अधिकतर लोग मानते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर की पहचान सिर्फ ब्रेस्ट में गांठ बनने से होती है, लेकिन कई हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कई मामलों में इसके शुरुआती संकेत स्किन पर भी दिखाई दे सकते हैं।हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 10 प्रतिशत मरीजों में ब्रेस्ट कैंसर का पता सबसे पहले स्किन में आए बदलावों से चला।
डॉक्टर्स का कहना है कि अगर ब्रेस्ट की स्किन में अचानक बदलाव दिखाई दें और वे लंबे समय तक बने रहें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।ऐसे लक्षणों में त्वचा का लाल या गहरा पड़ना, लगातार रहने वाले दाने या रैशेज, सूजन, गर्माहट महसूस होना, संतरे के छिलके जैसी गड्ढेदार त्वचा और निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना शामिल हो सकता है।एक्सपर्ट का कहना है कि ये बदलाव हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन अगर समस्या ठीक नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक इंफ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर (IBC) एक दुर्लभ लेकिन तेजी से फैलने वाला ब्रेस्ट कैंसर है।ये कुल ब्रेस्ट कैंसर मामलों का लगभग 1 प्रतिशत से 5 प्रतिशत हिस्सा होता है। अच्छी बात यह है कि इसमें हमेशा गांठ नहीं बनती, इसलिए कई बार ये मैमोग्राम में भी आसानी से नहीं दिखता। कई मरीज शुरुआत में स्किन में लालिमा, सूजन या एक्जिमा जैसे लक्षण लेकर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में सही जांच करना बेहद जरूरी होता है।
ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडिएशन और अन्य थेरेपी भी स्किन, बालों और नाखूनों को प्रभावित कर सकती हैं। रेडिएशन के कारण स्किन में जलन, खुजली, लालपन, सूजन और रंग बदलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।कुछ गंभीर मामलों में स्किन छिल भी सकती है।
वहीं, कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ना मरीजों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक माना जाता है।हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कई लोगों के लिए बाल सिर्फ सुंदरता नहीं बल्कि उनकी पहचान का हिस्सा होते हैं।
अगर ब्रेस्ट की स्किन में नया रैश, लालिमा, सूजन, निप्पल में बदलाव या कोई ऐसी समस्या दिखाई दे जो कुछ दिनों में ठीक न हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर हमेशा गांठ के रूप में सामने नहीं आता, इसलिए त्वचा में दिखने वाले संकेतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

