न्यूज़ डेस्क
”जहां भी कांग्रेस अपनी-अपनी 200 सीटों पर मजबूत है, हमने जो गणना की है, उन्हें लड़ने दें, हम उनका समर्थन करेंगे। लेकिन उन्हें अन्य राजनीतिक दलों का भी समर्थन करना होगा। अगर मैं कर्नाटक में आपका समर्थन करती हूं, लेकिन आप बंगाल में मेरे खिलाफ लड़ते हैं, तो यह नीति नहीं होनी चाहिए। कुछ अच्छा हासिल करना है तो कुछ क्षेत्रों में कुर्बानी देनी होगी। ” ये शब्द है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के।
ममता ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी पार्टियों को यह राय दी है। हालांकि की लोग ममता के इस बयान को ऐलानिया बयां भी कह रहे हैं। लेकिन इतना तो साफ़ है कि ममता ने जो कहा है उसी आधार पर विपक्षी एकता की बात हो सकती है। शायद कांग्रेस भी इससे इंकार नहीं सकती।
टीएमसी अध्यक्ष ममता ने कहा कि मैं आपको एक बात बता सकती हूं, जहां क्षेत्रीय पार्टी मजबूत है, वहां बीजेपी नहीं लड़ सकती और लोग निराश और हताश हैं। मान लीजिए कर्नाटक में वोट बीजेपी सरकार के खिलाफ एक जनादेश है।
सीएम ममता बनर्जी ने बताया कि इस महीने के अंत तक वह दिल्ली का दौरा करेंगी। वे 27 मई को नीति आयोग की बैठक में शामिल होंगी, क्योंकि राज्य के मुद्दों को उठाने का कोई अन्य विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली दौरे के दौरान विपक्ष की बैठक का कोई प्रस्ताव नहीं है।
इससे पहले शनिवार को ममता बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर आप साउथ से शुरुआत करें तो कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश उसके बाद बंगाल, बिहार, झारखंड फिर महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली इन राज्यों में पहले इनकी सरकार बनने का पीक टाइम रहा, लेकिन अब वे (बीजेपी) 100 सीटें भी नहीं पार कर पाएंगे।
उन्होंने अहंकार, दुर्व्यवहार, एजेंसी पॉलिटिक्स के खिलाफ लोगों से वोट टू नो बीजेपी कैंपेन का आह्वान किया। ममता ने कहा कि मैं कर्नाटक की जनता, मतदाताओं को सैल्यूट करती हूं और कांग्रेस पार्टी को जीत की बधाई देती हूं। अब छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनाव हैं, यहां भी बीजेपी को शिकस्त मिलेगी।

