बीरेंद्र कुमार झा
एसटी में शामिल किए जाने की मांग को लेकर झारखंड और उड़ीसा में बुधवार सुबह 6:00 बजे से कुर्मी समाज का रेल टीका, डहर छींका आंदोलन शुरू हुआ।झारखंड में यह आंदोलन मुरी, गोमो, घाघरा और नीमडीह स्टेशन पर हो रहा था। मुरी व गोमो में अधिकारियों के साथ आंदोलनकारी की हुई वार्ता के बाद शाम करीब 6:00 बजे कुर्मी/कुड़मी समाज के प्रतिनिधियों ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी,जबकि नीमडीह और घाघरा स्टेशन पर लिखित आश्वासन देने के बावजूद आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक पर जमें रहे।
नीमडीह और घाघरा में उग्र हुए आंदोलनकारी
चक्रधरपुर रेल मंडल के घाघरा स्टेशन पर जमे आंदोलनकारी पर रात 9:25 बजे पुलिस प्रशासन ने लाठी चार्ज कर ट्रैक को खाली कराया गया। इस दौरान आंदोलनकारी ने पथराव किया, जिसमें मनोहरपुर के बीडीओ हरि उराऊं व थाना प्रभारी अमित कुमार ,डीएसपी अजीत कुजूर के एएसआई ,आरपीएफ जवान ,दो पुरुष और पांच महिला जवान, व पुलिस के कई जवानों को चोट आई है। वही एक आंदोलनकारी को गिरफ्तार किया गया है। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में कराया गया।
इससे पहले दोपहर के वक्त नीमडीह रेलवे स्टेशन पर भी पुलिस ने आंदोलन कार्यों पर लाठियां बरसाई थी।पुलिस ने आंदोलनकारियों को स्टेशन से 300 मीटर पहले ही रोक दिया। दोपहर में आंदोलनकारी जबरन स्टेशन जाने लगे तो पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा।वहीं आंदोलनकारी ने भी पुलिस पर पथराव किया। घटना में आधा दर्जन के करीब आंदोलनकारी घायल हुए हैं।
मुख्य सचिव से 25 सितंबर को बातचीत
मुरी रेलवे स्टेशन पर इस आंदोलन का नेतृत्व कुर्मी /कुड़मी विकास मोर्चा अध्यक्ष शीतल ओहदार , हरमोहन महतो और रामपद महतो कर रहे थे। देर शाम सदर एसडीओ सहित अन्य पदाधिकारी ने आंदोलनकारी के साथ वार्ता की। इसके बाद श्री ओहदार ने आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने 25 सितंबर को मुख्य सचिव के साथ वार्ता करने का लिखित आश्वासन दिया है। साथ ही 2 अक्टूबर को केंद्रीय गृह सचिव के साथ वार्ता का प्रस्ताव दिया गया है।अगर इसके बाद भी हमारी मांगे नहीं मानी गई तो तो हम आगे की रणनीति उसके बाद तय करेंगे।
उन्होंने कहा कि आज कुर्मी) कुड़मी समाज के लोग बीजेपी, जेएमएम कांग्रेस आदि राजनीतिक दलों का झंडा थामे हुए हैं। इस वजह से समाज के लोग एकजुट नहीं हो पा रहे हैं। हम लोग उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं।हमने साफ कर दिया है कि समाज के लोग केवल 2 साल के लिए पार्टी छोड़कर मंच का झंडा थाम लें तो रिजल्ट मिलते देर नहीं लगेगी।

