बीरेंद्र कुमार झा
झारखंड में सियासी समीकरण पल पल बदलता रहता है। कुछ दिन पूर्व तक हमेशा एक दूसरे के प्रतिद्वंदी रहने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच समझौता हो गया। गहलोत और पायलट के बीच सुलह होने से कॉन्ग्रेस को चाहे जो नफा नुकसान हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कि मुश्किलें इससे बढ़ती नजर आ रही है। दरसाल भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान चुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कोई भूमिका तय नहीं की है।माना जा रहा है की पार्टी इसबार यहां संयुक्त रूप से नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने का मन बना रही है। ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के संग हुई मीटिंग के बाद वसुंधरा राजे की अचानक दिल्ली दौरे ने सियासी अटकलों को हवा दे दी है। गौरतलब है कि 12 जुलाई को बीएल संतोष ने राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में बीजेपी नेताओं के साथ एक मीटिंग की थी। इस मीटिंग में वसुंधरा राजे भी मौजूद थी ।बीएल संतोष के साथ हुई मीटिंग के बाद वसुंधरा राजे का अचानक दिल्ली दौरा बन गया वसुंधरा राजे दिल्ली में जेपी नड्डा से मिली। प्राप्त जानकारी के अनुसार वसुंधरा राजे ने नड्डा से राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका स्पष्ट करने का आग्रह किया है। बीएल संतोष की मीटिंग के बाद बीजेपी का सियासी समीकरण बदल गया है हालांकि पार्टी के नेता इसपर खुलकर कुछ बोल नहीं रहे हैं।
चुनाव में वसुंधरा राजे की भूमिका तय नहीं
चुनाव नजदीक आने की वजह से राजस्थान का सियासी तापमान काफी गर्म है। कांग्रेस में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच सियासी वर्चस्व की जंग कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गई थी, लेकिन अब उन दोनों के बीच सुलह हो जाने से बीजेपी के नेता वसुंधरा राजे की मुश्किलें बढ़ गई है।सचिन पायलट के निशाने पर वसुंधरा राजे हैं और वे उसके कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे हैं। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर असमंजस की स्थिति में है। हालांकि राजस्थान दौरे पर आए बीएल संतोष ने साफ कर दिया है कि इस बार बीजेपी राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव चुनाव लड़ेगी। इससे यह साफ हो जाता है कि इस बार राजस्थान में बीजेपी की तरफ से वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं रहेंगी।
राजस्थान में दावेदारी छोड़ने के पक्ष में नहीं है वसुंधरा
गौरतलब है कि वसुंधरा राजे सिंधिया वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है, लेकिन वे राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। वसुंधरा गुट की तरफ से लगातार आलाकमान पर दबाव बनाया जा रहा है कि पार्टी उन्हें अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर चुनाव में उतारे, लेकिन राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बीजेपी के अंदर की गुटबाजी पर विराम लगाने के लिए आलाकमान ने काफी पहले ही सैद्धांतिक तौर पर यह फैसला ले लिया है कि पार्टी राजस्थान में किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव में नहीं उतरेगी।
वसुंधरा राजे को मिल सकती है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
वसुंधरा राजे गुट की तरफ से लगातार आलाकमान पर उन्हें राजस्थान चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के दबाव के बावजूद अभी तक भारतीय जनता पार्टी ने वसुंधरा राजे की राजस्थान चुनाव में कोई भूमिका तय नहीं की है,लेकिन यह माना जाता है कि कांग्रेस को हराने के लिए चुनाव से पहले बीजेपी आलाकमान वसुंधरा राजे को कोई बड़ी भूमिका दे सकता है। इस बात की चर्चा है कि गहलोत सरकार को हराने के लिए बीजेपी यह निर्णय कर चुकी है कि प्रदेश का विधान सभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा।लेकिन इसके साथ ही बीजेपी शीर्ष नेतृत्व की तरफ से यह भी संदेश दिया जाता रहा है कि वसुंधरा राजे सिंधिया के राजनीतिक और अनुभवों को देखते हुए पार्टी उन्हें विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कोई बड़ी भूमिका दे सकती है। राज्य इकाई में लगातार बदलते समीकरणों और गुटबाजी की वजह से बीजेपी अपने आपको कई प्रकार के निर्णय लेने में असहज महसूस कर रही हे।पार्टी आलाकमान लगातार कोशिश कर रहा है कि प्रदेश बीजेपी में व्याप्त गुटबाजी समाप्त हो जाए और वसुंधरा राजे सिंधिया समेत पार्टी के सभी नेता मिलकर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाएं। संगठन मंत्री बी एल संतोष ने इन नेताओं को साफ-साफ कहा है की नेतागण गुटबाजी से दूर रहें और बयानबाजी करने से बचें।
