कलकत्ता हाई कोर्ट ने कुड़मी/ कुर्मी आंदोलन पर लगाई रोक

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बीरेंद्र कुमार झा

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल में कुड़मी/ कुर्मी आंदोलन पर रोक लगा दी है। इस आदेश के आलोक में झाड़ग्राम जिला कुड़मी/ कुर्मी समाज के युवा सभापति कल्याण महतो ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कुड़मी/ कुर्मी आंदोलन को स्थगित किया गया है।कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को मानते हुए पश्चिम बंगाल में कोस्तुर और खेमासूली में आंदोलन स्थगित कर दिया गया है।आगे की रणनीति बाद में तय की जाएगी।

172 ट्रेनों को कर दिया गया था रद्द

20 सितंबर से अनिश्चितकालीन रेल रोको आंदोलन की घोषणा कुड़मी/ कुर्मी समुदाय के लोगों ने की थी ।इसको लेकर करीब 172 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया था, जबकि कई ट्रेनों का रूट डायवर्ट कर दिया गया था ।गौरतलब है कि कुड़मी/ कुर्मी समुदाय की मांग है कि उसे एसटी का दर्जा दिया जाए।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने किया हस्तक्षेप

कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब सारी ट्रेनें सामान्य तरीके से ही चलेंगी।इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। अंतिम समय में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और कहा कि कुड़मी/ कुर्मी समुदाय चाहे तो इसको लेकर अपनी आवाज संस्थागत स्थान पर बुलंद करें। लेकिन इस तरह का आंदोलन जिससे आम जनमानस परेशान हो उसे करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

कुड़मी/ कुर्मी समाज की मांग

कुड़मी/ कुर्मी संगठनों ने इस समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने और कुरमाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए 20 सितंबर से झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के 9 रेलवे स्टेशन पर रेल रोको का आह्वान किया था, हालांकि अब कलकत्ता हाई कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी है।कुर्मी जनजाति 73 वर्षों से अपनी संवैधानिक पहचान की लड़ाई लड़ रही है और केंद्र सरकार से दो मुख्य मांगों को लेकर संघर्षरत है।लेकिन उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। इससे पहले भी कुड़मी/ कुर्मी समाज ने अपने मांगों को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया था और रेल चक्का जाम किया था। इससे काफी ट्रेनें प्रभावित हुई थी आश्वासन के बाद रेल जाम हटाया गया था l,लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की गई थी।

 

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