Bihar News:बिहार की सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु अब सरकार की सख्त निगरानी में है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सोमवार को इस मेगा प्रोजेक्ट के लंबित कार्यों की समीक्षा की और साफ संकेत दिया कि अब काम की रफ्तार किसी भी हालत में धीमी नहीं होनी चाहिए।
करीब 1822.23 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली लाइफलाइन माना जा रहा है।
लक्ष्य के करीब, लेकिन रफ्तार बढ़ाने की जरूरत
समीक्षा में सामने आया कि सेगमेंट कास्टिंग और इरेक्शन का काम निर्धारित लक्ष्यों के आसपास चल रहा है। मार्च 2026 में 40 सेगमेंट के लक्ष्य के मुकाबले 39 पूरे किए गए, जबकि अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक 29 के लक्ष्य के खिलाफ 26 सेगमेंट तैयार किए गए हैं।
हालांकि मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यह गति पर्याप्त नहीं है और इसे और तेज करना जरूरी है ताकि तय समयसीमा पर असर न पड़े।
अब हर महीने तय होगी कास्टिंग की रफ्तार
परियोजना एजेंसी ने शेष 438 सेगमेंट की कास्टिंग के लिए हर महीने 40 सेगमेंट तैयार करने का लक्ष्य तय किया है।इसके साथ ही पीयर P-29 तक इरेक्शन का काम मई 2027 तक पूरा करने की योजना बनाई गई है, जिसे सरकार हर हाल में पूरा कराना चाहती है।
संसाधनों में बढ़ोतरी के निर्देश, नहीं होगी कोई देरी
समीक्षा के दौरान प्रत्यय अमृत ने साफ निर्देश दिया कि सीएफटी सेटों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि P-33 से A2 तक के स्पैन का काम समय पर पूरा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि मानसून को छोड़कर कास्टिंग की गति लगातार बनाए रखी जाए और किसी भी स्तर पर देरी न हो।
साप्ताहिक निगरानी और तुरंत समाधान का निर्देश
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा की जाए और किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान किया जाए। सरकार अब इस प्रोजेक्ट को लेकर ‘नो-डिले’ नीति पर काम कर रही है।
उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ेगा लाइफलाइन ब्रिज
यह गंगा महासेतु बख्तियारपुर (NH-31) से ताजपुर (NH-28) के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा। इसके पूरा होने से आवागमन आसान होगा और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिलेगी। मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि गुणवत्ता और समयसीमा दोनों से कोई समझौता नहीं होगा।

