कल अजीत पवार का सुपर संडे था लेकिन आज शरद पवार का सुपर मंडे !

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अखिलेश अखिल 
ठगनी राजनीति का चरित्र कैसा ? चरित्रहीन राजनीति में जो कुछ भी होता है वह सब महाराष्ट्र की राजनीति में देखने को मिल रहा है। इस राजनीति में किसी को दोषी कौन ठहरा सकता है ? यह तो भारतीय राजनीति का असली चेहरा है। यही सच है। जनता अगर इस चरित्र को  परख ले और आत्मसात कर ले तो राजनीति में ऐसे लोगों की नानी याद कराई जा सकती है लेकिन ऐसा होता नहीं है। नेता देश की जनता को असली नब्ज को जानते हैं और और फिर अपना खेल कर जाते हैं।    
कल महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार का दिन था। उन्होंने कल सुपर संडे मनाया था।  अजित पवार खुद के साथ आठ विधायकों को लेकर  राज्यपाल के पास पहुंच गए और शपथ भी ले लिए। सब कुछ इतनी जल्दबाजी में हुई कि किसी को कुछ पता भी नहीं चला। लेकिन आज शरद पवार ने सुपर मंडे का जश्न मनाया है। अजीत पवार के खेमे पर बड़ी करवाई की है  और सभी को पार्टी से ही बर्खास्त  कर दिया है    यह सच है कि एनसीपी में टूट हो गई है। लेकिन  पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने संघर्षपूर्ण रुख अपनाया है, जिसके अब नतीजे भी दिखने लगे हैं। रविवार को शरद पवार की इच्छा के विरुद्ध जाकर भतीजे अजित पवार ने शिंदे-फडणवीस सरकार को समर्थन दिया और खुद उपमुख्यमंत्री बन गए।इस शपथ ग्रहण समारोह में एनसीपी के कई विधायक मौजूद रहे। जबकि एनसीपी सांसद सुनील तटकरे और अमोल कोल्हे भी उपस्थित थे। लेकिन अजित  के नए डिप्टी सीएम बनने के कुछ ही घंटों के अंदर ही अमोल कोल्हे ने अपना रुख बदल लिया है और आज साफ कर दिया है कि वह शरद पवार के साथ ही रहेंगे। खबर है कि अजित पवार को समर्थन देने वाले कई अन्य एनसीपी विधायक भी पाला बदल रहे हैं। 
           शिरूर से एनसीपी के लोकसभा सांसद अमोल कोल्हे ने अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए एक ट्वीट किया है, जिसमें कहा है, ‘जब दिल और दिमाग में जंग हो तो दिल की सुनो। शायद दिमाग कभी कभी नैतिकता भूल जाता है … पर दिल कभी नहीं।‘
           मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के अगुवाई वाले खेमे की ओर से 30 से अधिक विधायकों का समर्थन होने का दावा किया गया है। जिसमें से अब चार विधायकों ने अचानक तटस्थ रुख अपना लिया है। जबकि कल तक अजित पवार का समर्थन करने वाले 9-10 विधायक अपना फैसला बलदने की तैयारी में है। शरद पवार के आक्रामक रुख को देखते हुए पारनेर के विधायक निलेश लंके, चिपलून के विधायक शेखर निकम, शिरूर के विधायक अशोक पवार, वसमत के विधायक राजू नवघरे, जुन्नर के विधायक अतुल बेनके, अकोला के विधायक किरण लहामटे, पुसद के विधायक इंद्रनील नाईक ने तटस्थ रुख अपनाया है। यह सभी विधायक कल तक अजित पवार के साथ खड़े थे, जिन्होंने 24 घंटे में ही अपनी भाषा बदल ली है।
              उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वह अजित पवार के साथ नहीं बल्कि शरद पवार के साथ हैं। वहीं एनसीपी नेता व महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरी जिरवल नॉट रिचेबल हो गए हैं। नरहरी पिछले दो वर्षों में यह चौथी बार नॉट रिचेबल हुए है। शाहपुर के विधायक दौलत दरोडा कल अजित पवार के साथ मौजूद थे। लेकिन आज वह शरद पवार के खेमे में आ गए हैं।
          एनसीपी के पास अभी 53 विधायक है। अगर अजित पवार को पार्टी तोड़कर बीजेपी के साथ जाना ही है तो उन्हें कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी जो फ़िलहाल संभव नहीं है। ऐसे में कहा जा सकता है कि अजित पवार न इधर के रहे और न ही उधर के.चाचा -भतीजे की रिश्ते भी ख़त्म हो गए और इतिहास के पन्नो में भी नाम दर्ज करा गए। 

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