SLBC Bihar Meeting: बिहार में बैंकिंग को लेकर बड़ा मंथन! किसानों से MSME तक कर्ज व्यवस्था पर सरकार का फोकस

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SLBC Bihar Meeting: बिहार में वित्तीय समावेशन, कृषि ऋण, MSME फाइनेंस और सरकारी योजनाओं के जरिए लोगों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने को लेकर राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की 98वीं बैठक में व्यापक समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने की।

बैठक में ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार और कृषि विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा समेत राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कृषि और प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज पर खास जोर

बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही तक वार्षिक साख योजना (ACP) की प्रगति का जायजा लिया गया। प्राथमिक क्षेत्र को दिए जा रहे ऋण के साथ कृषि, MSME और विभिन्न सरकारी प्रायोजित योजनाओं की वित्तीय प्रगति पर भी चर्चा हुई।

कृषि क्षेत्र में KCC फसल ऋण, डिजिटल KCC और कृषि अवसंरचना कोष के तहत वित्तपोषण की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अलावा पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए KCC ऋण उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया गया।

बैठक में जीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के बैंक लिंकेज और व्यक्तिगत वित्तपोषण की स्थिति पर भी विशेष चर्चा हुई।

PMEGP से पीएम सूर्य घर तक, योजनाओं की हुई समीक्षा

बैंकों के जरिए सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। इनमें PMEGP, PMFME, मुद्रा योजना, PM स्वनिधि, PM विश्वकर्मा और PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना प्रमुख रहीं।

MSME क्षेत्र को कर्ज उपलब्ध कराने की स्थिति और प्राथमिक क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया।

NPA और बैंक रिकवरी पर भी हुई चर्चा

बैठक में बैंकों के NPA, नीलाम-पत्र मामलों और SARFAESI अधिनियम से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे पर भी चर्चा हुई। ऋण की रिकवरी में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने और लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही जिलों के Credit-Deposit Ratio (CD Ratio) की समीक्षा की गई। जिन क्षेत्रों में ऋण वितरण की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है, वहां बैंकिंग गतिविधियों को मजबूत करने के उपायों पर विचार हुआ।

बिना बैंकिंग सुविधा वाले इलाकों में खुलेंगे नए आउटलेट

बैठक में बिना बैंकिंग सुविधा वाले रेवेन्यू केंद्रों यानी URCs में नए बैंकिंग आउटलेट खोलने और महिला बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (BCs) की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। BCs के सामने आने वाली परिचालन संबंधी समस्याओं को दूर करने और ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच मजबूत करने को लेकर भी चर्चा हुई।

डिजिटल पेमेंट और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा

बिहार में डिजिटल बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए PoS मशीनों और बेहतर कनेक्टिविटी के विस्तार पर जोर दिया गया। वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए FLCs और CFLs के साथ-साथ स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में PMJDY, री-KYC, PMJJBY, PMSBY और अटल पेंशन योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने, स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी और अनक्लेम्ड एसेट्स के जल्द निपटारे जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल रहे।

बैंकिंग शिकायतों और CSR गतिविधियों पर निर्देश

मुख्यमंत्री सचिवालय के ई-कंपलायन्स डैशबोर्ड, सहयोग पोर्टल (RTMS) और CP GRAMS Portal के जरिए मिलने वाली बैंकिंग शिकायतों के अनुपालन की भी समीक्षा की गई। बैठक में बिहार राज्य CSR पोर्टल पर संबंधित नोडल अधिकारियों के पंजीकरण और CSR गतिविधियों से जुड़ी जानकारी समय पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए।

अंत में RSETI और NSDC के माध्यम से कौशल विकास, व्यापार एवं निर्यात को बढ़ावा देने और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में ऋण पुनर्गठन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बैठक में बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।

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