Bihar News: बिहार में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए सरकार अब फलोत्पादन पर खास जोर दे रही है। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि अमरूद की खेती राज्य के किसानों के लिए आय और रोजगार बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।
उन्होंने बताया कि बिहार की जलवायु अमरूद उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है और यह फसल पोषण सुरक्षा के साथ-साथ कृषि विविधीकरण को भी मजबूती देती है।
कम लागत में अधिक लाभ, हर तरह की मिट्टी में संभव
कृषि मंत्री ने कहा कि अमरूद एक कम लागत वाली बागवानी फसल है, जिसे हल्की बलुई से लेकर भारी दोमट मिट्टी तक आसानी से उगाया जा सकता है। यह फसल सूखा सहन करने में भी सक्षम है और सीमांत भूमि पर भी अच्छी पैदावार देती है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक व्यावहारिक विकल्प बनती जा रही है।
सालभर मांग, किसानों को मिलेगी स्थिर आय
अमरूद की सबसे बड़ी खासियत इसकी सालभर बनी रहने वाली मांग है। इससे किसानों को नियमित और स्थिर आय प्राप्त होती है। इसके अलावा अमरूद से जैम, जेली, जूस और स्क्वैश जैसे कई उत्पाद बनाए जाते हैं, जिससे मूल्य संवर्धन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
सरकार दे रही 40% तक अनुदान
मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत अमरूद की बागवानी के लिए किसानों को अनुदान दिया जा रहा है।
एक हेक्टेयर में बागवानी की लागत लगभग 1 से 1.2 लाख रुपये तय की गई है, जिस पर सरकार द्वारा करीब 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। इससे किसानों को शुरुआती निवेश में काफी राहत मिलती है।
कृषि विविधीकरण से कम होगा जोखिम
कृषि मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ फलोत्पादन को बढ़ावा देने से किसानों की आय में स्थिरता आएगी और जोखिम कम होगा। उन्होंने कहा कि अमरूद जैसी फसलें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भी किसानों को बचाने में मददगार साबित होंगी।
‘आत्मनिर्भर किसान, समृद्ध बिहार’ की दिशा में पहल
मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि अमरूद जैसी कम लागत और अधिक लाभ देने वाली फसलें राज्य के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों की आय बढ़े, रोजगार के अवसर पैदा हों और बिहार कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को हासिल करे।

