Homeदेशबड़े निर्लज हैं शाहनवाज हुसैन !

बड़े निर्लज हैं शाहनवाज हुसैन !

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अखिलेश अखिल
एक महिला के साथ रेप के आरोप का सामना कर रहे बीजेपी के नेता शाहनवाज हुसैन को सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलते ही उनकी साँसे फूलने लगी है। पीड़िता महिला पिछले चार साल से शाहनवाज पर एफआईआर करने की मांग कर रही है लेकिन अपनी पहुँच की वजह से अब तक एफआईआर से बचते रहे ,पिछले साल दिल्ली उच्च न्यायलय ने उन पर एफआईर दर्ज करने का आदेश दिया तो वे सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए। बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उच्च अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए उनपर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि कानून की नजर में सब एक है और आप सच हैं तो जांच में सब पता चल जाएगा।

अब ज़रा हुसैन पर एक नजर। देश के निर्लज नेताओं की बखिया उधेरी जाए तो बिहार में नेतागिरी करने वाले वाले बीजेपी के शाहनवाज हुसैन का नाम सबसे ऊपर दिखता है। 54 साल का यह बीजेपी नेता झूठ ,फरेब और दगाबाज तो है ही,इसके कारनामो को अगर सामने रख दिया जाए बिहार के साथ ही बीजेपी भी शरमा जाए। लेकिन हुसैन को शर्म नहीं आती। शर्म बेचकर ही तो हुसैन आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। हुसैन की करतूतों की कई फाइलें मौजूद हैं। समय आने पर उसका भी खुलासा होगा लेकिन अभी तो उसके डपोरशंखी खेल को ही आपके सामने रखने की जरूरत है। यह व्यक्ति बीजेपी को भी दगा देने से नहीं चुकता और हिन्दू भावना को भी तार -तार करता है। यह मुसलमान होते हुए भी मुस्लिम समाज का हितैषी नहीं। बिहार के मुसलमानो को यह आदमी बेकार और मुर्ख समझता है। इसकी समझ है कि बीजेपी की नीति के अनुरूप जो लोग चले वह ठीक है। अगर बीजेपी के चिन्हों को नहीं माने तो बेकार और दुश्मन। शाहनवाज की भी यही चाहत है। हुसैन की समझ है कि जो मुसलमान बीजेपी के साथ नहीं वह मुसलमान नहीं। लेकिन बिहार के मुसलमान इस हुसैन के के चरित्र को जानते हैं और पहचानते भी हैं। ऐसा नहीं है कि बीजेपी के लोग इसकी चालाकी से अनभिज्ञ हैं। इसके चरित्र और दगाबाजी की कहानी बीजेपी के भीतर भी तैरती है लेकिन चुकी बीजेपी को बिहार में इस मुस्लिम चेहरे से अगर धर्निर्पेक्षता की राजनीति रास आती हो तो क्या कहा जा सकता है।

और राज्यों की तरह बिहार के मुसलमान कटटर नहीं होते। बिहारी मुसलमान सहिष्णु होते हैं और सर्व धर्म समभाव में यकीन करते हैं। अन्य राज्यों की तरह यहां दंगे भी नहीं होते। लेकिन फरेबी राजनीति और हुसैन के मोह जाल में कुछ ऐसे मुसलमान हैं जो उसकी दरबारी करते हैं और जयकारा भी लगाते हैं। एक दूसरा सच ये भी है जो मुसलमान हुसैन के साथ खड़े दीखते हैं वे बीजेपी के साथ खड़े नहीं होते। जाहिर है ये सारा खेल लाभ -हानि पर चलता है।

हुसैन जन्मे तो सुपौल में लेकिन समस्तीपुर से भी उनका वास्ता है। उनका पुस्तैनी घर समस्तीपुर में ही है। इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की डिग्री लिए हुसैन दिल्ली पहुंचे तो दगाबाजी और छल प्रपंच की जितनी करतबे हो सकती है ,सबको अपनाया। रेनू शर्मा से विवाह किया और उसे रेनू हुसैन बनाया। पहले हुसैन खुद हिन्दू बनने वाला था। हिन्दू रीति रिवाज से शादी करने के बाद फिर इस्लामिक धर्म से शादी किया। कहा था कि वह हिन्दू बनेगा लेकिन अपनी पत्नी को ही मुसलमान बनाया। लेकिन यह सब तो मामूली बात है। बीजेपी को हुसैन की यह अदा खूब भाती है।

राजनीति में आने के लिए हुसैन ने क्या -क्या नहीं किया। मुसलमान होने और सुन्दर सलोने चेहरे की वजह से इस हुसैन ने बीजेपी के कई नेताओं को तब प्रभावित किया था। बीजेपी को प्रभावित करने के लिए यह हिन्दू युवाओं को टोपी पहनाकर कांग्रेस के खिलाफ नारे बाजी करवाता था। बीजेपी को बड़ा आनंद आता था। लेकिन जब एक दिन एक पत्रकार ने हुसैन के इस खेल का बखिया उधेरा तो उसकी कलई खुल गई। पत्रकार महोदय के सामने गिडगिराने लगा।

यहाँ हुसैन से जुड़े दो प्रसंगो पर चर्चा होगी। पहला प्रसंग तो यह है कि बिहार में बीजेपी के नेता बिहार के एक मुस्लिम मंत्री के गया विष्णु पाद मंदिर में प्रवेश करने को लेकर है हाय तौबा मचाये हुए है। बीजेपी के कटटर नेताओं का कहना है कि कोई मुस्लिम चेहरा मंदिर में प्रवेश कैसे कर सकता है। उसने मंदिर की गरिमा को भंग किया है। इस मंदिर में गैर हिन्दुओं के प्रवेश पर रोक लगी है फिर भी कोई मुस्लिम नेता मंदिर में कैसे प्रवेश कर गया ? इस मामले में नीतीश कुमार को भी घेरा जा रहा है और हिन्दू विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं।

दरअसल बिहार सरकार के मंत्री रहे इजरायल मंसूरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ गया के दौरे पर थे। उनके साथ राज्य सरकार के कई मंत्री भी थे। नीतीश कैबिनेट के सूचना व प्रावैधिकी मंत्री मो. इजराइल मंसूरी भी थे। गया के विष्णुपद मंदिर में सीएम जब अंदर गए तो उनके साथ मंसूरी भी प्रवेश कर गए। इसके बाद भाजपा ने इस पर सवाल उठाया और कहा जिस मंदिर में मुस्लिम का प्रवेश निषेध है, वहां मुख्यमंत्री मंसूरी को लेकर क्यों गए। यह हिन्दू धर्म का अपमान है। सीएम नीतीश कुमार के लिए यह कोई विषय तो है नहीं। बीजेपी के खेल को वह जानते हैं। बीजेपी को नीतीश के अगले अगले कदम से भय है। बीजेपी जानती है कि नीतीश जब धर्म से लेकर उसके खेल पर प्रहार करेंगे तो बीजेपी को जबाव देना मुश्किल हो जाएगा। कारण है बिहार का धर्मनिरपेक्ष समाज।

अब इसी मामले में कांग्रेस ने बीजेपी की नौटंकी पर पलटवार किया था। कांग्रेस ने एक पुरानी तस्वीर को साझा किया जिसमे बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन मंदिर के भीतर यज्ञ वेदी के साथ बैठकर आशीर्वाद ले रहे हैं। कांग्रेस ने बीजेपी से पूछा है कि विष्णु पाद मंदिर के भीतर यज्ञ वेदी के बगल में बैठे हुसैन के बारे में बीजेपी क्या राय रखती है। क्या इस पर बीजेपी कोई सफाई देगी ?

कांग्रेस ने यह तस्वीर जारी की। इस तस्वीर में शाहनवाज एक मंदिर के अंदर यज्ञ वेदी के निकट बैठे हैं और पुजारी उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी यह तस्वीर जारी कर कहा कि भाजपा हिन्दू विरोधी है। उन्होंने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा, मंसूरी को लेकर छाती पीटने वाले भाजपा नेता यह बताएं कि पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन मंदिर में क्या कर रहे हैं? उन्होंने भाजपा नेताओं से पूछा है कि वे बताएं कि शाहनवाज को लेकर मंदिर क्यों गए?

अब सवाल है कि बीजेपी को यह सब क्यों नहीं दिख रहा। सवाल ये भी है कि क्या हुसैन हिन्दू बनकर विष्णुपाद मंदिर में गए थे या फिर बीजेपी के नेता होने की वजह से गए थे। हिन्दू बनकर अगर हुसैन मंदिर में गए थे तो अगला सवाल है कि क्या उन्होंने धर्मान्तरण किया है ? और किया है तो अपना नाम फिर शाहनवाज हुसैन क्यों रखा है ? और अगर बीजेपी के नेता के तौर पर मंदिर में गए थे तो बीजेपी नेताओं को यह बताना होगा कि मंदिर की गरिमा को अगर मंसूरी ने भ्रष्ट किया है तो यही काम हुसैन ने भी किया है। क्या हुसैन को बीजेपी वाले दंडित करेंगे या फिर पार्टी से निकालेंगे ? संभव नहीं। उधर बिहार के मुसलमान शाहनवाज पर पहले से ही खफा हैं।

अब दूसरा प्रसंग। यह प्रसंग हालिया घटना पर आधारित है। चार साल पहले हुसैन और उसके बलात्कार के आरोपी भाई पर बिहार की एक महिला कोर्ट कचहरी दौर रही है। लेकिन चार साल से हुसैन के ऊपर मुकदमा दर्ज नहीं हो रहा है। पहले जिला अदालत ने महिला को दौड़ाया। थाना पुलिस की चक्कर लगाईं लेकिन हुसैन के दबदबे की वजह से महिला की शिकायत दर्ज नहीं हो सकी। पीड़िता महिला फिर उच्च न्यायलय पहुंची तो अदालत ने मामला को गंभीर देखते हुए पुलिस को फटकार लगाईं और अविलम्ब एफआईआर दर्ज करने का आदेश आदेश दिया। जैसे ही हाईकोर्ट का आदेश सामने आया ,हुसैन और उसके गुर्गे किसी भी सूरत में एफआईआर से बचने की जुगत में लग गए। सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल एफआईआर पर रोक लगा दी। सितम्बर में अब इस मसले पर सुनवाई होनी है। कह सकते हैं कि हुसैन ने अपनी राजनीति और सरकार के प्रभाव में पीड़िता महिला को अभी तक पीड़ित ही कर रहे हैं।

हुसैन के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि बलात्कार का आरोप फर्जी है। यह सब एक बड़े नेता को फ़साने के लिए किया गया है। ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। अगर वकील साहब के तर्क को ही सही माना जाए तो देश में जितने सांसदों ,विधायकों ,मंत्रियों पर मुक़दमे चल रहे हैं, क्या वे फर्जी हैं ? और फर्जी हैं भी तो इल्जाम लगने पर मुकदमा दर्ज तो हुए हैं। क्या वकील साहब कह सकते हैं कि कोई भी नेता बलात्कारी नहीं हो सकता। झूठ और ठगी नहीं कर सकता और हत्या ,डकैती नहीं कर सकता। तब तो देश में बलात्कार और हत्या के मामले में जितने भी नेता या आम नागरिक मुकदमा का सामना कर रहे हैं है वे सब गलत है। कानून और संविधान पर सवाल खड़ा करता है।
इससे जुड़ा एक और सवाल। क्या किसी आम आदमी पर यही इल्जाम लगता तो वकील साहब की यही दलील होती ? क्या आम आदमी पर लगे आरोप पर एफआईआर दर्ज नहीं होते ? क्या गुजरात दंगे के दौरान लोगों की मौत नहीं हुई ? जितनी जाने गई थी, सब फर्जी थे। बीजेपी के नेता भी गुजरात दंगे में फंसे थे। यहाँ तक कि तब के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री भी। ये बात अलग है कि बाद की जांच में दंगे के आरोपी सभी नेता रिहा हो गए लेकिन मुकदमा चला और आरोपी तो कहलाये। लगता है हुसैन को यह सब नहीं दिखता। यह तो वह बच्चा है या फिर बड़ा शातिर।

यह भी समझ से परे है कि कानून की पढ़ाई करने वाले सभी जज और वकील तर्कों के आधार पर किसी मुकदमो को देखते हैं और साक्ष्यों के आधार पर फैसला होता है। लेकिन जब एफआईआर ही नहीं है तब तो देश में कोई भी बड़ा आदमी कुछ भी कर जाएगा और बड़ा होने के नाम पर उसे कोई दंड नहीं मिलेगा। जानकार कहते हैं कि अदालत में भी फैसले जजों के अनुरूप होते हैं। जो जज किसी नेता के पक्ष में खड़े होते हैं ,फैसला उसके अनुरूप ही होता है। हाई कोर्ट ने जिला कोर्ट के खेल को समझ कर पीड़िता महिला के पक्ष में यही तो कहा था कि सबसे पहले एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। आरोप गलत है या सही इसकी जांच तो अदालत पुलिस की जांच रिपोर्ट पर ही करेगी। लेकिन अभी ऐसा नहीं हुआ।
अगर किसी पार्टी के नेता के साथ यही घटना घटती तो क्या बीजेपी के लोग हंगामा नहीं मचाते ! क्या अन्य पार्टी के नेताओं पर यही आरोप लगता तो एफआईआर दर्ज नहीं होता और क्या हुसैन इस पर कुछ बोलने से बाज आते। हुसैन के इतिहास को देखें तो उसने कई नेताओं को घेरने का काम किया है। बिहार के उन तमाम नेताओं को कटघरे में खड़ा करने में हुसैन कभी नहीं चुके जिनपर कोई आरोप लगे हैं। हुसैन के सियारी रंग को बहुत से लोग समझ नहीं पाते। बीजेपी भी अभी हुसैन को समझ नहीं पायी है।

और एक बड़ा सवाल। हुसैन की आमदनी का श्रोत क्या है ? वह अदालत में महंगे वकील खड़ा करने के लिए भारी फीस का इंतजाम कहाँ से करता है इसकी जांच सबसे ज्यादा जरुरी है। बिहार के लोग हुसैन को अरबपति मानते हैं। अभी बिहार में उद्योग मंत्री रहते हुए भी हुसैन ने भारी पैसे कमाने के आरोप झेले हैं। बीजेपी एक बार हुसैन की जांच विपक्षी नेताओं की तरह ही करा दे तो जो तस्वीर सामने आएगी ,चौंकाने वाली होगी। क्या बीजेपी ऐसा कर पायेगी ? पाक साफ़ कहलाने वाली बीजेपी की असली सच्चाई तभी सामने आएगी जब अपनी पार्टी के तमाम नेताओं के यहां ईडी और इनकम टैक्स विभाग से उसकी जांच कराएगी। लेकिन इतना सहस बीजेपी को कहाँ है।

हुसैन सच्चे हैं इसकी पुष्टि तो अब जांच के बाद ही पता चलेगा। अब उन पर एफआईर दर्ज होगा और फिर पुलिसिया करवाई। कौन सच्चा है और कौन झूठा इसकी कलई तो बाद में खुलेगी।

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