Homeदेशसाहित्य अकादेमी आयोजित करेगी विश्व का सबसे बड़ा ‘साहित्योत्सव’

साहित्य अकादेमी आयोजित करेगी विश्व का सबसे बड़ा ‘साहित्योत्सव’

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न्यूज़ डेस्क 
 राष्ट्रीय साहित्य संस्था साहित्य अकादेमी स्थापना के 70 वर्ष पूरे हाेने पर अपना वार्षिक ‘साहित्योत्सव’ इस बार विश्व के सबसे बड़े साहित्य महोत्सव रूप में आयोजित करेगी जिसमें 175 से अधिक भाषाओं के 1100 से अधिक लेखक और कवि भाग लेंगे।

साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने  एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस वर्ष साहित्योत्सव 11 मार्च से 16 मार्च तक रवींद्र भवन परिसर में मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महोत्सव में 190 से अधिक सत्रों में 1100 से अधिक प्रसिद्ध लेखक और विद्वान भाग ले रहे हैं। इसमें देश की 175 से अधिक भाषाओं का भी प्रतिनिधित्व होगा।

उन्होंने बताया कि इस साहित्योत्सव में तीन राज्यों केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री सी.वी. आनंद बोस विशेष रूप से भाग ले रहे हैं। इस पुरस्कार-अर्पण समारोह की मुख्य अतिथि प्रख्यात ओड़िया लेखिका प्रतिभा राय होंगी। प्रतिष्ठित संवत्सर व्याख्यान प्रख्यात उर्दू लेखक एवं गीतकार गुलज़ार देंगे। साहित्योत्सव में ‘साहित्य एवं कूटनीति’ पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन भी होगा।
 श्रीनिवासराव ने बताया कि साहित्योत्सव की शुरुआत अकादेमी की वर्षभर की प्रमुख गतिविधियों की प्रदर्शनी से होगा।

साहित्योत्सव का मुख्य आकर्षण साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2023 अर्पण समारोह होगा। साहित्य अकादेमी के महत्तर सदस्यों का अभिनंदन भी किया जाएगा। इनके अलावा बहुभाषी कवि और कहानी-पाठ, युवा साहिती, अस्मिता, पूर्वोत्तरी, जैसे नियमित कार्यक्रमों के अलावा भक्ति साहित्य, बाल साहित्य, भारत की अवधारणा, मातृभाषाओं का महत्व, आदिवासी कवि एवं लेखक सम्मिलन, भविष्य के उपन्यास, भारत में नाट्य लेखन, भारत की सांस्कृतिक विरासत, भारतीयों भाषाओं में विज्ञान कथा साहित्य, नैतिकता और साहित्य, भारतीय साहित्य में आत्मकथाएँ, साहित्य और सामाजिक आंदोलन, विदेशों में भारतीय साहित्य जैसे अनेक विषयों पर परिचर्चा और परिसंवाद होंगे।उन्होंने कहा कि  इस बार की राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय ‘स्वातंत्र्योत्तर भारतीय साहित्य’ है।

इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय दिव्यांग लेखक सम्मेलन, एलजीबीटीक्यू लेखक सम्मिलन, मीर तक़ी मीर की जन्म-त्रिशतवार्षिकी पर संगोष्ठी, गोपीचंद नारंग पर एक परिसंवाद जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिताएं, साहित्यिक प्रश्नोत्तरी और कई अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें दिल्ली एवं आस पास के 1000 से अधिक बच्चों के भाग लेने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि अन्य कार्यक्रमों में राजश्री वारियर के भरतनाट्यम, गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर को श्रद्धांजलि देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम ‘कस्तूरी’, महेशाराम का संतवाणी गायन एवं दयाप्रकाश सिन्हा के नाटक ‘सम्राट अशोक’ का मंचन भी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि छह दिन तक चलने वाले इस साहित्योत्सव में हिंदी एवं विभिन्न भारतीय भाषाओं के कुछ महत्वपूर्ण लेखक एवं विद्वान भाग ले रहे हैं। इनमें एस.एल. भैरप्पा, चंद्रशेखर कंबार, पॉल ज़कारिया, आबिद सुरती, के. सच्चिदानंदन, चित्रा मुद्गल, मृदुला गर्ग, के. इनोक, ममंग दई, एच.एस. शिवप्रकाश, सचिन केतकर, नमिता गोखले, कुल सैकिया, वाई.डी. थोंगची, मालाश्री लाल, कपिल कपूर, अरुंधति सुब्रह्मण्यम, रख़्शंदा जलील, राणा नायर, वर्षा दास, सुधा शेषाय्यन, उदय नारायण सिंह, अरुण खोपकर, शीन काफ़ निज़ाम आदि शामिल हैं। इनके अलावा भारतीय भाषाओं के विदेशी विद्वान भी महोत्सव में भाग लेंगे। इनमें देशों के राजदूत भी शामिल हैं।

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