राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत का साथ नसीहत भी – एक नेता को समझदारी दिखानी चाहिए

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बीरेंद्र कुमार झा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत के साथ नसीहत भी मिली।शीर्ष न्यायालय ने मानहानि मामले में उनके सजा पर रोक तो लगाई लेकिन इसके साथ ही उन्हें समझदारी दिखाने के लिए भी कहा।राहुल गांधी ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इससे पहले 23 मार्च को सूरत के एक कोर्ट ने उन्हें मानहानि के एक अपराधिक मामले में दोषी पाया था।

कोर्ट ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि राहुल गांधी द्वारा कही गई बातें ठीक नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट का⁵ कहना है कि सार्वजनिक जीवन जी रहे व्यक्ति को भाषण देते समय सावधान रहना चाहिए।शीर्ष न्यायालय ने अवमानना मामले में उनके हलफनामे को स्वीकार करते हुए कहा कि एक नेता को सावधान रहना चाहिए था ।आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद राहुल को सांसदी भी गंवानी पड़ गई थी।

क्या बोल गए थे राहुल गांधी

मामला साल 2019 का है तब कांग्रेस नेता लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कर्नाटक के कोलार में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। तब उन्होंने नीरव मोदी और ललित मोदी का जिक्र करते हुए मोदी सरनेम पर टिप्पणी कर दी थी। तब बीजेपी के पुर्णेश मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर न्यायलय में मामला दर्ज करा दी थी।

राहुल गांधी ने कहा था अच्छा एक छोटा सा सवाल इन सब के नाम इन सब चोरों के नाम मोदी मोदी कैसे हैं ।नीरव मोदी ललित मोदी नरेंद्र मोदी थोड़ा अभी और ढूंढ लेंगे तो और बहुत सारे मोदी निकलेंगे।इससे पहले उन्होंने कहा था कि 100 %चौकीदार चोर है । नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या, ललित मोदी, अनिल अंबानी, नरेंद्र मोदी। चोरों का ग्रुप है, चोरों की टीम है ।आपके जेब में से पैसा लेते हैं और उन्हीं 15 लोगों को देते हैं।

बहाल होगी सांसदी

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मानहानि का दोषी पाए जाने पर मिली 2 साल की सजा पर रोक लगा दी है। अब वह संसद में जाकर भागीदारी कर सकते हैं और उनकी सांसद की स्थिति बहाल रहेगी। यदि इस सजा पर रोक नहीं लगती तो राहुल गांधी सांसद से आयोग हो जाते
और अगले 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाते। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला राहुल गांधी कांग्रेस और इंडिया के तौर पर बने पूरे विपक्षी गठबंधन के लिए राहत की बड़ी खबर है।

 

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