Bihar News: बिहार के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने गुणवत्तापूर्ण धान बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की है। अब पैक्स (PACS) के माध्यम से धान बीज उत्पादन किया जाएगा। इसकी शुरुआत खरीफ वर्ष 2026-27 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राज्य के छह जिलों में की जाएगी।
सहकारिता विभाग के इस फैसले से किसानों को स्थानीय स्तर पर प्रमाणित और बेहतर गुणवत्ता वाले धान बीज उपलब्ध होंगे, जिससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इन 6 जिलों में होगी योजना की शुरुआत
पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य के छह प्रमुख कृषि जिलों को शामिल किया गया है—
रोहतास
कैमूर
औरंगाबाद
गया
भोजपुर
सिवान
इन जिलों में चयनित पैक्सों के माध्यम से धान बीज उत्पादन का कार्य कराया जाएगा।
PACS को मिलेगा नई भूमिका, किसानों को होगा सीधा लाभ
सहकारिता विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, राष्ट्रीय सहकारी बीज समिति (BBSSL) की सदस्यता प्राप्त पैक्सों को इस योजना से जोड़ा जाएगा।
अब तक पैक्स मुख्य रूप से धान अधिप्राप्ति और किसानों को कृषि सेवाएं देने तक सीमित थे, लेकिन अब उन्हें बीज उत्पादन से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की तैयारी की जा रही है।
बिहार राज्य बीज निगम और बसोका करेंगे सहयोग
धान बीज उत्पादन की पूरी प्रक्रिया बिहार राज्य बीज निगम (BRBN) और बिहार स्टेट सीड ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (BASOCA) के सहयोग से संचालित होगी।
बसोका में निबंधित किसानों की सूची संबंधित जिलों को उपलब्ध करा दी गई है। इन्हीं किसानों और चयनित पैक्सों के सहयोग से प्रमाणित बीज उत्पादन का कार्य शुरू होगा।
किसानों को क्यों मिलेगा फायदा?
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि यह योजना बिहार में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने वाली पहल साबित होगी। उन्होंने कहा कि पैक्सों को केवल धान खरीद तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का केंद्र बनाया जाएगा। स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होने से—
- किसानों की बीज खरीद लागत कम होगी
- प्रमाणित बीज आसानी से मिल सकेंगे
- धान की उत्पादकता बढ़ेगी
- कृषि उत्पादन में गुणवत्ता सुधार होगा
- किसानों की आय में वृद्धि होगी
अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
सहकारिता विभाग ने संबंधित जिलों के जिला सहकारिता पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जिला कृषि पदाधिकारियों और भारतीय बीज सहकारी समिति के साथ समन्वय बनाकर निर्धारित समयसीमा में योजना को सफलतापूर्वक लागू करें।
पूरे बिहार में विस्तार की तैयारी
सरकार का मानना है कि यदि छह जिलों में शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में इसे राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। इससे बिहार में बीज उत्पादन के क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं की भूमिका और मजबूत होगी तथा किसानों को अपने ही क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले धान बीज उपलब्ध हो सकेंगे।

