न्यूज़ डेस्क
चुनाव आयोग ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के साथ ही चार राज्यों के विधान सभा चुनाव और 13 राज्यों की 26 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा भी की है। लेकिन इस घोषण एके साथ जहाँ चुनवी खेल शुरू हो गए हैं वही कई दलों ने चुनाव के लम्बे अंतराल को लेकर कई सवाल भी खड़े किये हैं।
कांग्रेस ने कहा है कि आगामी चुनाव लोकतंत्र को बचाने का आखिरी मौका होगा। तृणमूल कांग्रेस ने यह भी कहा है कि चुनाव आयोग ने एक या दो चरणों में चुनाव कराने के पश्चिम बंगाल सरकार के सुझाव पर ध्यान नहीं दिया। इसमें कहा गया है कि राज्य में सात चरण के मतदान से एक बार फिर मोटी जेब वाली पार्टियों को मदद मिलेगी। 44 दिन की मतदान अवधि 1951-52 में पहले लोकसभा चुनाव के बाद दूसरी सबसे लंबी अवधि होगी, जो चार महीनों में फैली हुई थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सात चरण के चुनाव का मतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर जगह दौरा करना चाहते हैं। इसे तीन या चार चरणों में पूरा किया जा सकता था। हमें इस बात की चिंता नहीं है कि क्या होने वाला है, लेकिन मोदीजी सात चरण रख रहे हैं। इसका मतलब है कि वह हर जगह दौरा करना चाहते हैं।
खड़गे ने कहा कि इस देश में, मैंने भी लगभग 12 चुनाव लड़े हैं और मुश्किल से चार चरण होते थे। यह इंगित करते हुए कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण शनिवार से लगभग सभी विकास कार्य रोक दिए जाएंगे, कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि आचार संहिता के कारण लगभग 70-80 दिन विकास का कार्य रुक जाएगा, ऐसे में कल्पना कीजिए कि देश कैसे प्रगति करेगा? बजट खर्च नहीं किया जाएगा। मेरे अनुसार यह अच्छा नहीं है। वह चुनाव तीन या चार चरणों में पूरा कर सकते थे।
उधर ,तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक या दो चरणों में चुनाव होने चाहिए, सात दौर के मतदान से मोटी जेब वाले दलों को मदद मिलेगी। जिन पार्टियों को ज्यादा फंड मिला उनको होगा फायदा।
लोकसभा सांसदों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या वाली विपक्षी पार्टी द्रमुक के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि हमें अनुमान था कि तमिलनाडु में चुनाव पहले चरण में होंगे। हालांकि, 4 जून तक इंतजार करना एक ऐसा सवाल है जिसके लिए पार्टी को तैयार रहना होगा।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ये मील का पत्थर चुनाव चुनावी बांड, विपक्षी दलों और राजनेताओं को जेल भेजने, निलंबन और छापे मारने और मुख्य राष्ट्रीय विपक्षी दल के फंड को रोकने जैसे घोटालों के बादल के तहत हो रहे हैं।
बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के हवाले से कहा गया कि हम राज्य में एक या दो चरण में लोकसभा चुनाव चाहते थे। हमारा विचार था कि बहु-चरणीय चुनाव से राजनीतिक दलों को अधिक पैसा कमाने में मदद मिलती है और उन्हें दूसरों पर बढ़त मिलती है।
