अखिलेश अखिल
कर्नाटक की नयी सिद्धारमैया सरकार ने उन नौकरशाहों की पहचान शुरू कर दी है जिसका वास्ता संघ से जुड़ा रहा है और जिन्हे पिछली बीजेपी सरकार से समर्थन मिल रहा था। अब ऐसे नौकरषाऊँ की तलाश की जा रही है। खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को कई मंत्रालयों से ऐसे दर्जनों नौकरषाऊँ की सूची मिली है जो पिछली सरकार में संघ के इशारे पर काम कर रहे थे और लगातर संघ के लिए काम कर रहे थे और हिंदुत्व की कहानी को आगे बढ़ा रहे थे।
इससे पहले डी के शिवकुमार ने भगवाकरण पर पुलिस विभाग को खुली चेतावनी दी है और नियम पुस्तिका का सख्ती से पालन करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस सरकार के प्रमुख लक्ष्यों में से एक गृह विभाग है, जिसके माध्यम से बीजेपी ने अपने हिंदुत्व के एजेंडे को अंजाम दिया और विपक्ष, मुख्य रूप से कांग्रेस नेताओं पर हमला किया। कहा जा रहा है कि नौकरशाहों ने बीजेपी के साथ विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई की है उन्हें किसी भी सूरत में नहीं बख्सा जायेगा। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि किसी अजेंडे के तहत कोई काम करता है तो उसे कतई बर्दास्त नहीं किया जा सकता।
शिवकुमार ने राज्य के नांजे गौड़ा और उरी गौड़ा के नाम पर एक मुखौटा स्थापित करने की अनुमति देने के लिए पूर्व डीजीपी प्रवीण सूद को गिरफ्तार करने की मांग की है। शिवकुमार ने कहा था कि बेंगलुरू-मैसूरु एक्सप्रेसवे को समर्पित करने के लिए पीएम मोदी की कर्नाटक यात्रा के दौरान, सूद ने नन्जे गौड़ा और उरी गौड़ा के नाम पर एक मुखौटा की अनुमति देकर इतिहास के विरूपण की अनुमति दी थी। उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए और उन्हें गिरफ्तार होना चाहिए।
सूत्रों ने बताया कि संघ से जुड़े राज्य के शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी जिन्होंने पाठ्यपुस्तक में संशोधन किया, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी जिन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को सुगम बनाया और जिन्हें वित्त, शहरी विकास, बीबीएमपी, बीडीए और अन्य आकर्षक विभागों में आरएसएस की सिफारिश पर नियुक्त किया गया, जल्द ही उनका तबादला कर दिया जाएगा। ऐसे नवकरसहों को सेंटिंग में डाला जा सकता है। वे किसी भी बड़े पद पर नहीं रहेंगे।

