तीन मुलाकात और कई संकेत, शरद पवार पवार के अंदर खाने एक होने की चर्चा

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बीरेंद्र कुमार झा

महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार एक ऐसे नेता हैं जिनके दांव आसानी से समझ में नहीं आते ।कई बार तो करीबी भी उनके अगले कदम से अनजान रहते हैं।एनसीपी में इन दिनों जो चल रहा है,उसे लेकर भी कयासों का दौर जारी है।अजित पवार की बगावत को करीब 4 सप्ताह हो चुके हैं ।अजित पवार और उनके 8 समर्थक नेताओं को मंत्री पद भी मिल गया है ।एनसीपी दो धड़ों में बंटी दिख रही है लेकिन जिस तरह से दोनों गुटों में सीजफायर जैसी स्थिति है, उससे कई प्रकार की चर्चाएं तेज है।कहा तो यह भी जा रहा है कि कहीं यह शरद पवार का ही गेमप्लान तो नहीं है। हाल में घटी कुछ घटनाओं से उसे बल भी मिलता है।

नहीं कर रहे हैं शक्ति प्रदर्शन

एक वजह यह है कि अब तक किसी भी गुट ने 36 विधायकों का समर्थन दिखाने की हड़बड़ी नहीं दिखाई है जो पार्टी पर दावे के लिए जरूरी है ।एनसीपी के कुल 53 विधायक हैं। पार्टी पर दावा करने के लिए दो तिहाई यानी 36 या उससे अधिक विधायकों का समर्थन जरूरी है।चुनाव आयोग में शुरुआती दौर के बाद फिलहाल दोनों गुट शांत हैं। इसके अलावा दोनों तरफ से एक दूसरे पर तीखे हमले भी नहीं हो रहे हैं, कम से कम निजी हमले से तो परहेज किया ही जा रहा है।दोनो ने अपने – अपने दरवाजे एक – दूसरे के लिए खोल रखे हैं।

मुलाकात के बाद नरम है चाचा और भतीजा

विधानसभा की कार्यवाही में भी दोनों गुटों की विधायक पूरी संख्या में नहीं पहुंच रहे हैं।इसे भी टकराव को टालने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले दिनों अजीत पवार और शरद पवार की तीन मुलाकातें भी हुई थी। इसके बाद से चाचा और भतीजा के बीच कोई तीखी बात सामने नहीं आई है। इस बीच एक फोटो वायरल हो रही है जिसने अंदरखाने किसी गेम की चर्चा को और तेज किया है। दरअसल अजीत पवार और महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल को प्रतिद्वंदी माना जाता है,वहीं पाटिल को शरद पवार के सबसे भरोसेमंद लोगों में शुमार किया जाता है।

गले मिले जयंत पाटिल और पवार खेमे के सुनील तटकरे

कुछ दिन पहले ही जयंत पाटिल और अजित पवार ग्रुप के नेता सुनील तटकरे की विधानसभा में मुलाकात हुई थी ।दोनों इस दौरान गले मिले और खूब हंस हंस कर बात करते रहे। दो प्रतिद्वंदियों के ऐसे मिलन की तस्वीरें वायरल हो रही है। इसके अलावा अजित पवार जो वित्त मंत्रालय संभाल रहे हैं उन्होंने एनसीपी के दोनों गुटों के विधायकों के क्षेत्र के लिए बड़े पैमाने पर फंड जारी किए हैं। इससे साफ है कि वह भी शरद पवार के कहे जा रहे विधायकों के लिए रास्ता खोले हुए हैं ।पर चर्चा सबसे ज्यादा यही है कि सब कुछ शरद पवार की सहमति से ही हो रहा है।वे इंतजार कर रहे हैं और 2024 के चुनाव से कुछ महीने पहले एक बड़ा फैसला ले सकते हैं।

 

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