वोट बैंक के दृष्टिकोण से महिलाएं बीजेपी के लिए एक बड़ा वोट बैंक सिद्ध होती रही हैं। बीजेपी की जीत में महिलाएं बड़ी भूमिका निभाती आ रही है। यही कारण है कि बीजेपी भी लाडली बहन योजना से लेकर उज्जवला गैस योजना जैसे कई कार्यक्रम सिर्फ महिलाओं के लिए चलाती है। 2029 ईस्वी में होने वाले आम चुनाव में महिलाओं का वोट हासिल करने के लिए इन योजनाओं के बाद अब बीजेपी और एनडीए के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी महिलाओं को सत्ता में भागीदारी देने वाली एक योजना नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद से पास करवाकर कानून बनाने में जुटी हुई है।
पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने बजट सत्र के दौरान ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम को कानून बनाने के लिए लोकसभा में एक विधेयक लाया था। लेकिन विपक्षी राजनीतिक दलों की चट्टानी एकता के कारण तब यह नारी शक्ति वंदन अधिनियम 54 वोटो से गिर गया था।
बजट सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पास नहीं हो जाने के बावजूद पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने हार नहीं मानी थी। लोकसभा में नारी शक्ति बंधन अधिनियम के पास नहीं होने के अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु की एक सभा में कहा था कि वे महिलाओं को सत्ता मैं भागीदारी दिला कर रहेंगे और जब तक इसे पास नहीं कर लेते हैं तब तक शांत नहीं बैठेंगे।
पश्चिम बंगाल चुनाव में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के साथ-साथ पीएम मोदी और अमित शाह ने महिलाओं को सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए ज्यादासांसदों को अपने पक्ष में करने की अपनी रणनीति को काफी तेज कर दिया ताकि मानसून सत्र के दौरान वे नारी शक्ति बंधन अधिनियम और परिसीमन अधिनियम को संसद से पास करवा सकें। इसके लिए सबसे पहले उन्होंने टीएमसी में तोड़फोड़ शुरू करवा दी और उसके 20 सांसदों को बागी बनाकर नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी यानी एनसीपी में शामिल कराकर एनडीए का समर्थक बना लिया है। इसके बाद उन्होंने शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को बागी बनाकर इसे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना मैं शामिल करवाकर एनडीए का समर्थक बना लिया है।
टीएमसी और शिवसेना यूबीटी में तोड़फोड़ करवाकर भी बीजेपी को नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन अधिनियम को पारित करवाने के लिए आवश्यक लोकसभा के 360 और राज्य सभा के 162 सांसदों में से लोकसभा में 48 और राज्यसभा में 10 सांसदों की कमी बनी रहेगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन अधिनियम को पास करने के लिए इस समय पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी महाराष्ट्र में ही जोड़-तोड़ पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। महाराष्ट्र में इस बार निशाने पर है शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी, जिसके पास लोकसभा में आठ और राज्यसभा के एक सांसद है।
इस सिलसिले मैं बाद एनसीपी शरद पवार के बीजेपी में विलय तक पहुंच गई थी, लेकिन तभी शरद पवार की बेटी और एनसीपी की नेत्री सुप्रिया सुले ने इसमें लंगड़ी लगा दी। सुप्रिया सुले ने एक तरह से विलय की संभावना पर रोक लगा दी, लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन अधिनियम को लेकर एक शर्त के साथ पीएम मोदी और अमित शाह की नीति का समर्थन करने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि अगर पूरे देश के राज्यों में सांसदों की संख्या 50% तक बढ़ा दी जाए तब वह संसद में बीजेपी के द्वारा इस बिल को ले जाने पर इसका समर्थन करेंगी। इस मुद्दे पर उन्होंने डीएम के को भी एनडीए के पक्ष में मतदान करने के लिए राजी करने की बात कही और ऐसा न करने की स्थिति में एनडीए से दूर जाने की भी बात कर दी।
इस पर बीजेपी की तरफ से भी सुप्रिया सुले को साफ-साफ कह दिया गया कि अब जब आप बीजेपी की इतने करीब आ गई है तो आपको इस बार इस पार या उस पार में से कोई एक चुनना ही पड़ेगा। उस पार जाने की तो कोई बात ही नहीं है, क्योंकि एक तो एनसीपी शरद पवार के ज्यादातर सांसद और विधायक बीजेपी के पक्ष में आने के लिए तैयार बैठे हैं और अगर उन्होंने इसे लेकर कोई ना नुकुर किया तो टीएमसी और शिवसेना यूबीटी की ही तरह एनसीपी शरद पवार की भी हालत कर दी जाएगी।आप अकेले पड़ जाएंगे और सारे सांसद और विधायक मेरे पास चले आयेंगे। इसके साथ ही बिना कुछ बोले इसारे – इशारे में ईडी,सीबीआई और इनकम टैक्स की कार्रवाई की भी बात बता दी और यह भी बता दिया कि कांग्रेस तो अब डूबती नाव है, उसमें सवारी करेंगे तो कांग्रेस के साथ ही आप की पार्टी भी डूब जाएगी। हालांकि सुप्रिया सुले ने इसके बाद इसे लेकर और कुछ नहीं कहा और चुप्पी साध ली लेकिन लगता है जिस प्रकार से उनकी पार्टी के सांसद और विधायक बीजेपी में विलय के लिए उत्साहित हो रहे हैं हार पार कर उन्हें भी इसमें अपनी सहमति देनी ही पड़ेगी।
एनसीपी शरद पवार के बीजेपी में विलय के बावजूद नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन अधिनियम को संसद में पास करने के लिए अपेक्षित सांसद पूरे नहीं होंगे।इसके लिए पीएम मोदी और नरेंद्र शाह की जोड़ी डीएमके के नेता एमके स्टालिन से भी बातचीत कर रहे हैं। डीएमके के पास लोकसभा की 22 और राज्यसभा के 10 सांसद हैं। डीएमके पूर्व में भी सभी राज्यों में लोकसभा की सीट में वर्तमान के 50% तक बढ़ाने की मांग कर चुके हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ऐसा करने के लिए पूर्व में भी तैयार हो चुके थे। ऐसे में अगर सीपी शरद पवार के साथ-साथ डीएमकेवी संसद के मानसून सत्र में बीजेपी के द्वारा लाने जाने वाले संभावित परिसीमन बल पर एनडीए का साथ दे देते हैं तो राज्यसभा में तो पूर्ण बहुमत हो ही जाती है लोकसभा में भी दो दो चार सिम घटेंगे वह भी फ्लोर मैनेजमेंट की तरफ बीजेपी आसानी से कर लेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी मानसून सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन अधिनियम को पास करवा कर कानून बनवाने में सफल हो सकती है या नहीं।

