राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से फिसले मुद्दे!नैरेटिव की जंग में विरोधियों से पिछड़ गई कांग्रेस

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक और विदेश यात्रा ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।कांग्रेस के लिए यह कोई नई बात नहीं है कि राहुल समय-समय पर विदेश जाते रहे हैं, लेकिन इस बार उनकी यात्रा का समय पार्टी के लिए असहज सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष जिन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरना चाहता था, उन्हीं के बीच राहुल की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई है।

राजनीति केवल भाषणों और बयानों तक सीमित नहीं होती।कई बार जनता के बीच सक्रिय मौजूदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी किसी मुद्दे पर मुखर होकर बोलना। ऐसे में राहुल गांधी की विदेश यात्रा एक बार फिर कांग्रेस के लिए राजनीतिक बहस और विपक्षी रणनीति का केंद्र बन गई है। सियासी विश्लेषकों का मानना है कि जिस मुद्दे पर कांग्रेस बढ़त बना सकती थी, वहां उसका अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका।

कांग्रेस ने हाल के पेपर लीक मामलों को युवाओं से जुड़ने का बड़ा अवसर माना था।पार्टी की योजना थी कि राहुल गांधी देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर छात्रों और युवाओं से मुलाकात करेंगे तथा इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे। हालांकि, एक सार्वजनिक संवाद के बाद राहुल इस अभियान में सक्रिय दिखाई नहीं दिए।बताया जा रहा है कि उनकी अनुपस्थिति के कारण पार्टी की कई प्रस्तावित यात्राएं और कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ सके।

एथेनॉल ब्लेंडिंग का मुद्दा भी हाल के दिनों में चर्चा में रहा। कांग्रेस ने शुरुआत में इसे उठाया, लेकिन बाद में पार्टी की सक्रियता कम होती गई।इस बीच कई अन्य राजनीतिक टिप्पणीकारों और सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने इस विषय पर लगातार बहस जारी रखी, जिससे कांग्रेस का अभियान पीछे छूटता नजर आया।

अयोध्या में कथित दान चोरी के मामले को भी कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर माना जा रहा था। माना जा रहा था कि पार्टी इस मुद्दे के जरिए बीजेपी को सीधे घेरने की कोशिश करेगी। कांग्रेस ने देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखने का प्रयास भी किया, लेकिन राहुल गांधी की गैरमौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी रही। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अधिक सक्रिय दिखाई दिए, जबकि कांग्रेस अपेक्षित राजनीतिक बढ़त हासिल करती नजर नहीं आई।

भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष के नेता को महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान जनता के बीच मौजूद रहना चाहिए। पार्टी पहले भी राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाती रही है। पूर्व में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी संसद में यह टिप्पणी कर चुके हैं कि उच्च सुरक्षा श्रेणी वाले किसी नेता का बिना सार्वजनिक जानकारी के लंबे समय तक गायब रहना उचित नहीं माना जा सकता।

रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर कई अहम राजनीतिक फैसले राहुल गांधी की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब से जुड़े संगठनात्मक मसले, संसद के मानसून सत्र की रणनीति और अन्य राजनीतिक तैयारियां फिलहाल लंबित बताई जा रही हैं।इसके अलावा, वायनाड में आई बाढ़ के दौरान भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की गैरमौजूदगी को लेकरप राजनीतिक विरोधियों ने सवाल उठाए।

राजनीति केवल भाषणों और बयानों तक सीमित नहीं होती।कई बार जनता के बीच सक्रिय मौजूदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी किसी मुद्दे पर मुखर होकर बोलना।ऐसे में राहुल गांधी की विदेश यात्रा एक बार फिर कांग्रेस के लिए राजनीतिक बहस और विपक्षी रणनीति का केंद्र बन गई है।

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