भारत G7 का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन अपनी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव के कारण इसे अक्सर G7 की बैठक में बुलाया जाता रहा है। 2000 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भी भारत ने कई बार G7 (और G8) की बैठकों में हिस्सा लिया था और नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद तो भारत को G 7 की बैठक में बुलाना और इसका विश्व के सबसे ताकतवर देशों के समूह G 7 की बैठक में भाग लेना आम बात हो गई है।
इस समय फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस मैं चल रही G 7 की बैठक में आमंत्रित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे दम खम के साथ विश्व के इस ताकतवर समूह G7 के बैठक में जाकर दुनिया को अपना दमखम दिखा रहे हैं।
फ्रांस से G7 की बैठक की आई एक तस्वीर इस समय पूरी दुनिया में वायरल हो रही है जो भारत के दमखम को दिखाता है। दुनिया का सबसे ताकतवर देश माने जाने वाला अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी कुर्सी पर बैठे हुए हैं। तभी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां पहुंचते हैं और ट्रंप की अनदेखी करते हुए उनकी बगल में रखी कुर्सी को खिसकाते हैं।इसे देखकर अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खड़े होकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाँह थपथपाते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सगर्व उनकी आंखों में आंखें डालकर खड़े रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह मुद्रा साफ-साफ बताती है कि इसके द्वारा वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साफ-साफ कह रहे हैं कि अब बहुत हो गया, अब बंद करो अपना कमीनापन ।बंद करो ,कभी टैरिफ के नाम पर तो कभी ट्रेड डील के नाम पर भारत को अस्थिर करने और अपने प्रभाव में लाने का खेल। भारत तुम्हारे सामने झुकने वाला नहीं है। हम ट्रेड डील करने के लिए तैयार हैं, लेकिन तुम्हारी शर्तों पर नहीं, बल्कि भारत के 150 करोड़ के आसपास की जनसंख्या के हितों की शर्तों पर। हमें तुम्हारे कृषि उत्पाद की जरूरत नहीं, हां ! तुम्हें हमारे कृषि उत्पाद की जरूरत हो तो बोलो ,जैसे भारत इंग्लैंड, जापान आदि देशों में अपना कृषि उत्पाद भेजने में जुटा हुआ है वैसे ही तुम्हारे यहां भी भेजेगा।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह आत्मविश्वास अकारण नहीं है। इसके पीछे बाद ठोस कारण है। पहली बात तो यह है कि इस समय डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ और ईरान के साथ युद्ध दोनों ही मामले में अमेरिका में ही बड़ी फजीहत उठानी पड़ी है। टैरिफ के मामले में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को फटकार लगी है तो ईरान युद्ध के मामले में अमेरिका के सीनेट ने डोनाल्ड ट्रंप के जो एक बिल पास किया है उसमें डोनाल्ड ट्रंप के रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटरों ने भी क्रॉस वोटिंग कर डेमोक्रेट्स का साथ दिया है। साथ ही अमेरिका में जल्दी ही मध्यावधि चुनाव भी होना है। यानी यह तय है कि अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इन दोनों ही मुद्दों पर अपने पांव पीछे खींचने पड़ेंगे। ईरान युद्ध को लेकर तो अब यह साफ दिखने भी लगा है कि किस प्रकार से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऊपर से भले ही गीदड़भवकी दे लें, लेकिन अंदर ही अंदर जल्दी से इस युद्ध को समाप्त करने में जुट गए हैं।शुक्रवार को संभवत अमेरिका- ईरान युद्ध के समाप्त होने वाले डील पर दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के दस्तखत भी हो जाए।
दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्थिति इस समय काफी मजबूत है। भले ही 2024 ईस्वी में हुए आम चुनाव में पीएम मोदी को थोड़ा झटका लगा था, जबकि उनके सांसदों की संख्या पूर्व के 303 से घटकर 240 पर सिमट गई थी। हालांकि इसके बावजूद एनडीए के 292 सीटों पर मिली जीत के सहारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद एक-एक कर हरियाण विधान सभा ,महाराष्ट्र विधानसभा, बिहार विधानसभा, दिल्ली विधानसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से अपना दम खम दिखा दिया। इसके बाद बीजेपी ने बंगाल के टीएमसी सांसदों और अब महाराष्ट्र के शिवसेना यूबीटी के कई सांसद को भी तोड़कर अपने पक्ष में कर 2024 के चुनाव में अपने दम पर बहुमत नहीं होने की लगभग भरपाई कर ली है।
इन बातों पर नजर डालने से यह स्पष्ट है कि इस समय भारत के पीएम नरेंद्र मोदी का पलड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारी है। तो ऐसे में जब डोनाल्ड ट्रंप खुद ही कई बार यह बात कह चुके हैं कि पीएम मोदी एक बड़ा बारगेनर है, तो इस अवसर पर जबकि जी7 की बैठक के बाद भारत के पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक निर्धारित है, तो वहां पीएम मोदी ट्रेड डील को तो भारत के पक्ष में करवा ही लेगा ताकि भारत में अपने विरोधियों को जो नरेंद्र सरेंडर का एक नरेटिव बनाने में लगे हुए हैं, उन्हें करारा जवाब देते हुए नरेंद्र सरेंडर की जगह पर नरेंद्र विक्टर कहने के लिए बाध्य कर दे।
फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मानवता प्रथम” (Humanity First) का संदेश दिया और दुनिया से “दाता-ग्राही” (Donor-Recipient) की पुरानी सोच से आगे बढ़कर समानता और एकजुटता पर आधारित साझेदारियां बनाने का आह्वान कर भारत की प्राचीन संस्कृति की बड़ी विशेषता सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मां कश्चित दुखभाग्भवेत को चरितार्थ करने का परामर्श दिया।

