अखिलेश अखिल
पिछले सप्ताह भर से देश के भीतर जो घटनाएं घटित हो रही है क्या उसकी कल्पना कभी गई थी ? संसद लगातार ठप रही और पिछले दो दिनों में संसद एक्टिव हो गई। सत्ता पक्ष राहुल के भाषण पर माफ़ी मांग करता रहा और विपक्ष अडानी मसले पर जेपीसी की मांग पर अड़ा रहा। लेकिन मोदी सरकार संसद से बाहर एक अलग खेल की तैयारी करती रही। खेल सफल हुआ। सूरत की अदालत ने 23 मार्च को सरनेम केस में राहुल को दोषी पाया। दो साल की सजा सुनाई और अगले दिन जान प्रतिनिधि कानून का हुए लोक सभा सचिवालय ने राहुल की सांसदी रद्द कर दिया। जो संसद लम्बे समय से ठप चल रही थी ,अचानक इतनी गतिशील हो गई जिसकी कल्पना नहीं जा सकती। राजनीति का यह नर्तन इतिहास में दर्ज हो गया। बीजेपी शांत हो गई। उसके अरमान पुरे हो गए। खेल की समाप्ति राहुल को दण्डित करने के साथ समाप्त हो गई। अब आगे जो होगा उसे देश की जनता देखेगी।
अंतिम खेल यही हुआ कि राहुल गाँधी ने अपनी राजनीतिक कुर्बानी दी। भविष्य को अंधकार में समेटा। लेकिन जाते -जाते विपक्ष को एक साथ खड़ा कर गए। कल तक जहाँ सभी विपक्षी प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी को लेकर आपस में लड़ भीड़ रहे थे ,सबकी आँखे खुल गई। सबने खुद को टटोला। मंथन और चिन्तन किया कि अगर हम एक नहीं हुए तो सब जेल जायेंगे। मौजूदा सरकार किसी भी सूरत में सत्ता में काबिज चाहती है। रह में जो रोड़ा बनेगा उसे दण्डित किया जाएगा ,जेल भेजा जाएगा। ऐसे में सब मिलकर ही इस लोकतंत्र को बचा सकता है ,बीजेपी को चुनौती दे सकता है।
बीजेपी के अरमान तो पुरे हो गए। उसकी मंशा गांधी परिवार को दण्डित करने की थी। उस खेल में बीजेपी की जीत हुई। झूठ की राजनीति सफल रही। झूठ औ रफरेब की राजनीति सच हुई। झूठ के सामने सत्य दंडवत हुआ लेकिन सत्य कभी झुकता है क्या ? आखिर सत्य की कलई तो खुलेगी ही। उसे कौन दवा सकता है ?
इधर विपक्ष की रह भी आसान हो गई है। अब राहुल की सांसदी ख़त्म होने के बाद विपक्ष की राह भी आसान हो गई है। ममता हो या फिर केसीआर या फिर केजरीवाल या नीतीश कुमार ही क्यों न हों ,पीएम की उम्मीदवारी दिखाते रहें लेकिन कांग्रेस की राह तो अब जुदा ही होगी। कांग्रेस की लड़ाई बड़ी होगी। उसे कई मुद्दों पर लड़ना है। पहले तो राहुल को इन्साफ दिलाने की बात है और फिर बीजेपी से लड़ने की। इस खेल में अगर विपक्ष का साथ मिलता है तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ेगी और साथ नहीं मिलता है एक सच यही है कि कांग्रेस के सभी सांसद संसद से इस्तीफा देकर सड़को पर उतरेंगे। और ऐसा हुआ तो यह भी बड़ा खेल होगा।
लेकिन इस पुरे नर्तन में प्रियंका गाँधी के तेवर भी बहुत कुछ बता रहे हैं। प्रियंका गांधी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि शहीद प्रधानमंत्री के बेटे राहुल गांधी को ‘मीर जाफर’ कहा जाता था और उनके परिवार का अपमान किया जाता था लेकिन वह झुकेंगे नहीं क्योंकि वह एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसके सदस्यों ने लोकतंत्र को उसके खून से सींचा है। उन्होंने कहा कि अडानी मुद्दे पर सरकार बौखला गई है।
ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, प्रियंका गांधी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर चौतरफा हमला किया, एक ट्वीट में कहा, “नरेंद्र मोदी जी, आपके चमचों ने शहीद प्रधान मंत्री के बेटे को देशद्रोही कहा, मीर जाफर। आपके मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी के पिता कौन हैं? कश्मीरी पंडितों के रीति-रिवाज का पालन करते हुए, एक बेटा अपने पिता की मृत्यु के बाद ‘पगड़ी’ पहनता है, अपने परिवार की परंपरा को बनाए रखता है।”
उन्होंने कहा, “पूरे परिवार और कश्मीरी पंडित समुदाय का अपमान करते हुए, आपने संसद में पूछा कि हम नेहरू का नाम क्यों नहीं रखते। लेकिन किसी जज ने आपको दो साल की सजा नहीं दी। आपको संसद से अयोग्य नहीं ठहराया।”
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि गांधी एक “सच्चे देशभक्त” हैं और उन्होंने अडानी समूह की लूट पर सवाल उठाया, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर सवाल उठाए। क्या आपका दोस्त गौतम अडानी देश की संसद और भारत की महान जनता से बड़ा हो गया है कि उसकी लूट पर सवाल उठने पर आप बौखला गए थे? उन्होंने कहा कि इस परिवार ने भारत के लोगों की आवाज उठाई और पीढ़ियों तक सच्चाई के लिए संघर्ष किया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारी रगों में दौड़ रहे खून की एक विशेषता है… यह आप जैसे कायर, सत्ता के भूखे तानाशाह के सामने कभी नहीं झुकता और कभी नहीं झुकेगा। आप जो चाहें करें।”
प्रियंका के ये बोल कई राजनीतिक सन्देश दे रहे हैं। उसके कई मायने हैं। भले ही बीजेपी अभी के खेल पर ठहाका लग रही हो लेकिन आगे की राजनीति कठिन होगी। सच तो यही है भीतर से बीजेपी डरी हुई है। बीजेपी डर कांग्रेस और विपक्ष को संजीवनी देगी।

