Homeदेशसुप्रीम कोर्ट में ममता की धारदार दलील, चुनाव आयोग को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट में ममता की धारदार दलील, चुनाव आयोग को नोटिस

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सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर जोरदार बहस हुई।ममता की सशक्त दलील के बाद कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मुख्यमंत्री की ओर से दायर मामले के साथ-साथ तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन की याचिका पर भी एक साथ सुनवाई की। कोर्ट रूम में मौजूद ममता बनर्जी ने खुद अपना पक्ष रखा।ममता का पक्ष सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि हमने 19 जनवरी को इस मामले को सुनने के बाद आदेश दिया था।हम नहीं चाहते कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति का नाम छूट जाए।हम यह सुनिश्चित भी करना चाहते हैं।मैं नहीं चाहता कि किसी भी जीवित व्यक्ति को मृत दिखाया जाए।प्रवासियों को मतदान करने का अधिकार होना चाहिए।मुख्य न्यायाधीश ने नामों की समस्या को भी स्वीकार किया।

कोर्ट रूम में बहस के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि शादी के बाद लड़कियों का उपनाम बदल जाता है।उन्हें बुलाया जा रहा है। कई लड़कियां दूसरे स्थानों पर जा रही हैं, उन्हें भी बुलाया जा रहा है। उन्होंने क्या आपके आदेशों का उल्लंघन किया है। क्या वे आपके आदेश का उल्लंघन कर सकते हैं? आपकी अदालत ने कहा था कि आधार कार्ड लिए जाएंगे, लेकिन वे उन्हें नहीं ले रहे हैं। एसआईआर का संचालन केवल चार विपक्षी शासित राज्यों में हो रहा है। विधानसभा चुनावों से पहले एसआईआर कराने की इतनी जल्दी क्यों है? उन्होंने त्योहारों के ज़रिए ऐसा किया। 100 लोग मारे गए। बीएलओ मारे जा रहे हैं।बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम को क्यों नहीं निशाना बनाया जा रहा है?

मुख्य न्यायाधीश ने मुख्यमंत्री से कहा कि हमने आपको आधार कार्ड के बारे में क्या कहना है, यह बता दिया है। आपको एक टीम नियुक्त करनी चाहिए, जिसे चुनाव आयोग प्रतिनियुक्ति पर लेगा, जो इस ‘वर्तनी की गलती’ के मुद्दे की जांच करेगी।ममता बनर्जी ने कहा कि ईआरओ और डीएम के पास कोई अधिकार नहीं हैं।उनसे सारे अधिकार छीन लिए गए हैं। बीजेपी शासित राज्यों से रोल ऑब्जर्वर लाए गए हैं।ये माइक्रो ऑब्जर्वर सभी नामों को हटा रहे हैं। उनके अनुसार, ये माइक्रो ऑब्जर्वर लोगों की बात नहीं सुनना चाहते, वे कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

आयोग के कानूनी सलाहकार राकेश द्विवेदी ने कहा कि हमने एसडीएम रैंक के अधिकारी के लिए आवेदन किया था, लेकिन हमें वह पद नहीं मिला। इसलिए सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। हमने कानून के अनुसार सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।फिर सॉलिसिटर जनरल ने बोलना शुरू किया। ठीक उसी समय ममता बनर्जी ने बोलना शुरू किया।ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे आपकी बात पर आपत्ति है।बंगाल में जिलों की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में कम है।हमारे पास एसडीएम भी कम हैं।हमने उन्हें वही दिया है जो वे चाहते थे।सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की नियुक्ति केवल बंगाल में हुई है। बंगाल को बुलडोजर से रौंदा जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि प्रत्येक राज्य में नए मुद्दे होंगे। इसके लिए एक विशिष्ट नियम होना चाहिए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आयोग को उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में सूचित किया जाना चाहिए। राज्य को भी यह जानकारी दी जानी चाहिए कि वह कितने अधिकारी उपलब्ध करा सकता है।

राज्य सरकार को बंगाली भाषा समझने वाले अधिकारियों की सूची उपलब्ध करानी चाहिए।
चुनाव आयोग को नाम में मामूली गलती के कारण किसी को भी बाहर नहीं करना चाहिए।
हमें सुनवाई की सूचना देते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
सुनवाई सोमवार को दोबारा होगी।

शादी के बाद जब लड़कियाँ अपने ससुराल जाती हैं, तो उनके नाम मिटा दिए जाते हैं।
गरीब लोग जब घर बदलते हैं, तो उनके नाम मिटा दिए जाते हैं।
पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया गया है।
जिस काम में दो साल लगते हैं, उसे लोग दो महीने में ही कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें परेशान किया जा रहा है।
मैं किसी पार्टी की ओर से नहीं, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए बोल रहा हूँ।

इससे पहले ममता बनर्जी के एसआईआर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में दोपहर 1 बजे के कुछ देर बाद शुरू हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने केस संख्या 37 (ममता का मामला) की सुनवाई की। जॉय गोस्वामी द्वारा दायर एसआईआर मामले की सुनवाई भी साथ-साथ हुई। मुख्यमंत्री स्वयं सुनवाई की शुरुआत से ही उपस्थित रहीं, जो एक अभूतपूर्व कदम रहा।शुरुआत में वकील ममता बनर्जी का पक्ष रख रहे थे।उस समय मुख्यमंत्री सामने नहीं आई थीं, लेकिन सुनवाई शुरू होने के कुछ ही समय बाद ममता ने अपनी सीट बदल ली और आगे की पंक्ति में बैठ गईं।

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