बीरेंद्र कुमार झा
दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में दो दिवसीय जी-20 शिखर सम्मेलन का समापन हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की समाप्ति की आधिकारिक घोषणा की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील को जी- 20 की अध्यक्षता हस्तांतरित करते हुए पारंपरिक गैवल (एक प्रकार का हथौड़ा) सौंप दिया और उन शुभकामनाएं दी। प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत के एक श्लोक ‘ स्वस्ति अस्तु’ विश्व का संदर्भ देते हुए पूरे विश्व में शांति एवं सौहार्द की प्रार्थना की।
पीएम मोदी ने नवंबर के आखिर में वर्चुअल सत्र के आयोजन का दिया प्रस्ताव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को यहां संपन्न हुए जी – 20 शिखर सम्मेलन में लिए गए फैसलों पर हुई प्रगति की समीक्षा के वास्ते नवंबर के अंत में एक वर्चुअल सत्र के आयोजन का प्रस्ताव दिया।अपने समापन भाषण में मोदी ने कहा कि भारत की जी – 20 की अध्यक्षता आधिकारिक रूप से 30 नवंबर तक जारी रहेगी। समूह के अध्यक्ष के रूप में उसके कार्यकाल में ढाई महीने से ज्यादा का वक्त बाकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले दो दिनों में आपने अपने-अपने विचार रखे, सुझाव दिए और कई प्रस्ताव रखें। यह हमारी जिम्मेदारी है कि जो सुझाव सामने आए हैं, उन पर बारीकी से गौर किया जाए कि उसे कैसे गति दी जा सकती है।उन्होंने कहा कि मेरा प्रस्ताव है कि नवंबर के अंत में जी-20 के वर्चुअल सत्र का आयोजन करना चाहिए। उस सत्र में हम उन मुद्दों की समीक्षा कर सकते हैं,जिन पर इस शिखर सम्मेलन के दौरान सहमति बनी थी। हमारा दल इसका विवरण सभी के साथ साझा करेगा। मैं उम्मीद करता हूं कि आप सभी उस सत्र में शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री मंत्री मोदी का वैश्विक निकायों में सुधारो पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक निकायों में सुधारो पर नए सिरे से जोर दिया और कहा कि दुनिया की नई वास्तविकताएं नई वैश्विक संरचना में प्रतिबिंबित होनी चाहिए क्योंकि यह प्रकृति का नियम है कि जो नहीं बदलते हैं, समय के साथ उसकी प्रासंगिकता खत्म हो जाती है। जी-20 शिखर सम्मेलन के एक भविष्य सत्र में बदलाव की जरूरत वाले निकाय के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि यह जरूरी है कि दुनिया को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने के लिए वैश्विक निकायों को आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए।उन्होंने कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 51 सदस्यों के साथ हुई थी, तो दुनिया अलग थी और अब सदस्य देशों की संख्या लगभग 200 हो गई है।
यूएनएससी में स्थायीय सदस्यों के नए नाम जोड़ने पर पीएम मोदी ने दिया ज़ोर
मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ में सदस्यों की संख्या में भारी वृद्धि के बावजूद इसके संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य आज भी उतने ही हैं। तब से आज तक दुनिया हर लिहाज से बहुत बदल चुकी है। परिवहन और संचार हो, स्वास्थ्य और शिक्षा हो। हर क्षेत्र का कायाकल्प हो चुका है। यह नई वास्तविकता है ।हमारी नई वास्तविकता वैश्विक संरचना में प्रतिबिंबित होने चाहिए ।संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों में अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस शामिल है ।प्रधानमंत्री ने कहा हमें खुले मन से विचार करना होगा कि आखिर क्या कारण है कि बीते वर्षों में अनेक क्षेत्रीय मंच अस्तित्व में आए हैं और यह प्रभावी भी सिद्ध हो रहे हैं।सुधारो की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इसलिए शनिवार को अफ्रीकी संघ को जी – 20 का सदस्य बनाकर एक ऐतिहासिक पहल की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी तरह हमें बहुपक्षीय विकास बैंक के मैंडेट का विस्तार भी करना होगा। इस दिशा में हमारे फैसला तुरंत होने चाहिए और यह प्रभावी भी होनी चाहिए ।
क्रिप्टोकरेंसी आतंकवाद के लिए वित्त पोषण का एक नया स्रोत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में साइबर सुरक्षा और क्रिप्टोकरंसी को दुनिया के वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करने वाले ज्वलंत मुद्दों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरंसी सामाजिक व्यवस्था और मौद्रिक एवं वित्तीय स्थिरता के लिए एक नया विषय है उन्होंने इसे विनियोजित करने के लिए वैश्विक मानकों के विकास की मांग की। मोदी ने कहा कि साइबर जगत आतंकवाद के लिए वित्त पोषण का एक नया स्रोत बनकर उभरा है और इसे सुरक्षित करने के लिए वैश्विक सहयोग और ढांचा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह हर देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण विषय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम हर देश की सुरक्षा और संवेदनशीलता का ख्याल रखेंगे तो एक भविष्य की भावना मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में अकल्पनीय पैमाने और गति देख रही है।उन्होंने उदाहरण के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का हवाला देते हुए कहा कि जी-20 देश को 2019 में समूह द्वारा अपनाए गए एआई पर सिद्धांतों से आगे बढ़ाने की जरूरत है।
मानव केंद्रित सुसाशन के लिए फ्रेमवर्क तैयार करें
पीएम मोदी ने कहा कि मेरा सुझाव है कि अब हम जिम्मेदार मानव केंद्रित सुसाशन के लिए फ्रेमवर्क तैयार करें। इस संबंध में भारत भी अपना सुझाव देगा। हमारा प्रयास होगा कि सामाजिक – आर्थिक विकास, वैश्विक कार्य बल और अनुसंधान एवं विकासशील क्षेत्र में सभी देशों को एआई का लाभ मिले।
मोदी ने चंद्रमिशन के डाटा को सभी के लिए साझा करने की इच्छा व्यक्त की
जीडीपी -केंद्रित दृष्टिकोण के बजाय मानव – केंद्रित दृष्टिकोण के लिए अपने प्रयास पर प्रकाश डालते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने मानवता के हित में अपने चंद्र – मिशन के डाटा को सभी के साथ साझा करने की इच्छा व्यक्त की है उन्होंने कहा कि यह मानव केंद्रित विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दुनिया को वैश्विक परिवार को वास्तविक बनाने के लिए वैश्विक गांव की अवधारणा से आगे जाने की जरूरत है।उन्होंने एक ऐसे भविष्य का आह्वान किया जिसमें न केवल देश के हित जुड़े हो बल्कि उनके दिल भी जुड़े हों। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में टिकाऊ और स्थायित्व की भी उतनी ही जरूरत है जितना परिवर्तन की।

