बिहार में मां मुंडेश्वरी का है बड़ा चमत्कारी धाम, यहां बगैर रक्त बहाए दी जाती है बकरे की ‘बलि’

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विकास कुमार
बिहार के कैमूर की पहाड़ियों पर मां मुंडेश्वरी धाम है। कैमूर पर्वत के पवरा पहाड़ी पर मां मुंडेश्वरी का चमत्कारी मंदिर है। मां का यह मंदिर संस्कृति और इतिहास को समेटे हुए है। मां मुंडेश्वरी के बारे में कहा जाता है कि यहां आज भी चमत्कार होते हैं। मां दूर्गा का यह मंदिर भक्तों के सभी मुरादों को पूरा करती हैं। जो भक्त माता का दर्शन करते हैं उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।

मां मुंडेश्वरी मंदिर में बलि देने की भी अनोखी प्रथा है। यहां की बलि प्रथा को सात्विक बलि प्रथा कहा जाता है। यहां पर बलि के लिए बकरा लाया जाता है, लेकिन उसके प्राण नहीं लिए जाते हैं यानि बकरे को काट कर बलि नहीं दी जाती है। बकरे को माता की मूर्ति के सामने लाया जाता है। इसके बाद पुजारी मां की मूर्ति को स्पर्श कर चावल बकरे पर फेंकते हैं, तब बकरा बेहोश हो जाता है। फिर थोड़ी देर बाद दोबारा अक्षत फेंकने पर बकरा उठ खड़ा होता है। मां मुंडेश्वरी मंदिर में होने वाले इस अनोखे बलि को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

मुंडेश्वरी मंदिर पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ है। इस मंदिर को शक्तिपीठ भी कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस जगह पर मां ने चण्ड-मुण्ड नाम के असुरों का वध किया था,इसलिए ही ये माता मुंडेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध हैं। 535 ईस्वी पूर्व में मुंडेश्वरी मंदिर की स्थापना की गई थी। मंदिर प्रबंधन से जुड़े गोपाल कृष्ण ने बताया कि कुछ दिन पहले यहां बेल्जियम से भी तीर्थयात्री आए थे।

बिहार का मुंडेश्वरी मंदिर अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है,यहां आने पर भक्तों को मन की शांति मिलती है,और उनकी मनोकामना पूरी हो जाती हैं।

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