न्यूज़ डेस्क
गुजरात हाई कोर्ट से मोदी सरनेम मामले में राहत नहीं मिलने के बाद राहुल गाँधी अब सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे क्योंकि इसके सिवा अब कोई रास्ता ही नहीं बचा है। लेकिन इससे पहले ही बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है।कैविएट में अनुरोध किया गया है कि अगर राहुल गांधी मोदी उपनाम टिप्पणी मामले में उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए कोई याचिका दाखिल करते हैं, तो शिकायतकर्ता के पक्ष को भी सुना जाए।
गुजरात उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने सात जुलाई को गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के मुताबिक पूर्णेश मोदी ने वकील पी एस सुधीर के माध्यम से उसी दिन उच्चतम न्यायालय में कैविएट दाखिल की।
कैविएट किसी वादी के द्वारा अपीलीय अदालत में दाखिल की जाती है और उसमें निचली अदालत के फैसले अथवा आदेश को चुनौती देने वाली विपक्षी की याचिका पर कोई आदेश पारित किए जाने से पहले उसके पक्ष के सुने जाने का अनुरोध किया जाता है।
गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘मोदी उपनाम’ को लेकर 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में दोषसिद्धि पर रोक संबंधी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि राजनीति में शुचिता समय की मांग है। न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने 53 वर्षीय गांधी की याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की, जनप्रतिनिधियों को स्वच्छ छवि का व्यक्ति होना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि दोषसिद्धि पर रोक लगाना नियम नहीं, बल्कि अपवाद है, जो विरले मामलों में इस्तेमाल होता है। इसने कहा कि सजा पर रोक लगाने का कोई उचित आधार नहीं है। गांधी की सजा पर अगर रोक लग जाती तो लोकसभा सदस्य के रूप में उनकी बहाली का मार्ग प्रशस्त हो जाता।
फैसले के बाद कांग्रेस ने कहा था कि वह इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएगी। इसने आरोप लगाया कि सरकार गांधी की आवाज को दबाने के लिए “नई तकनीक” ढूंढ़ रही है क्योंकि वह उनके सच बोलने से परेशान है।

