सरकारी खजाने पर भारी बोझ बनती जा रही है कर्नाटक की पांच गारंटी योजना !

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न्यूज़ डेस्क 
चुनाव जीतने के लिए गारंटी की कहानी कितनी बोझिल होती है उसकी बानगी अब कर्णाटक में देखने को मिल रही है। कर्णाटक की राज्य सरकार भले ही उन गारंटियों को लागु करती जा रही है लेकिन इन गारंटियों ने कर्नाटक की सरकार को सकते में दाल दिया है। अब तो राज्य के अधिकारी भी कहने लगे हैं इन गारंटियों का राज्य के खजाने पर बड़ा असर डाल पड़ता जा रहा है। 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के आर्थिक सलाहकार बसवराज रायारेड्डी ने माना है कि पांच गारंटी योजना सरकार के लिए बड़ा वित्तीय बोझ बन गयी है तथा इन गारंटियों के कार्यान्वयन से राज्य के खजाने पर असर पड़ रहा है।
 रायारेड्डी ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा , “पांच गारंटी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 58,000 करोड़ रुपये के व्यय निर्धारित किए गए हैं। राज्य के खजाने पर असर को ध्यान में रखते हुए हम इन गारंटी योजनाओं में कुछ बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। एक आर्थिक सलाहकार के रूप में, मैं राज्य और केंद्र से फंड गारंटी के लिए धन प्राप्त करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा हूं। हम इस संबंध में चर्चा कर रहे हैं।”

राज्य के मंत्री शरणबसप्पा दर्शनपुर ने गत जून में स्वीकार किया था कि गारंटी योजनाएं प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास पर असर डालेंगी। इन गारंटी योजनाओं के कारण राज्य के खजाने पर 40,000 करोड़ रुपये से 50,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी गत जुलाई में स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार इस साल विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए धन की कमी से जूझ रही है , क्योंकि पांच चुनावी गारंटी को लागू करने के लिए 40,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

कुछ कांग्रेस विधायकों की ओर से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास के लिए फंड आवंटन के मुद्दे पर असंतोष जताये जाने को लेकर  शिवकुमार ने कहा कि इस संबंध में आज शाम एक बैठक बुलायी गयी है जिसमें इन विसंगतियों पर चर्चा की जायेगी।

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