मांसपेशियां बता सकती हैं हार्ट अटैक का खतरा, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

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डॉक्टर कहते हैं कि दिल की बीमारी से बचाव का एक बेसिक तरीका है कोलेस्ट्रॉल कम करना, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना और डायबिटीज को मैनेज करना है।अब रिसर्चर्स एक ऐसे दूसरे अंग पर ध्यान दे रहे हैं जो चुपचाप दिल की सेहत पर असर डालता है, वो है स्केलटेल्स मसल्स।

‘रेडियोलॉजी’ में छपी एक स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों की छाती और पीठ की मांसपेशियां ज्यादा मजबूत होती हैं, उनमें अगले दस सालों में हार्ट अटैक आने या मौत होने का खतरा काफी कम होता है।रूटीन कोरोनरी CT स्कैन का एनालिसिस करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके, रिसर्चर्स ने पाया कि मांसपेशियों की सेहत दिल से जुड़ी बीमारियों के नतीजों का एक अहम संकेत है।

ये नतीजे इस बात के सबूत को और मजबूत करते हैं कि मांसपेशियां सिर्फ हमें हिलने-डुलने में मदद करने वाली संरचनाओं से कहीं ज्यादा हैं।वे मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती हैं, इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाती हैं, सूजन कम करती हैं और ऐसे केमिकल बनाती हैं जो दिल की सुरक्षा करते हैं।

स्टडी में मिले रिजल्ट से समझ आता है कि छाती और पीठ की मांसपेशियों का ज्यादा मास (द्रव्यमान) कई वजहों से हार्ट अटैक के खतरे से बचाव कर सकता है।ये ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी, शरीर में कुल फैट और पेट के फैट की कम मात्रा, फेफड़ों की ज्यादा क्षमता और सांस लेने की बेहतर क्षमता और बेहतर ग्लूकोज टॉलरेंस और लिपिड प्रोफाइल का संकेत देते हैं।

जो लोग रोजाना एक्सरसाइज करते हैं, उनमें पेट की चर्बी कम होती है, कोलेस्ट्रॉल का लेवल बेहतर होता है, फेफड़ों की क्षमता अच्छी होती है, वो हेल्दी डाइट लेते हैं और उनकी स्मोकिंग करने की संभावना भी कम होती है।ये सभी मिलकर दिल से जुड़े रोगों के खतरे को कम करते हैं।

जब मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, तो वे ‘मायोकाइन्स’ नाम के सिग्नलिंग प्रोटीन छोड़ती हैं। इनमें से एक अहम प्रोटीन ‘इंटरल्यूकिन- 6′ (IL-6) है, जो एक्सरसाइज के दौरान निकलता है।ये मॉलिक्यूल मेटाबॉलिज़्म को कंट्रोल करने, सूजन कम करने, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने और दिल पर दबाव कम करने में मदद करते हैं।

वैज्ञानिक अब कंकाल की मांसपेशियों को एक एंडोक्राइन अंग के तौर पर ज्यादा पहचानने लगे हैं, जो इन केमिकल मैसेंजर के जरिए दिल, लिवर और दूसरे टिश्यू से संपर्क करती हैं।

हेल्दी मसल्स धमनियों को भी ज्यादा लचीला बनाती हैं और ब्लड फ्लो को बेहतर करती हैं, जिससे हार्ट और ब्लड वेसल्स का कामकाज बेहतर होता है।

हालांकि हालिया स्टडी छाती और पीठ पर केंद्रित थी, लेकिन पैरों की मांसपेशियों जैसे कि पिंडली और जांघ के महत्व को साबित करने वाले सबूत कई सालों से जमा हो रहे हैं।

पिंडलियों की मांसपेशियों (calf muscles) को अक्सर शरीर का दूसरा दिल कहा जाता है, क्योंकि हर बार जब वे सिकुड़ती हैं, तो वे खून को वापस दिल की ओर पंप करने और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।

रिसर्च में लगातार यह पाया गया है कि जांघ की मजबूत मांसपेशियां होने से डायबिटीज, दिल की बीमारी और समय से पहले मौत का खतरा कम होता है।’अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में छपी एक स्टडी से पता चला है कि क्वाड्रिसेप्स (जांघ के अगले हिस्से में मौजूद चार मांसपेशियों का एक मजबूत ग्रुप) की ताकत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कुल मृत्यु दर में 23 प्रतिशत और दिल की बीमारी से होने वाली मौतों में 34 प्रतिशत की कमी आई।

कोपेनहेगन सिटी हार्ट स्टडी (2025) से पता चला है कि मांसपेशियों की अच्छी सेहत बनाए रखना, दिल की सेहत बनाए रखने का एक अहम हिस्सा है।

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