बीरेंद्र कुमार झा
सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस को गलत तरीके से पेश करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट को फर्जी करार दिया है।इसमें एक फाइल तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का फर्जी बयान लिखा था।साथ ही लोगों से अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश ने ऐसा कोई पोस्ट जारी नहीं किया है और ना ही उन्होंने इस तरह के किसी पोस्ट को मंजूरी दी है।
प्रेस नोट जारी कर किया वायरल वीडियो का पर्दाफाश
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा। जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया है कि सोशल मीडिया पर लोगों से अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का अनुरोध वाला एक पोस्ट प्रसारित किया जा रहा है। इसमें एक फाइल तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए चीफ जस्टिस को गलत तरीके पेश किया गया है। इस प्रेस नोट में साफ तौर पर कहा गया है कि यह पोस्ट फर्जी है और गलत इरादेवाला व शरारतपूर्ण है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कानून लागू करने वाले पदाधिकारियों के साथ परामर्श कर उचित कार्यवाही की जाएगी।
पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर हुआ हंगामा
इस वायरस फर्जी पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर खूब हंगामा मचा हुआ है। कई सारे लोग बगैर हकीकत जाने ही इसे शेयर कर रहे हैं। इस पोस्ट पर तरह – तरह के कमेंट भी आ रहे हैं। यह तो फर्जी लग रहा है। यूजर्स का कहना है कि आखिर मुख्य न्यायधीश ने यह बात कहां कहीं और कब लोगों से इस तरह की अपील की। वायरल पोस्ट में भारत के मुख्य न्यायधीश की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए कुछ बातें लिखी गई थी। इसमें देश के लोगों से सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई थी। पोस्ट के कैप्शन में लिखा था ‘ भारतीय लोकतंत्र सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद।’
वायरल पोस्ट में क्या कहा गया है
भारत के मुख्य न्यायाधीश का हवाला देते हुए इस पोस्ट में कहा गया है “हम भारत के संविधान,भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। मगर इसमें आपका सहयोग भी बहुत जरूरी है। सभी लोगों को एकजुट होकर सड़कों पर उतरना होगा और सरकार से अपना हक मांगना होगा। यह तानाशाही सरकार लोगों को डराएगी ,धमकाएगी लेकिन आपको डरना नहीं है, डटे रहना है। हिम्मत करो और सरकार से हिसाब मांगों। मैं आपके साथ हूं।
