झारखंड में पेसा कानून को दिया गया अंतिम रूप, ग्राम सभा को मिले कई अधिकार

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बीरेंद्र कुमार झा

सरकार ने सभी आपत्तियों और सुझावों पर फैसला करते हुए पेसा रूल 2022 को अंतिम रूप दे दिया है। पेसा रूल में ग्राम सभाओं को शक्तिशाली और अधिकार संपन्न बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ग्राम सभा की बैठकों के अध्यक्षता मानकी मुंडा आदि पारंपरिक प्रधान ही करेंगे।ग्राम सभा के सहमति के बिना जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकेगा। ग्राम सभा का फैसला ही अंतिम होगा। आदिवासियों की जमीन खरीद बिक्री मामले में भी ग्राम सभा की सहमति की बाध्यता होगी। ग्राम सभा गांव में विधि व्यवस्था बहाल करने के उद्देश्य से आईपीसी की कुल 36 धाराओं के साथ अपराध करने वालों पर न्यूनतम ₹10 से अधिकतम ₹1000 तक का दंड लगा सकेगी।

दंड का अपील पारंपरिक उच्च स्तर के बाद सीधे हाई कोर्ट में किया जाएगा।पेसा रुल में पुलिस की भूमिका निर्धारित करते हुए किसी की गिरफ्तारी की 48 घंटे के अंदर गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी ग्राम सभा को देने की बाध्यता तय की गई है। ग्राम सभा को आदिवासियों की जमीन वापस करने का अधिकार भी दिया गया है।

31 अगस्त तक सरकार ने मांगी थी आपत्तियां और सुझाव

राज्य सरकार द्वारा जारी पेसा रूल के प्रारूप पर 31 अगस्त तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।इसके आलोक में कई संगठनों ने रूल के प्रारूप पर आपत्तियां दर्ज कराई थी, साथ ही कई सुझाव भी दिए गए थे ।सरकार ने उन आपत्तियों और सुझावों को अस्वीकार t जो हाई कोर्ट,सुप्रीम कोर्ट और पेसा अधिनियम झारखंड, सहित पंचायत राज अधिनियम 2001 के प्रावधानों के विपरीत थे। साथ ही नियम संगत सुझावों को स्वीकार करते हुए पेसा रूल 2022 को अंतिम रूप दिया है।इसमें कुल 17 अध्याय और 36 धाराएं हैं। सरकार ने जिन महत्वपूर्ण सुझावों को स्वीकार किया है, उसमें ग्राम सभा के लिए अलग कोष, लाभूकों के चयन का अधिकार ,परंपराओं के संरक्षण, परंपराओं का पालन,विभाग द्वारा बनाए जाने वाले योजनाओं को लागू करने से पहले ग्राम सभा की सहमति के अलावा मजदूरों को बाहर ले जाने से पहले उनकी विस्तृत जानकारी ग्राम सभा को देना सहित अन्य मुद्दे शामिल हैं।

ग्राम सभा में कोष स्थापित करने का प्रावधान

पेसा रूल में ग्राम सभा में कोष स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसे अन्नकोष ,श्रम कोष ,वस्तु कोष और नकद कोष के नाम से जाना जाएगा। नकद कोष में दान, प्रोत्साहन राशि, दान शुल्क ,वन उपज से मिलने वाले रॉयल्टी, तालाब,बाजार आदि के से मिलने वाली राशि रखी जाएगी। ग्राम सभा में बक्से में बंद कर अधिकतम ₹10 हजार ही रखे जाएंगे।इससे अधिक जमा हुई राशि को बैंक खाते में रखा जाएगा।

योजना के लाभों का चयन भी ग्रामसभा ही करेगी

ग्राम सभा ही संविधान के अनुच्छेद 275 ( 1)के तहत मिलने वाले अनुदान और जिला खनिज विकास निधि(DMFT ) से की जाने वाली योजनाओं का फैसला करेगी। योजना के लाभों का चयन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा। विभाग द्वारा चलाई जाने वाली योजना के लिए ग्राम सभा से विचार विमर्श करना होगा।

ग्राम सभा को दंड लगाने का भी दिया गया अधिकार

पेसा रूल में ग्राम सभा को विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए ₹10 से ₹1000 तक का दंड लगाने का अधिकार दिया गया है। दंडित व्यक्ति पारंपरिक उच्च स्तर पर अपील कर सकेगा। उच्च स्तर से भी राहत नहीं मिलने पर वह सीधे हाई कोर्ट में अपील करेगा। पुलिस द्वारा किसी को गिरफ्तार करने की 48 घंटे के अंदर ग्राम सभा को इसकी सूचना देनी होगी।

ग्राम सभा को दंड लगाने से संबंधित अधिकार की सूचि

ग्राम सभा आईपी के की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दंड लगाने के अपने अधिकारों का उपयोग कर सकेगी जिसमें आईपीसी की धारा160 दंगा फसाद के लिए ₹100 तक, 265 खोटा वाट का इस्तेमाल करना₹500 तक, 277 जल स्रोतों को प्रदूषित करना₹500 तक ,289 जीव धाराओं के साथ अपेक्षा पूर्ण वार्ता ₹500 तक, 249 अश्लील काम और अ टीटीश्लील गाना ₹200 तक, 298 धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना ₹500 तक,6 374 जबरन काम करना ₹1000 तक 379 चोरी करने पर ₹1000 तक ₹417 छल कपट के लिए ₹500 तक ₹429 जीव जंतु को करने या विकलांग करने पर ₹500 तक ,500 मानहानि के लिए ₹500 तक और 504 लोक शांति भंग करने पर ₹200 तक।

पारंपरिक प्रधन करेंगे ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता

पेसा रूल के तहत ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता मानकी मुंडा ,मांझी परगनैत डोकलो,शोहलो, शोहरो , पहड़ा जैसे पारंपरिक प्रधान ही करेंगे।पंचायत सचिव ग्राम सभा के सचिव के रूप में काम करेंगे। बैठकों में कोरम पूरा करने के लिए 1/3 एक सदस्यों की मौजूदगी की जरूरी है। कोरम कोरम पूरा करने के लिए निर्धारित संख्या का 1/3 महिलाओं की उपस्थिति भी जरूरी है।ग्राम सभा की बैठक में अभद्र व्यवहार करने वाले सदस्य को बैठक से निष्कासित करने का अधिकार सभा के अध्यक्ष को ही दियागया है।

ग्राम सभा के प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज करने का अधिकार

पेसा रूल के प्रावधानों के सामाजिक धार्मिक और प्रथा के प्रतिकूल होने की स्थिति में ग्राम सभा को इस पर आपत्ति दर्ज करने का अधिकार होगा। इस तरह के मामलों में ग्राम सभा प्रस्ताव पारित कर उपयुक्त के माध्यम से राज्य सरकार को भेजेगी। सरकार 30 दिनों के अंदर एक उच्च स्तरीय समिति बनाएगी। यह समिति 90 दिनों के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार फैसला करेगी और ग्राम सभा को सूचित करेगी।

अपनी सीमा के अंदर प्राकृतिक स्रोतों का प्रबंध करेगी ग्राम सभा

ग्राम सभा अपनी पारंपरिक सीमा के अंदर प्राकृतिक स्रोतों का प्रबंध करेगी।ग्राम सभा को वन उपज पर अधिकार दिया गया है।साथ ही वन उपज की सूची में पादप मूल के सभी गैर इमारती वन उत्पाद को भी शामिल किया गया है। वन उपज की सूची में बांस, झाड़- झंकार ,bent, महुआ, हर्रे बहेड़ा, रगड़ा तेंदू,और तेंदू पत्ता के अलावा औषधि पौधों और जड़ी बूटी को शामिल किया गया है। ग्राम सभा को लघु खनिजों का अधिकार दिया गया है। ग्राम सभा सामुदायिक संसाधनों का नियंत्रण समुदाय के पारंपरिक पद्धति और प्रथाओं से करेगी। हालांकि इस दौरान विल्कलिनसन रूल्स, छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम सहित अन्य कानूनों का ध्यान रखा जाएगा।

जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास में ग्राम सभा की सहमति जरूरी

पेसा रूल में ग्राम सभा को जमीन पर भी अधिकार दिया है। इसके साथ जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास के मामलों में ग्राम सभा की समिति की बाध्यता तय की गई है।ग्राम सभा को आदिवासियों की जमीन वापसी का अधिकार भी दिया गया है। अगर कोई ग्राम सभा अपने अधिकार क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन को गलत ढंग से लेने या उसकी नासमझी का फायदा उठाकर लेने का मामला पाती है, तो वह जमीन उसके असली मालिक को वापस कर देगी। जमीन के असली मालिक के जीवित नहीं होने की स्थिति में उसके वारिस को जमीन वापस की जाएगी। जमीन वापसी के मामले में किसी तरह की परेशानी होने पर ग्राम सभा ऐसे मामलों को उपायुक्त को सौंप देगी। पेसा रुल में ग्राम सभा की अनुमति के बिना अनुसूचित जनजातियों की किसी भी तरह की जमीन के स्थानांतरण पर पाबंदी लगाई गई है।आदिवासियों की जमीन के हस्तांतरण से पहले उपायुक्त द्वारा ग्राम सभा से अनुशंसा लेने की बाध्यता तय की गई है।

 

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