सुवेंदु से मुलाकात फिर चुनाव से किनारा!नंदीग्राम में ममता की उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान

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पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनाई गईं संचिता प्रधान डे ने चुनावी मैदान से अपना नाम वापस लेने का फैसला किया है।नाम वापसी से पहले संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की
इस घटनाक्रम ने नंदीग्राम के उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज कर दी है।संचिता प्रधान डे को टीएमसी ने 13 सितंबर को को नंदीग्राम उपचुनाव के लिए उम्मीदवार ऐलान किया था।पार्टी ने उनके साथ रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को भी प्रत्याशी बनाया था।नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को प्रस्तावित है।

संचिता प्रधान डे नंदीग्राम के बोयाल इलाके से जुड़ी रही हैं।वह शिक्षिका भी रह चुकी हैं और 2018 से 2023 तक पंचायत समिति की सदस्य थीं।रिपोर्टों के मुताबिक, शिक्षक भर्ती मामले में करीब 26 हजार नियुक्तियां रद्द होने के दौरान उनकी नौकरी भी प्रभावित हुई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बहाल किया गया।वह लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी रही हैं।

नंदीग्राम सीट 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद खाली हुई थी।सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव जीता था, लेकिन बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखते हुए नंदीग्राम विधानसभा सीट छोड़ दी। इसी वजह से यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी।

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला भी सामने आया है। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। वहीं अरूप राय के नेतृत्व वाले गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ चुनाव चिन्ह दिया है।दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना गया है।

इसको लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि हम संवैधानिक पद का अनादर नहीं करते, लेकिन हमें लगता है कि आज हमारे लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला दिन है।हमारे देश में जो हो रहा है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, गैर-कानूनी, अलोकतांत्रिक और एक राजनीतिक पार्टी के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए की गई पूरी तरह से पक्षपाती बदले की कार्रवाई है। उन्होंने पहले ही कहा था कि नाम भी नहीं रहने दूंगा, निशान भी नहीं रहने दूंगा। ये लोग कौन हैं? आज वे सत्ता में हैं, हो सकता है कल न हों। उन्हें अपनी सीमा समझनी चाहिए।

वोट की चोरी पर बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कियह बहुत दुख की बात है। उन्होंने बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा और बंगाल में लूटपाट की।यह ‘झूठी BJP पार्टी’, एक ‘जुमला पार्टी’ है।इसका काम देश में लोकतंत्र, संविधान और शिक्षा व्यवस्था को खत्म करना है।पत्रकारों को भी नहीं बख्शा जाता। अगर कोई उनके खिलाफ बोलता है, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। हमसे पहले उद्धव ठाकरे को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था।मैं ऐसे किसी भी व्यक्ति का सम्मान नहीं करती जो सिर्फ BJP के अहंकार को संतुष्ट करने में लगा हो।

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