विपक्षी एकता के तीन फॉर्मूले तय, कई राज्यों में क्षत्रप करेंगे टिकट बंटवारा !

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अखिलेश अखिल 

23 जून को पटना में होने वाली  विपक्षी एकता की बैठक पर पुरे देश की नजर लगी है। खुद बीजेपी भी इस बैठक के परिणाम को देख रही है। बीजेपी की नजर इस बात पर है कि इस बैठक में कितने लोग आते हैं और उनकी राजनीतिक हैसियत क्या है ? बीजेपी यह भी देख रही है कि जिन राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा है वहां कांग्रेस के साथ क्या कुछ होता है और फिर किस आधार पर सीटों का बंटवारा होता है। बीजेपी को पता है कि हिमाचल और कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस की स्थिति बदली है और कई राज्यों में उसके संगठन में भी जोश आ रहे हैं।      
 बीजेपी यह भी देख रही है कि यूपी समेत वे कई राज्य जहाँ कांग्रेस काफी कमजोर हो गई थी वहां भी कांग्रेस को लेकर लोगों में उत्साह दिख रहा है। बीजेपी यह भी देख रही है कि दलित और मुसलमानो का बड़ा चंक कांग्रेस की तरफ जाता दिख रही है। कर्नाटक चुनाव इसके बड़े उदहारण है। बीजेपी को यह भी लगता है कि अगर दलितों और मुसलमानो का प्रेम अगर कांग्रेस के साथ बढ़ता है तो इस बात की सम्भावना भी बढ़ रही है कि कम से कम यूपी के ब्राह्मण भी कांग्रेस के साथ जा सकते हैं और ऐसा हुआ तो खेल कुछ और भी हो सकता है। बीजेपी को या भी पता है कि यूपी में ब्राह्मणों की नाराजगी योगी सरकार से है और उसे जब लगेगा कि कांग्रेस बीजेपी को टक्कर देने की स्थिति में है तो वह कभी भी पाला बदल सकते हैं।      
 लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि पटना की बैठक में किस आधार पर सीटों का बँटवारा होगा ? सूत्रों से मिल रही  मुताबिक सीट बटवारे के लिए तीन फॉर्मूले की तैयार की जा रही है। पहला फार्मूला तो यही है कि 2014 और 2019 के परिणाम  के आधार पर सीटों का बंटवारा हो सकता है। इसके  आये थे उसे आधार बनाया जा सकता है। दूसरा फार्मूला यह है कि यूपी ,महाराष्ट्र ,बिहार,तमिलनाडु  और बंगाल में क्षेत्रीय दल करेंगे टिकट का बँटवारा और तीसरा फार्मूला यह है कि सिम्बल की जगह जिताऊ उम्मीदवार पर जोर। इसके लिए संयुक्त कमेटी बी सकती है।        
   जानकारी के मुताबिक इस बैठक में तीन राष्ट्रीय पार्टी ,दर्जन भर राज्य स्तर की पार्टी और चार छोटी पार्टी शामिल हो रही है। इसके साथ ही कई और पार्टियां भी है जो बैठक में हिस्सा तो नहीं लेगी लेकिन उनकी बैठक अलग से नीतीश कुमार के साथ होगी। इसके साथ ही बिहार की सात पार्टियां जो महा गठबंधन में है  नीतीश कुमार के साथ है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह कि पटना की बैठक अभी उन्होइ दलों को बुलाया गया कि जो आगामी चुनाव साथ  लड़ेंगे। इसे प्री पोल अललाइंस भी कह सकते हैं।  
   सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक देश की 450 लोकसभा सीटों पर विपक्ष से एक उम्मीदवार उतारने पर सहमति बन गई है। पटना की बैठक में शामिल होने के लिए कांग्रेस, आप और वाम दल ,राष्ट्रवादी पार्टी, सपा, टीएमसी, शिवसेना (यूबीटी),  जेएमएम , डीएमके, नेशनल कॉन्फ्रेंस, मुस्लिम लीग, एमडीएमके को आमंत्रण भेजा गया है। इसके अलावा केरल कांग्रेस (मणि), आरएसपी, वीसीके जैसी छोटी पार्टियों को भी गठबंधन के लिए न्यौता दिया गया है। सभी नेताओं की मीटिंग नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर हो सकती है। खबर के मुताबिक गठबंधन में शामिल होने वाले दल उसी दिन चेयरमैन और संयोजक का नाम फाइनल करेंगे। नीतीश कुमार विपक्षी एकता के संयोजक बनाए जा सकते हैं. चेयरमैन का पद कांग्रेस को मिल सकता है।    
जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र ,यूपी ,बिहार ,तमिलनाडु और बंगाल में स्थानीय क्षत्रप ही टकट का बँटवारा करेंगे। जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक पश्चिम बंगाल में टीएमसी 34  सीटों पर चुनाव लड़ सकती है जबकि कांग्रेस को 6 सीट मिल सकती है। वं दाल को यहाँ  4 सीट दी जा सकती है। इसी तरह बिहार की 40 सीटों में राजद और जदयू 16 -16 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है जबकि कांग्रेस को 6 से आठ आठ सीटें मिल सकती है। माले को भी दो सीटें देने की बात हो रही है। उत्तर प्रदेश में 80 सीट है। कांग्रेस का दावा यहां अधिक सीटों पर है, लेकिन सपा देने को तैयार नहीं है। गठबंधन के फॉर्मूले के हिसाब से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को 7-12 सीटें मिल सकती है। इनमें रायबरेली, अमेठी, कुशीनगर, फतेहपुर सीकरी, कानपुर, बिजनौर और सीतापुर जैसी सीटें हैं। हालांकि, कांग्रेस की डिमांड हाई है। कांग्रेस 2009 के रिजल्ट के आधार पर 20-25 सीटों का दावा भी ठोक रही है। आरएलडी को 3-5 सीट मिलने का अनुमान है। जयंत चौधरी की पार्टी को मथुरा, बागपत, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर जैसी सीटें मिल सकती है। चंद्रशेखर आजाद सहारनपुर सीट से मैदान में उतर सकते हैं। बाकी के बचे सीटों पर अखिलेश यादव की पार्टी चुनाव लड़ेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर मायावती गठबंधन में आने पर हामी भरती है तो उन्हें भी गठबंधन में एडजस्ट किया जाएगा।   
                इसी तरह महाराष्ट्र में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।  महाराष्ट्र में लोकसभा की कुल 48 सीटें हैं। कांग्रेस 16-16-16 सीटों का फॉर्मूला लागू करने की मांग कर रही है।  उद्धव ठाकरे 18 सीटों पर अपना दावा ठोक रखा है। 2019 में उद्धव की पार्टी को 18 सीटें मिली थी। एनसीपी के अजित पवार भी उद्धव के इस दावे का समर्थन कर चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) को 18 और एनसीपी-कांग्रेस को 15-15 सीटें मिल सकती है। 
             तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं और पिछली बार की तरह इस बार भी डीएमके और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। डीएमके पिछली बार की तरह ही इस बार भी 28 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि कांग्रेस को 10 और एक सीट मुस्लिम लीग को मिल सकता है। कांग्रेस तमिलनाडु में डीएमके के सहारे 9 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। 2019 में कांग्रेस का सबसे सफल गठबंधन तमिलनाडु में ही रहा था। हरियाणा में लोकसभा की 10 सीटें हैं और यहां कांग्रेस के इनेलो से गठबंधन में रहकर चुनाव लड़ सकती है। इनेलो के मुखिया ओम प्रकाश चौटाला को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। इनेलो की ही रैली में नीतीश समेत कई विपक्षी नेता पहली बार जुटे थे। हरियाणा में अगर इनेलो-कांग्रेस का गठबंधन होता है, तो कांग्रेस 8 और इनेलो 2 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। इनेलो को हिसार और जिंद सीट गठबंधन के तहत दिया जा सकता है। 

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