बिहार में बिहार में सर्वेक्षण के नाम पर जनगणना का प्रयास हाईकोर्ट ने समझाया दोनों में अंतर, तेजस्वी की प्रतिक्रिया

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  • बीरेंद्र कुमार झा

बिहार सरकार के द्वारा कराई जा रही जाति गणना पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए इसे तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है।गुरुवार को हाई कोर्ट की पीठ ने दोपहर बाद अपना अंतिम फैसला सुनाया था, जिसके बाद अब सामान्य प्रशासन की ओर से सभी डीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलों में जातीय गणना के सेकंड फेज का काम तत्काल रोक दें। वहीं इसे लेकर अब बिहार में सियासी घमासान भी छिड़ गया है। तेजस्वी यादव ने इसे जनगणना नहीं बल्कि सर्वे बताया जिसपर अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी कर कहा कि इस सर्वे के नाम पर जनगणना का प्रयास है।

तेजस्वी की प्रतिक्रिया

हाईकोर्ट में जब जातीय गणना पर तत्काल रोक लगाई तो बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए साफ कर दिया कि आज नहीं तो कल जातिगत गणना होकर रहेगी। सभी राज्यों में इसकी जरूरत है। महागठबंधन की सरकार जातिगत गणना कराने के लिए प्रतिबद्ध है किसी एक जाति के लिए नहीं, बल्कि सभी के विकास के लिए जातीय गणना कराने का फैसला लिया गया था। था।

यह जाति गणना नहीं बल्कि इस सर्वे है

बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा।राज्य के विकास के लिए जातिगत स्थिति जानना जरूरी है। यह कोई जातिगत गणना नहीं था, बल्कि सर्वे था। यह सरकार का न तो अंतिम और न ही पहला सर्वे है।

सर्वेक्षण के नाम पर जनगणना का प्रयास

वहीं बिहार में जातीय गणना पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जनगणना और सर्वेक्षण के बीच मूलभूत अंतर यह है कि जनगणना सटीक तथ्यों और सत्यापन योगी विवरणों के संग्रह पर विचार करता है जबकि सर्वेक्षण का उद्देश्य आम जनता की राय और धारणाओं का संग्रह और उनका विश्लेषण करना है। एकत्र किए गए आंकड़ों के विश्लेषण में जो परिणाम प्राप्त करने की चेष्टा की जा रही है व जनगणना के मामले में किए जाते हैं।सर्वेक्षण में ज्यादातर तार्किक निष्कर्ष होते हैं। राज्य द्वारा वर्तमान कवायद को केवल सर्वेक्षण के नाम पर जनगणना करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है जा सकता है।

 

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