सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को राहत, मानहानि और फर्जीवाड़ा केस में मिली अग्रिम जमानत

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें फर्जी दस्तावेज और मानहानि से जुड़े एक मामले में अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल गिरफ्तारी से राहत दी जाती है।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने यह राहत कुछ शर्तों के साथ दी। अदालत ने कहा कि यदि खेड़ा की गिरफ्तारी होती है, तो उन्हें जमानत दी जाएगी, लेकिन उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि खेड़ा को जब भी पुलिस बुलाए, उन्हें उपस्थित होना होगा और मामले से जुड़े किसी भी सबूत से छेड़छाड़ या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी। साथ ही, बिना अदालत की अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने गौहाटी हाई कोर्ट के पहले के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें सभी तथ्यों का सही आकलन नहीं किया गया था और कुछ निष्कर्ष गलत प्रतीत होते हैं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज किया गया है और गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता को गिरफ्तार करके प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं, केंद्र और असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मामले में गंभीर आरोप हैं और जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। उनके अनुसार, जांच में कई दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं और मामले की गहराई से जांच जरूरी है। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी है कि फर्जी दस्तावेज कैसे बनाए गए और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या इस मामले के पीछे कोई बड़ी साजिश या विदेशी कनेक्शन है।

यह फैसला उस याचिका पर आया है जिसमें पवन खेड़ा ने गौहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया।
गौरतलब है कि पवन खेड़ा ने 24 अप्रैल को गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इस राहत पर अंतरिम रोक लगा दी और खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करने को कहा था।

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