हेमा मालिनी से पहले श्रीदेवी को ऑफर हुई थी फिल्म, सलमान खान की वजह से किया था ऑफर रिजेक्ट

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2003 में रिलीज हुई फिल्म बागबान, एक इमोशनल कहानी है जो आज भी लोगों के दिलों को छूती है. ये फिल्म बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ने वाले बच्चों की कहानी है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस फिल्म में राज मल्होत्रा (अमिताभ बच्चन ) की पत्नी पूजा मल्होत्रा जिसका रोल हेमामालिनी ने किया था वह पहले ये श्रीदेवी को ऑफर हुआ था, ना कि हेमा मालिनी को?दरअसल, निर्देशक बी.आर. चोपड़ा ने सबसे पहले श्रीदेवी को इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के अपोजिट काम करने का ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने इस फिल्म को करने से मना कर दिया था। आईए जानते हैं किस वजह से श्रीदेवी ने इतना महत्वपूर्ण रोल अदा करने से मना कर दिया था।

श्रीदेवी ने इस फिल्म को रिजेक्ट करने की सबसे बड़ी वजह यह बताई थी कि वह इसे अपनी वापसी के लिए सही फिल्म नहीं मानती थीं।उन्होंने कहा कि वह खुद को इस किरदार में फिट नहीं पातीं, क्योंकि इसमें उन्हें सलमान खान की मां का रोल निभाना था।श्रीदेवी और सलमान खान पहले चंद्रमुखी और चाँद का टुकड़ा जैसे कई फिल्मों में साथ काम कर चुके थे।इसलिए, वह सलमान की मां का किरदार निभाने में कंफर्टेबल नहीं थीं।

श्रीदेवी के बाद यह रोल हेमा मालिनी को ऑफर किया गया , जिन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म में शानदार परफॉरमेंस दी। बागबान में हेमा मालिनी और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने सबको इमोशनल कर दिया था।फिल्म की कहानी में राज मल्होत्रा (अमिताभ बच्चन)और पूजा मल्होत्र (हेमा मालिनी) की शादी को 40 साल हो चुके होते हैं।अपने बच्चों के साथ रहने के प्रयास में बार – बार इनकी भावनाएं आहत होती है।

बागबान ने बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन किया था।फिल्म 3 अक्टूबर 2003 को रिलीज़ हुई थी और इसे बनाने में करीब 10 करोड़ रुपये का बजट लगा था।इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 43.11 करोड़ रुपये की कमाई की थी, जो उस समय के हिसाब से एक बड़ा आंकड़ा था।बागबान की कहानी 1937 की हॉलीवुड फिल्म मेक वय फॉर टुमारो से प्रेरित थी, जो बाद में 1958 की कन्नड़ फिल्म स्कूल मास्टर से भी जुड़ी थी।फिल्म की कहानी भले ही पुरानी हो, लेकिन इसके इमोशंस आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब थे।

आज भी बागबान को एक क्लासिक फिल्म माना जाता है, क्योंकि यह बच्चों और माता-पिता के रिश्ते की एक सच्ची और इमोशनल तस्वीर पेश करती है। फिल्म के डायलॉग्स और गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं, और इसका संदेश कभी पुराना नहीं होता है।

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