रामक विज्ञापनों और गलत लेबलों के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान के तहत बाबा रामदेव की दिव्य फार्मेसी और पतंजलि के उत्पादों पर बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए ने नियमों के उल्लंघन और असाध्य रोगों के इलाज के झूठे दावों के आरोप में 73 लाख रुपये से अधिक का स्टॉक जब्त किया है, जिसमें पतंजलि के उत्पाद शामिल हैं।

बाबा रामदेव के दिव्य फार्मेसी के विरुद्ध एफडीए की मुख्य कार्रवाई की बात करें तो महाराष्ट्र एफडीए ने नागपुर, चंद्रपुर और अन्य शहरों में छापेमारी कर दिव्य फार्मेसी द्वारा निर्मित लगभग 51 लाख रुपये मूल्य की संदेहास्पद व मिसब्रांडेड आयुर्वेदिक दवाएं जब्त कीं है।एफडीए ने नोटिस जारी कर पतंजलि फूड्स को ‘करेला जामुन जूस’ के प्रचार में कथित भ्रामक और अतिशयोक्तिपूर्ण दावों को लेकर ‘ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट’ के तहत नोटिस भेजा गया है।

बाबा रामदेव के दिव्य फार्मेसी इस मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट ले जाकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का निवेदन किया है।पतंजलि और दिव्य फार्मेसी ने महाराष्ट्र एफडीए की इन छापों और कार्रवाई को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद अदालत ने फिलहाल आगे की छापेमारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पतंजलि के दिव्य फार्मेसी के उत्पादों को ‘औषधि और जादुई उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954’ (Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954) के तहत जब्त किया है। पतंजलि की इन आयुर्वेदिक दवाओं के लेबल और पैकेजिंग पर कैंसर, मधुमेह (डायबिटीज), और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) जैसी गंभीर बीमारियों को पूरी तरह ठीक करने के भ्रामक दावे किए गए थे। इस कानून के तहत ऐसी बीमारियों के जादुई या शत-प्रतिशत इलाज का दावा करने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध है। राज्यव्यापी छापेमारी के दौरान लगभग ₹51.41 लाख के पतंजलि के उत्पाद जब्त किए गए। जब्त किए गए उत्पादों में मुख्य रूप से दृष्टि आई ड्रॉप (Drishti Eye Drop), गिलोय घन वटी (Giloy Ghan Vati), मधुग्रिट (Madhugrit), और सिस्टोग्रिट डायमंड (Cystogrit Diamond) जैसी दवाएं शामिल थीं।

इस कार्रवाई के बाद पतंजलि ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि जब तक केंद्र सरकार आयुर्वेदिक उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों को लेकर कोई देशव्यापी नीति नहीं बना लेती, तब तक आगे ऐसी कोई जब्ती या छापेमारी की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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