बीरेंद्र कुमार झा
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है।सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया है। माना जाता है कि गुढ़ा पायलट कैंप से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस तरह से गुढ़ा को मंत्री पद से हटाकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। गुढ़ा के बहाने बयानवीरों को सख्त मैसेज दिया गया है,जबकि सचिन पायलट को भी इशारों इशारों में चेता दिया गया है। सियासी जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुढ़ा को मंत्री पद से हटाकर मैसेज दिया है कि पायलट के तेवर अब बर्दाश्त नहीं होंगे।गौरतलब है कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा 21 नवंबर 2021 को मंत्रिमंडल पुनर्गठन के दौरान राज्यमंत्री बनाए गए थे,लेकिन मनचाहा विभाग नहीं मिलने से वे नाराज चल रहे थे।गहलोत सरकार के सियासी संकट के दौरान सरकार के पक्ष में खड़े रहे,लेकिन बाद में पाला बदल सचिन पायलट कैंप में शामिल हो गए।इसके बाद वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और शांति धारीवाल और महेश जोशी पर जमकर हमला बोलते रहे हैं।
हाईकमान से हरी झंडी के बाद बर्खास्तगी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजेंद्र गुढ़ा को कांग्रेस हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बाद बर्खास्त करने का फैसला लिया ताकि सचिन खेमा को इसपर बयानबाजी का मौका नहीं मिले।कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गुढ़ा के विधानसभा में दिए गए बयान के आधार पर रिपोर्ट दिल्ली भेजी थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हाईकमान से बात की और इसके बाद वहां से हरी झंडी मिलने के बाद गुढ़ा को बर्खास्त करने की फाइल राजभवन भिजवाई गई। यह दूसरा मौका है जब अशोक गहलोत सचिन पायलट गुट पर इस काफी आक्रामक हुए हैं।पहली बार 2020 में तो उन्होंने सचिन पायलट को ही उपमुख्यमंत्री के पद से बर्खास्त किया था।इसके अलावा पायलट गुट केजाने वाले दो मंत्रियों विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा के इस्तीफे ले लिए गए थे। दरअसल मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने विधानसभा में कानून और व्यवस्था के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को निशाने पर ले लिया था।उन्होंने ने कहा था कि हमें मणिपुर की बजाय अपने गिरेबान में झांकना चाहिए, हम महिलाओं को सुरक्षा देने में विफल रहे हैं।
सचिन पायलट ने साधी चुप्पी
सचिन पायलट कैंप ने फिलहाल राजेंद्र सिंह गुढ़ा के मंत्री पद से हटाए जाने के मामले में फिलहाल चुप्पी साध ली है ।सचिन पायलट ही नहीं, बल्कि पायलट कैंप के किसी नेता का भी इस मामले में कोई बयान नहीं आया है। 2020 में सचिन पायलट की बगावत के समय बूढ़ा समेत बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायकों ने शुरु में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का साथ दिया था, लेकिन बाद में वे पाला बदलकर पायलट कैंप में शामिल हो गए थे। गुढ़ा ने सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस आलाकमान को भी निशाने पर ले लिया था।लेकिन हाल में हुए गहलोत और पायलट सुलह के कारण गुढ़ा के मंत्री पद से हटाए जाने के वावजूद पायलट खेमा चुप्पी साधे हुए है।पायलट के करीबी माने जाने वाले चाकसू विधायक के सुर भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रति बदले हुए हैं ,जबकि गुढ़ा ने विधानसभा में बयान देकर अपनी सरकार की स्थिति को ही असहज कर दिया था।
अपने बयानों को लेकर शुरू से चर्चित रहे हैं राजेंद्र गुढ़ा
राजेंद्र गुढ़ा शुरू से ही अपने बयानों को लेकर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। गुढ़ा बीएसपी के टिकट पर उदयपुरवाटी से विधायक बनकर मंत्री बने हैं।पायलट की बगावत के समय गहलोत सरकार को गिरने से बचाने में गुढ़ा ने अहम भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसके बदले गुढ़ा को अपनी सरकार में मंत्री बना दिया।हालांकि तब उन्होंने सरकारी गाड़ी लेने से इनकार करते हुए अपनी नाराजगी जता दी थी।दराशल गुढ़ा अपने से जूनियर रहे कैबिनेट मंत्री रमेश मीणा के अधीन रहकर काम करने को अपनी तौहीनी मानते थे।हालांकि बाद में गुढ़ा मान गए थे और उन्होंने मंत्रीपद स्वीकार कर लिया था। गुढ़ा ने अपने क्षेत्र में हेमा मालिनी को लेकर भी टिप्पणी की थी।यहां तक कि गुढ़ा ने सीएम गहलोत पर भी उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगा दिया था। लेकिन लगता है कि इस बार हाल में हुए पायलट- गहलोत समझौते के बाद गुढ़ा को पायलट कैंप का साथ नहीं मिलेगा और पायलट केंप गुढ़ा से दूरी भी बना सकता है।

