बीरेंद्र कुमार झा
चंद्रयान 3 का श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल लॉन्चिंग हो गया है ।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रमा पर अपना तीसरा मिशन चंद्रयान 3 आज आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लांच किया है। चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग पर ना सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया की नजर है। सफल लॉन्चिंग के बाद अब लैंडिंग का इंतजार है।अगर लैंडिंग सफल रही तो संयुक्त राज्य अमेरिका रूस और चीन के बाद भारत यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा।
झारखंड में बना था चंद्रयान 3 का लॉन्चिंग पैड
भारत के इस तीसरे चंद्र मिशन में भी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग का है। चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था, उतना ही गौरव का विषय यह झारखंड के लिए भी था क्योंकि जिस एसएलपी सेकंड लॉन्चिंग पैड से चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग हुई उसका कार्य आदेश टर्न की प्रोजेक्ट के तहत ‘ मेकन’ को मिला था। मेकन के अभियंताओं ने इसका डिजाइन बनाया था,जिसके आधार पर सेकंड लॉन्चिंग पैड का निर्माण एचईसी रांची में हुआ था। एचईसी के अधिकारी ने बताया कि एसएलपी के लिए जरूरी उपकरणों का निर्माण एचईसी के वर्कशॉप में किया गया है ।सेकंड लॉन्चिंग पैड 84 मीटर ऊंचा है ।इसके अलावा के एचईसी ने टावर क्रेन,प्लेटफार्म ,स्लाइडिंग डोर 400 टन ईओटी क्रेन और मोबाइल लॉन्चिन पेदस्तल भी तैयार किए थे।
चंद्रयान-3 से जुड़े हैं झारखंड के बेटे सोहन
Chandrayaan-3 से झारखंड के सोहन यादव भी जुड़े हुए हैं। सोहन झारखंड के खूंटी के तोरपा के रहने वाले हैं और पिछले 7 सालों से इसरो से जुड़े हैं। चंद्रयान-3 के लॉन्चिंग में झारखंड के सोहन की भी आम भूमिका रही। चंद्रयान-3 की सफल लॉन्चिंग से सोहन के परिवार में भी खुशी की लहर है सोहन की मां देवकी देवी ने मिशन चंद्रयान 3 की सफलता के लिए वैष्णो देवी जाकर प्रार्थना की थी। सोहन की दो बहने और एक बड़े भाई हैं।
क्या करती है सोहन यादव की मां
सोहन यादव टपकारा जैसे छोटे से गांव में पले बढ़े हैं। सोहन की मां बताती है कि सोहन बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थे। पिता घूरा यादव ट्रक ड्राइवर है। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने के बावजूद सोहन की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी गई। माता-पिता ने सोहन को पहले शिशु विद्या मंदिर में पढ़ाया। फिर जवाहर नवोदय विद्यालय मेसरा में और उसके बाद डीएवी बरियातू में उसका दाखिला कराया गया। इसके बाद सोहन ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी केरल से पढ़ाई की और इंजीनियर बन गए। इसके बाद वर्ष 2016 में सोहन इसरो से जुड़ गए ।सोहन चंद्रयान -2 में भी अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा वह इसरो के गगनयान प्रोग्राम का भी हिस्सा रहे हैं।
मिशन चंद्रयान 3 का लक्ष्य रोवर की सॉफ्ट लैंडिंग
गौरतलब है कि मिशन चंद्रयान-2 के दौरान अंतिम समय में लैंडर विक्रम अपने पथ से भटक गया और सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था। चंद्रयान-3 अगर अपने मिशन में सफल रहा तो अमेरिका ,चीन और पूर्व सोवियत संघ जैसे देशों के क्लब में भारत भी शामिल हो जाएगा। इन तीनों देशों ने चांद पर अपने रोवर की सॉफ्ट लैंडिंग कराने में सफलता हासिल की है।
नई सीमाओं के पार इसरो
अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने इससे पहले एक बयान जारी कर कहा है कि chandrayaan-3 कार्यक्रम के तहत शुरू अपने चंद्र मॉड्यूल की मदद से चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग और चंद्रमा के भूभाग पर उबर के घूमने का प्रदर्शन करके नई सीमाएं पार कर रहा है।
