अखिलेश अखिल
यह भी कम आश्चर्य का विषय नहीं है कि नए गठबंधन इंडिया के कई नेता यह कहते नजर आते हैं कि पीएम मोदी संसद में बोलने से डर रहे हैं। जबकि सच यही है कि पीएम मोदी बोलने से कभी डरते नहीं। वे कही भी कुछ बोल सकते हैं और बेधड़क बोल सकते हैं। उस बोल के बाद आप उसकी जांच परख करते रहिये। सौ गलतियां ही क्यों न निकालिये लेकिन सच यही है कि मोदी कभी बोलने से डरते नहीं। हाँ वह पत्रकारों से सीधा संवाद करने से जरूर डरते होंगे क्यों उनसे टेढ़े -मेढ़े सवाल किये जा सकते हैं लेकिन किसी भी मंच से बल्ने से डरते नहीं। बोलना तो उनकी आदत है। शगल है। नहीं बोलेंगे तो पेट का पानी भी नहीं पांच सकता है। वे प्रखर वक्ता है और मौजूदा समय में उनके जैसा वक्ता देश में बहुत कम ही है। कांग्रेस के भीतर तो नहीं ही है।
जहाँ तक मणिपुर पर संसद में बोलने की बात है ,समय आने दीजिये वे खूब बोलेंगे। वे इतना बोलेंगे विपक्ष वाले चिल्लाने लगेंगे। और फिर संसद तो पीएम मोदी के लिए खेल का मैदान जैसा है। वे गलत को सही और सही को गलत अपने अंदाज में रखते हैं और सामने वाले को धराशाही भी करते हैं। एक शिकायत है कि वे संसद में कुछ बोल नहीं रहे हैं। मणिपुर पर कुछ कह नहीं रहे है। लेकिन यह सब तो विपक्ष का भ्रम है। सच तो यही है कि वे अपनी तैयारी कर रहे हैं। अब जब उनको संसद में बोलना ही है तो उसकी तैयारी तो करेंगे ही। केवल मणिपुर के बारे में ही वे बात नहीं करेंगे। वे कई और मसलों पर भी बात करेंगे। वे इंडिया नमक संगठन पर भी कहेंगे और आगामी राजनीति से जुड़े विपक्ष के खेल पर भी वार करेंगे। पीएम मोदी वार खूब करते हैं। उनके वार तीखे होते हैं और यही वार करने की कला उनका यूएसपी है।
संसद में दिया गया उनका हर भाषण राजनीतिक भाषण होता है, जिसमें वे पूरे देश के लोगों और खास कर अपने समर्थकों को संबोधित करते हैं। हां, यह जरूर है कि कई बार वे अपनी सरकार के मुश्किल में डालने वाले मुद्दों पर चुप रह जाया करते हैं। लेकिन वह एक रणनीति का हिस्सा होता है। रणनीतिक कारणों से ही वे मणिपुर के मसले पर नहीं बोल रहे थे। लेकिन अब अविश्वास प्रस्ताव की मंजूरी में उनको बोलना होगा तो मणिपुर के साथ साथ वे दूसरे तमाम राज्यों की कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी बोलेंगे।
वे मणिपुर पर बोलेंगे और वहां की समस्या को भी स्वीकार करेंगे। मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र किए जाने का वीडियो आने के बाद वे इस पर क्रोध और पीड़ा जाहिर कर चुके हैं। इससे ज्यादा क्या करेंगे? सेना और अर्धसैनिक बल वहां अपना काम कर रहे हैं और राज्य सरकार से लेकर भाजपा के आईटी सेल ने यह माहौल बनाया है कि राज्य की एन बीरेन सिंह सरकार ड्रग कार्टेल पर कार्रवाई कर रही है। सरकार की ओर से कहा गया है कि वह कुकी लोगों के खिलाफ नहीं है, बल्कि ड्रग कार्टेल के खिलाफ है। यह भी खबर आई है कि म्यांमार से सात सौ से ज्यादा लोगों ने मणिपुर में घुसपैठ की। सो, जातीय हिंसा का यह मामला हिंदू मैती बनाम कुकी ईसाई का पहले से था और अब ड्रग कार्टेल व अंतरराष्ट्रीय साजिश का भी हो गया है।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री इन सारे पहलुओं पर बात रख देंगे और उसके बाद विपक्ष को निशाना बनाएंगे और साथ ही अपनी सरकार की उपलब्धियां बताएंगे। इस साल राज्यों में चुनाव होना वाले हैं और लोकसभा चुनाव का साल भी चल रहा है। पांच साल पहले जुलाई 2018 में भी प्रधानमंत्री ने अविश्वास प्रस्ताव पर लंबा-चौड़ा भाषण दिया था और अपनी उपलब्धियां बताई थीं। तभी भाजपा नेता अविश्वास प्रस्ताव को एक मौके की तरह देख रहे हैं। उनको पता है कि सरकार बहुमत साबित करेगी और उसके साथ विपक्ष के ऊपर मोदी का हमला होगा।
मोदी अपने भाषण में क्या बोलेंगे यह भी लगभग तय दिख रहा है। उनके दो भाषणों से इसके संकेत मिलते हैं। मंगलवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की तुलना देश को लूटने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी और देश को गहरे घाव देने वाले आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से की। उनका दूसरा भाषण बुधवार का था, जो उन्होंने प्रगति मैदान में कन्वेंशन सेंटर के उद्घाटन में दिया, जिसमें फिर चुनाव जीतने का दावा करते हुए कहा कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था बन जाएगा। ये दोनों थीम हैं, जिनके ईर्द-गिर्द प्रधानमंत्री का भाषण होगा।
क्या विपक्ष को और भी कुछ चाहिए। पीएम मोदी ने साफ़ कर दिया है कि चुनाव में आमना सामना होना है। मोदी को यह भी पता है कि इस बार विपक्षी एकता की वजह से उनकी परेशानी बढ़ने वाली है लेकिन वे इतना जरूर जानते हैं कि सामने चाहे कोई भी हो उसे हरकते रहरणा है ,उसे लज्जित करते रहना है ,उसे दागी साबित करते रहना है।

