राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया किसानों के अधिकारों पर वैश्विक संगोष्ठी का शुभारंभ !   

0
182

न्यूज़ डेस्क 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को  किसानों के अधिकारों पर चार दिवसीय वैश्विक संगोष्ठी का शुभारंभ पूसा, नई दिल्ली में किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर ने समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में 26 पादप जीनोम संरक्षक पुरस्कार किसानों व संगठनों को प्रदान किए गए। इस मौके पर राष्ट्रपति ने प्लांट अथारिटी भवन का उद्घाटन किया व पौधा किस्मों के पंजीकरण के लिए आनलाइन पोर्टल भी लांच किया।
                  अपने संबोधन में  राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत की समृद्ध कृषि-जैव विविधता वैश्विक समुदाय के लिए एक खजाना रही है। हमारे किसानों ने कड़ी मेहनत व उद्यमपूर्वक पौधों की स्थानीय किस्मों का संरक्षण किया है, जंगली पौधों को पालतू बनाया है एवं पारंपरिक किस्मों का पोषण किया है, जिन्होंने विभिन्न फसल प्रजनन कार्यक्रमों के लिए आधार प्रदान किया है। इससे मनुष्यों व जानवरों के लिए भोजन और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जैव विविधता को संरक्षित व पोषित करके किसान बिरादरी न केवल मानवता को, बल्कि पूरे ग्रह को बचा रही हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशेष की फसलों की किस्में समाज व संस्कृति से गहराई से जुड़ी होती हैं, इनमें औषधीय गुण भी होते हैं।
    राष्ट्रपति ने  कहा कि जैव विविधता, वन्य जीवन, विभिन्न विदेशी पौधों व प्राणियों की विस्तृत श्रृंखला ने हमेशा हमारे जीवन को समृद्ध किया है और इस ग्रह को सुंदर बनाया है। उन्होंने कहा कि सभ्यता की शुरूआत से ही हमारे किसान ही असली इंजीनियर व वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने मानवता के लाभ के लिए प्रकृति की ऊर्जा व उदारता का उपयोग किया है। एक नोबेल पुरस्कार विजेता व अर्थशास्त्री ने बिहार के गांव का दौरा करते समय एक बार टिप्पणी की थी “भारतीय किसान, वैज्ञानिकों से बेहतर हैं”। राष्ट्रपति ने कहा कि मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूं, क्योंकि कृषि में हमने परंपरा को प्रौद्योगिकी के साथ सहजता से मिश्रित किया है। कृषि मानव जाति का पहला ज्ञात व्यवसाय है, यह कृषि-जैव विविधता पर फला-फूला, जो प्रकृति ने हमें दी है। विश्व की कृषक बिरादरी इसकी अग्रणी संरक्षक है, जो फसल विविधता की सच्ची संरक्षक हैं।                
    महामहिम मुर्मू ने भारत प्राचीन सभ्यता है, जहां हमारी परंपराएं, संस्कृति व कृषि एक ही ताने-बाने का हिस्सा हैं। यह वह भूमि है जिसने युगों-युगों से “वसुधैव कुटुंबकम” की अवधारणा को आत्मसात किया है। जैव विविधता में, भारत पौधों व प्रजातियों की विस्तृत श्रृंखला से संपन्न देशों में से एक है। हमारे कृषि-जैव विविधता संरक्षकों व मेहनती किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के प्रयासों ने सरकारी समर्थन के साथ मिलकर देश में कई कृषि क्रांतियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में हस्ताक्षरित खाद्य व कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतर्राष्ट्रीय संधि, भोजन और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, उपयोग व प्रबंधन के लिए सदस्य देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण                       मुर्मु ने कहा कि हमारा देश किसानों को कई प्रकार के अधिकार प्रदान करता है। भारतीय किसान खुद की किस्मों को पंजीकृत कर सकते हैं, जिन्हें सुरक्षा मिलती है। ऐसा अधिनियम पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय उत्कृष्ट मॉडल के रूप में काम कर सकता है। जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर व मानवता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पूरा करने के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। 
                 इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि कृषि-जैव विविधता संरक्षण सिर्फ कर्तव्य नहीं है, बल्कि इकोसिस्टम के अस्तित्व के लिए महत्ती आवश्यकता है, भारत सरकार इस उद्देश्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत इस अंतरराष्ट्रीय संधि (आईटीपीजीआरएफए) के तहत सहमत सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है व इसके अक्षरश: पालन मेँ विश्व में सर्वोपरि कार्य कर रहा है। यह तथ्य, भारतीय संसद द्वारा पौधों की विविधता व किसानों के अधिकार संरक्षण अधिनियम-2001 के रूप में अधिनियमित राष्ट्रीय कानून से बहुत स्पष्ट रूप से रेखांकित है। इस कानून के अधिनियमन के बाद से, भारत सरकार ने कानून में किए प्रावधानों के अनुरूप इसका पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी शिद्दत के साथ काम किया है। 
                       मंत्री ने कहा कि हमारी समृद्ध कृषि विरासत, किसानों के प्रयासों के कारण फली-फूली है, जिन्होंने कई पौधों की किस्मों का पोषण व विकास किया है। ये किस्में न केवल जीविका स्रोत हैं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंध का जीवंत प्रमाण हैं। सरकार के रूप में, हम इन किस्मों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को समझते हैं कि वे फलते-फूलते रहें। किसानों के अधिकारों की सुरक्षा हमारी कृषि नीतियों का महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने कहा कि किसान हमारी भूमि के संरक्षक हैं, उनके अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, उन्हें बरकरार रखना चाहिए, ऐसा हमेशा से भारत का प्रयास रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here