न्यूज़ डेस्क
पिछले दो महीने से अशांत और हिंसाग्रस्त मणिपुर का दौरा अब राहुल गाँधी खुद करने जा रहे हैं। वे 29 जून को इंफाल जायेंगे और फिर कई जगहों पर स्थित रिलीफ कैंपो की जानकारी भी लेंगे। राहुल की इस संभावित यात्रा के बाद मणिपुर की राजनीति भी गरमाने लगी है। मैतेई ,कुकी और नागा समूह के बीच चल रही यह लड़ाई अब सेना के खिलाफ भी होती जा रही है। स्थानीय समुदाय के लोग अब सेना पर भी हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी 29 जून को मणिपुर जाएंगे। वहां वे दो दिन रहेंगे और इम्फाल और चुराचांदपुर के रिलीफ कैम्प में भी जाएंगे। साथ ही वो सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मणिपुर में हालात काफी खराब हैं। इस हिंसा को रोकने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से उठाए गए कदम नाकाफी हो रहे हैं। 24 जून को गृह मंत्री अमित शाह ने सर्वदलीय बैठक की। और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले दिन से ही मणिपुर की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। समस्या का समाधान निकालने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं।
कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियां लगातार भाजपा और पीएम मोदी पर हमला कर रहीं हैं कि मणिपुर हिंसा पर पीएम चुप क्यों है। मणिपुर में बीती 3 मई को एक आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हिंसा शुरू हो गई थी। राज्य में जारी इस हिंसा में अब तक 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही सेना के लोग भी बड़ी संख्या में घायल हुए हैं।
सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट किया कि ऐसी खबर है कि आखिरकार मणिपुर पर गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। पिछले 55 दिनों से मोदी जी ने मणिपुर पर एक शब्द नहीं कहा। अगर मोदी जी सही में मणिपुर के बारे में कुछ भी सोचते हैं तो सबसे पहले अपने मुख्यमंत्री को बर्खास्त कीजिए। उग्रवादी संगठनों व असामाजिक तत्वों के पास से हथियार जब्त करें। सभी पक्षों से बातचीत शुरू करें और साझा राजनीतिक रास्ता निकाला जाए।
इससे पूर्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि एक ओर पूर्वोत्तर राज्य जल रहा है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं। गृह मंत्री अमित शाह कुछ कर नहीं रहे हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आगे कहा कि बीरेन सिंह का एक मिनट भी मुख्यमंत्री पद पर रहना मणिपुर में शांति लाने और सुलह प्रक्रिया शुरू करने के प्रयासों में बर्बाद हुआ एक मिनट है। उनके मुख्यमंत्री बने रहने का वास्तव में कोई अर्थ नहीं है।

